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Deepak2020 उत्पन्ना एकादशी व्रत का दिन नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, भारत के लिएDeepak

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2020 उत्पन्ना एकादशी
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नई दिल्ली, भारत
उत्पन्ना एकादशी व्रत
10वाँ,11वाँ
दिसम्बर 2020
Thursday / गुरूवार
Friday / शुक्रवार
उत्पन्ना एकादशी
Lord Vishnu in Ksheer Sagar
उत्पन्ना एकादशी पारण

उत्पन्ना एकादशी पारण

उत्पन्ना एकादशी बृहस्पतिवार, दिसम्बर 10, 2020 को
11वाँ दिसम्बर को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 01:17 पी एम से 03:21 पी एम
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय - 03:18 पी एम
एकादशी तिथि प्रारम्भ - दिसम्बर 10, 2020 को 12:51 पी एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त - दिसम्बर 11, 2020 को 10:04 ए एम बजे
उत्पन्ना एकादशी पारण

उत्पन्ना एकादशी पारण

गौण उत्पन्ना एकादशी शुक्रवार, दिसम्बर 11, 2020 को
12वाँ दिसम्बर को, गौण एकादशी के लिए पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 07:05 ए एम से 09:09 ए एम
पारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।
एकादशी तिथि प्रारम्भ - दिसम्बर 10, 2020 को 12:51 पी एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त - दिसम्बर 11, 2020 को 10:04 ए एम बजे

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में नई दिल्ली, भारत के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

2020 उत्पन्ना एकादशी

एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है।

एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए। कुछ कारणों की वजह से अगर कोई प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए।

कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दुसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं।

भगवान विष्णु का प्यार और स्नेह के इच्छुक परम भक्तों को दोनों दिन एकादशी व्रत करने की सलाह दी जाती है।

Kalash
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