महत्वपूर्ण तमिल त्योहारों का संग्रह संक्षिप्त विवरण के साथ, जो तमिल सौर कैलेण्डर पर आधारित हैं।
थाई पोंगल - पोंगल एक लोकप्रिय हिन्दु त्यौहार है, जिसे तमिल नाडु के लोगो द्वारा थाई मास के प्रथम दिवस पर मनाया जाता है। आप इस लेख में थाई पोंगल संक्रान्ति का क्षण ज्ञात कर सकते हैं। थाई पोंगल को उत्तर भारतीय राज्यों में मकर संक्रान्ति के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान सूर्य को समर्पित पर्व है।
पुथन्डु - तमिल मास चिथिरई के पहले दिन वरुषा पिराप्पू या तमिल नव वर्ष मनाया जाता है।
कर्थिगाई दीपम - वह दिन जब कार्तिगाई नक्षत्र तमिल माह कार्तिकाई (वृश्चिक राशि) में पूर्णिमा के साथ मेल खाता है, उसे कार्तिगाई दीपम के रूप में जाना जाता है। कार्तिगाई दीपम् को कार्तिकाई दीपम् भी कहा जाता है। यह पर्व मुख्यतः तमिल हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है।
सूरसम्हारम - तमिल हिन्दुओं के लिये, सूरसम्हारम छह दिवसीय कन्द षष्ठी उत्सव का अन्तिम एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है। मान्यताओं के अनुसार सूरसम्हारम के दिन भगवान मुरुगन ने सुरपद्मन नाम के दैत्य को युद्ध में पराजित किया था। सूरसम्हारम के अगले दिन थिरु कल्याणम मनाया जाता है।
वैकुण्ठ एकादशी - मान्यताओं के अनुसार, इस दिन वैकुण्ठ द्वार खुला रहता है तथा जो भक्तगण वैकुण्ठ एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह तमिल कैलेण्डर में एक लोकप्रिय एकादशी है। वैकुण्ठ एकादशी को मुक्कोटी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
थाईपूसम - थाईपूसम एक हिन्दु पर्व है जो मुख्यतः तमिल समुदाय द्वारा मनाया जाता है। यह तमिल सौर माह थाई में आता है। इस दिन माता पार्वती ने भगवान मुरुगन को सुरपद्म नामक राक्षस को परास्त करने हेतु एक दिव्यास्त्र भाला प्रदान किया था।
कारादाइयन नौम्बू - कारादाइयन नौम्बू अथवा करादैयन नोनबू एक प्रमुख तमिल त्यौहार है। कारादाइयन नौम्बू का पर्व मीन संक्रान्ति के समय मनाया जाता है। तमिल कैलेण्डर में मीन संक्रान्ति को मीन संक्रमणम् के रूप मे जाना जाता है।
हनुमथ जयन्थी - तमिल कैलेण्डर के अनुसार हनुमान जयन्ती मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन मनायी जाती है। तमिल नाडु में हनुमान जयन्ती को हनुमथ जयन्थी के रूप मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन मूल नक्षत्र में हनुमान जी का जन्म हुआ था।
अरुद्र दर्शन - अरुद्र दर्शन, भगवान शिव को समर्पित एक तमिल त्यौहार है, जो मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन अरुणोदय काल में भगवान शिव के नटराज स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में, इस दिन को भगवान शिव के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
अवनी अवित्तम - यजुर्वेद उपाकर्म के अवसर पर, ब्राह्मण श्रौत अनुष्ठान सहित अपने उपनयन को परिवर्तित करते हैं। यजुर्वेद का अनुसरण करने वाले व्यक्ति श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर उपाकर्म करते हैं। उपाकर्म के अगले दिन को गायत्री जापम दिवस कहा जाता है।
चित्रा पौर्णमि - चिथिराई माह की पूर्णिमा तिथि को चित्रा पौर्णमि के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व, भगवान चित्रगुप्त के सम्मान में मनाया जाता है। धर्मग्रन्थों के अनुसार, भगवान चित्रगुप्त, सृष्टि के समस्त प्राणियों के कर्मों का विवरण अपनी पुस्तक में लिखते रहते हैं।
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