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महालक्ष्मी | श्री देवी | धन की देवी

DeepakDeepak

श्री लक्ष्मी

महालक्ष्मी

श्री महालक्ष्मी सम्पत्ति, समृद्धि एवं सौभाग्य की देवी हैं। वह प्रेम एवं सुन्दरता का अवतार हैं। देवी महालक्ष्मी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं। देवी महालक्ष्मी का प्राकट्य क्षीर सागर से समुद्रमन्थन के समय हुआ था। देवी श्री लक्ष्मी ने स्वेच्छा से भगवान विष्णु को अपने वर के रूप में स्वीकार किया था। महालक्ष्मी को श्री के रूप में भी जाना जाता है।

लक्ष्मी कुटुम्ब

विभिन्न धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार, महालक्ष्मी महर्षि भृगु की सुपुत्री थीं, जो सप्तऋषियों में से एक थे। समुद्रमन्थन के समय महालक्ष्मी का पुनर्जन्म हुआ था। महालक्ष्मी ने स्वेच्छा से भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया तथा उनके साथ वैकुण्ठ में निवास करने लगीं। भगवान विष्णु के श्री राम एवं श्री कृष्ण अवतार के समय, देवी श्री लक्ष्मी ने देवी सीता एवं देवी राधा के रूप में अवतार धारण किया था।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी महालक्ष्मी के 18 पुत्र हैं, जिनके नाम देवसखा, चिक्लीत, आनन्द, कर्दम, श्रीप्रद, जातवेद, अनुराग, सम्वाद, विजय, वल्लभ, मद, हर्ष, बल, तेज, दमक, सलिल, गुग्गुल, कुरूण्टक आदि हैं।

श्री लक्ष्मी स्वरूप वर्णन

श्री लक्ष्मी जी को चतुर्भुज रूप में कमल-पुष्प पर खड़ी अथवा विराजमान मुद्रा में चित्रित किया जाता है। वह अपने ऊपरी दो हाथों में कमल पुष्प धारण करती हैं। उनका अन्य एक हाथ वरद मुद्रा में होता है, जो भक्तों को सम्पत्ति एवं समृद्धि प्रदान करता है। अन्तिम हाथ अभय मुद्रा में होता है, जिसके द्वारा देवी माँ भक्तों को शक्ति तथा साहस प्रदान करती हैं।

देवी लक्ष्मी को लाल रँग के वस्त्र धारण किये हुये एवं स्वर्णाभूषणों से अलङ्कृत दर्शाया जाता है। देवी के मुखमण्डल पर शान्ति एवं सुख का भाव होता है। देवी को एक सुन्दर उपवन अथवा नीले सागर में विराजमान दर्शाया जाता है।

उनके समीप दो अथवा चार गजराज (हाथी) होते हैं, जो देवी का जलाभिषेक करते रहते हैं। श्वेत गज एवं उल्लू को देवी लक्ष्मी का वाहन माना जाता है।

लक्ष्मी उत्सव एवं व्रत

लक्ष्मी मन्त्र

लक्ष्मी अवतार एवं स्वरूप

  • आदिलक्ष्मी - जो सृष्टि की सर्वप्रथम माता हैं।
  • धनलक्ष्मी - जो सम्पत्ति प्रदान करती हैं।
  • धान्यलक्ष्मी - जो अन्न एवं आहार प्रदान करती हैं।
  • गजलक्ष्मी - जो शक्ति एवं सामर्थ्य प्रदान करती हैं।
  • सन्तानलक्ष्मी - जो सन्तान एवं वंश वृद्धि प्रदान करती हैं।
  • वीरलक्ष्मी - जो वीरता एवं साहस प्रदान करती हैं।
  • विजयलक्ष्मी - जो समस्त प्रकार के शत्रुओं पर विजय प्रदान करती हैं।
  • ऐश्वर्यलक्ष्मी - जो समस्त प्रकार के भोग-विलास प्रदान करती हैं।

देवी महालक्ष्मी के उपरोक्त आठ स्वरूपों को संयुक्त रूप से अष्टलक्ष्मी के रूप में जाना जाता है। इन आठ स्वरूपों के अतिरिक्त, देवी लक्ष्मी को निन्मलिखित रूपों में भी पूजा जाता है।

  • विद्यालक्ष्मी - जो विद्या एवं ज्ञान प्रदान करती हैं।
  • सौभाग्यलक्ष्मी - जो सौभाग्य प्रदान करती हैं।
  • राज्यलक्ष्मी - जो राज्य एवं भू-सम्पत्ति प्रदान करती हैं।
  • वरलक्ष्मी - जो वरदान प्रदान करती हैं।
  • धैर्यलक्ष्मी - जो धैर्य प्रदान करती हैं।

लक्ष्मी देवालय

  • लक्ष्मीनारायण मन्दिर, नयी दिल्ली
  • महालक्ष्मी मन्दिर, मुम्बई
  • महालक्ष्मी मन्दिर, कोल्हापुर
  • महालक्ष्मी स्वर्ण मन्दिर, श्रीपुरम
  • लक्ष्मी देवी मन्दिर, डोड्डागड्डावल्ली
  • अष्टलक्ष्मी कोविल मन्दिर, चेन्नई
  • अष्टलक्ष्मी मन्दिर, हैदराबाद
  • लक्ष्मी मन्दिर, खजुराहो
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