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आरती कुंज बिहारी की, भगवान कृष्ण आरती - हिन्दी गीतिकाव्य और वीडियो गीत

DeepakDeepak

कुंजबिहारी जी की आरती

आरती कुंज बिहारी की, भगवान कृष्ण की सर्वाधिक लोकप्रिय आरतियों में से एक है। कृष्ण जन्माष्टमी अथवा श्रीकृष्ण जयन्ती सहित भगवान कृष्ण से जुड़े अधिकांश शुभ अवसरों पर अत्यन्त हर्षोल्लास से आरती का गायन किया जाता है। इस आरती की लोकप्रियता के कारण इसे कृष्ण भक्तों के घरों एवं विभिन्न कृष्ण मन्दिरों में नियमित रूप से गाया जाता है।

बिहारी, भगवान कृष्ण के सहस्र नामों में से एक है तथा कुंज का अभिप्राय वृन्दावन के हरे-भरे वृक्षों से है। कुंज बिहारी का अर्थ है, वृन्दावन की हरी-भरी लता-पताओं में विचरण करने वाले सर्वोच्च भगवान कृष्ण।

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॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।

गले में बैजंती माला,बजावै मुरली मधुर बाला।

श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला।

गगन सम अंग कांति काली,राधिका चमक रही आली।

लतन में ठाढ़े बनमाली;भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,

चन्द्र सी झलक;ललित छवि श्यामा प्यारी की॥

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ x2

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,देवता दरसन को तरसैं।

गगन सों सुमन रासि बरसै;बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,

ग्वालिन संग;अतुल रति गोप कुमारी की॥

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ x2

जहां ते प्रकट भई गंगा,कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।

स्मरन ते होत मोह भंगा;बसी सिव सीस, जटा के बीच,

हरै अघ कीच;चरन छवि श्रीबनवारी की॥

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ x2

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,बज रही वृंदावन बेनू।

चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू;हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद,

कटत भव फंद;टेर सुन दीन भिखारी की॥

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ x2

आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ x2

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