
मृगशिरा नक्षत्र - मृगशिरा वैदिक ज्योतिष में पाँचवाँ नक्षत्र है, जिसका विस्तार 23°20' वृषभ से 6°40' मिथुन तक है।
प्रतीक चिह्न - इस नक्षत्र का प्रतीक हिरण का मुख है।
खगोलीय नाम - इस नक्षत्र के खगोलीय नाम λ और φ ओरायोनिस (Orionis) हैं।
नक्षत्र के देवता - चन्द्रमा के देवता सोम ही मृगशिरा नक्षत्र के अधिष्ठाता हैं।
शासक ग्रह - मृगशिरा नक्षत्र पर मंगल (मंगल ग्रह) ग्रह का शासन होता है।
अन्य - मृगशिरा अथवा मृगशीर्ष शब्द दो संस्कृत शब्दों के संयोजन से बना है। मृग का अर्थ है पशु तथा शीर्ष का अर्थ है सिर अथवा मस्तक का शीर्ष। इस नक्षत्र का प्रथम चरण अथवा पाद वृषभ राशि में होता हैं, तथा शेष चरण मिथुन राशि में होते हैं।
नक्षत्र अस्त उदय - मृगशिरा प्रति वर्ष लगभग 16 दिनों की अवधि के लिये अस्त हो जाता है। मृगशिरा नक्षत्र के अस्त एवं उदय होने का समय ज्ञात करने हेतु सम्बन्धित पृष्ठ देखें - मृगशिरा अस्त उदय।
नक्षत्र गोचर - मृगशिरा को अधिकांश शुभ कार्यों हेतु उत्तम माना जाता है। वर्ष पर्यन्त, चन्द्रमा किस समय मृगशिरा नक्षत्र में गोचर कर रहा है, यह ज्ञात करने हेतु उक्त पृष्ठ का अवलोकन करें - मृगशिरा नक्षत्र के सभी दिनों की सूचि।