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Dhanteras Puja

Deepak2019 सूरसम्हारम व्रतम् का दिन नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, इण्डिया के लिएDeepak

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2019 सूरसम्हारम
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नई दिल्ली, इण्डिया
सूरसम्हारम
2वाँ
नवम्बर 2019
Saturday / शनिवार
सूरसम्हारम
soorasamharam
सूर सम्हारम समय

सूर सम्हारम समय

स्कन्द षष्ठी शनिवार, नवम्बर 2, 2019 को
कन्द षष्ठी व्रत प्रारम्भ सोमवार, अक्टूबर 28, 2019 को
सुब्रहमन्य षष्ठी सोमवार, दिसम्बर 2, 2019 को
षष्टी तिथि प्रारम्भ - नवम्बर 02, 2019 को 12:51 ए एम बजे
षष्टी तिथि समाप्त - नवम्बर 03, 2019 को 01:31 ए एम बजे

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में नई दिल्ली, इण्डिया के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

2019 सूरसम्हारम

स्कन्द षष्ठी भगवान मुरुगन को समर्पित अत्यन्त महत्वपूर्ण त्यौहार है, जिसे कन्द षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। स्कन्द षष्ठी पर्व मुख्यतः तमिल हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है। स्कन्द षष्ठी का दिन चन्द्र माह के आधार पर तय किया जाता है तथा यह पर्व कार्तिक मास के छठवें दिन आता है।

कन्द षष्ठी के दौरान, भक्त छह दिवसीय उपवास का पालन करते हैं। यह उपवास कार्तिक चन्द्र माह के प्रथम दिवस अर्थात प्रतिपदा से आरम्भ होता है तथा इस उपवास का समापन छठवें दिन अर्थात षष्ठी को होता है, जिसे सूरसम्हारम दिवस कहा जाता है। छह दिवसीय इस उत्सव का अन्तिम व सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिवस सूरसम्हारम है। यह माना जाता है कि भगवान मुरुगन ने सूरसम्हारम के दिन दानव सुरपद्मन को युद्ध में पराजित किया था। इसलिये संसार को बुराई पर अच्छाई की विजय का सन्देश देने के लिये प्रतिवर्ष सूरसम्हारम का त्यौहार मनाया जाता है।

यह स्मरण रखना महत्वपूर्ण है कि, जिस दिन षष्ठी तिथि तथा पञ्चमी तिथि संयुक्त हो जाती हैं, उसी दिन सूरसम्हारम व्रतम किया जाता है। इसलिये अधिकांश मन्दिर पञ्चमी तिथि को कन्द षष्ठी मनाते हैं, जब पञ्चमी तिथि के दिन सूर्यास्त से पूर्व षष्ठी तिथि आरम्भ हो जाती है।

थिरुचेन्दुर मुरुगन मन्दिर में कन्द षष्ठी उत्सव सर्वाधिक लोकप्रिय है। कार्तिक मास की पिरथमै तिथि से आरम्भ होने वाले छह दिवसीय समारोह का समापन सूरसम्हारम दिवस पर होता है। सूरसम्हारम के अगले दिन थिरु कल्याणम मनाया जाता है।

Kalash
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