
ग्रेगोरियन कैलेण्डर के अनुसार प्रतिवर्ष जून 21 को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस को विश्व योग दिवस एवं योग दिवस के नाम से भी जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे इन्टरनेशनल डे ऑफ योगा (International Day of Yoga) कहा जाता है। जून 21 उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सर्वाधिक लम्बा दिन होता है तथा यह दिन विश्व के विभिन्न क्षेत्रों एवं संस्कृतियों में विशेष महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
योग शब्द संस्कृत धातु युज् से निर्मित है, जिसका अर्थ है, जोड़ना, युक्त करना अथवा एकत्व स्थापित करना। अर्थात् योग मन एवं शरीर, विचार एवं कर्म, संयम एवं सिद्धि तथा मनुष्य एवं प्रकृति के मध्य सामञ्जस्य एवं एकता का प्रतीक है। साथ ही, योग स्वास्थ्य एवं कल्याण के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है।
दिसम्बर 11, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। कुल 193 देशों में से संयुक्त राष्ट्र महासभा में 177 देश इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुये सह-प्रस्तावक बने थे, जो कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतिहास में किसी भी प्रस्ताव के समर्थन में आने वाले देशों की सर्वाधिक सङ्ख्या है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव पारित होने के पश्चात् सर्वप्रथम जून 21, 2015 को विश्वभर में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। इस अवसर पर भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने बाबा रामदेव एवं श्री श्री रविशंकर आदि विभिन्न योगगुरुओं की सहायता से एक विशाल योग शिविर का आयोजन किया था, जिसमें लगभग 36,000 लोगों ने सहभागिता की थी।
भारतीय नौसेना के जवानों ने आईएनएस जलाश्व पर तथा थल सेना के जवानों ने सियाचिन जैसे दुर्गम क्षेत्रों में योग दिवस पर योगाभ्यास करके लोगों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया था।
जून 21, 2015 को सर्वप्रथम योग दिवस के अवसर पर भारत में दो महत्त्वपूर्ण कीर्तिमान स्थापित हुये थे। पहला गिनीज विश्व रिकार्ड भारत को सर्वाधिक सङ्ख्या में लोगों द्वारा एक साथ योग करने का मिला, जिसके अनुसार भारत में दिल्ली स्थित राजपथ पर भारत के तत्कालीन प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी, भारतीय योगगुरु रामदेव सहित 35,985 लोगों ने एक साथ 35 मिनट तक योग किया था। इस दौरान 21 योग आसनों एवं मुद्राओं का प्रदर्शन किया गया था। इसके अतिरिक्त इस आयोजन में चौरासी भिन्न-भिन्न देशों के नागरिकों द्वारा सहभागिता का रिकार्ड भी भारत के नाम अङ्कित हुआ था।
योग के महत्त्व का वर्णन प्राचीन भारतीय धर्मग्रन्थों एवं ऐतिहासिक अभिलेखों में भी प्राप्त होता है। महर्षि पतञ्जलि द्वारा रचित योगसूत्र को योग-दर्शन का मूल ग्रन्थ माना जाता है। योग के द्वारा मानसिक एवं शारीरिक सन्तुलन स्थापित होता है। हिन्दु धर्म में योग को मनुष्य एवं प्रकृति के मध्य सामञ्जस्य का साधन माना गया है।
योग करने से शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक स्थिरता, वैचारिक स्पष्टता एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है। योग का आशय केवल शारीरिक व्यायाम अथवा विभिन्न मुद्राओं के अभ्यास से ही नहीं है, अपितु यह आन्तरिक ऊर्जा एवं चेतना के उत्थान का मार्ग भी माना जाता है। योग के विषय में धर्मग्रन्थों में निम्नोक्त श्लोक प्राप्त होता है -
गाम्भीर्यं यस्य पिता क्षमा च जननी शान्तिश्चिरं गेहिनि
सत्यं सूर्यं दया च भगिनी भ्राता मनः संयमः।
सयै भूमितलं दिशोसपि वसनं ज्ञानामृतं भोजनं
एते यस्य कुटिम्बिनः वद सखे कस्माद् भयं योगिनः॥
भावार्थ - "जिस योगी के पिता गाम्भीर्य, अर्थात् गम्भीरता हैं, माता क्षमा है, गृहिणी चिरस्थायी शान्ति है, सत्य उसका पुत्र है, दया उसकी बहन है तथा मन का संयम उसका भ्राता है, जिसके लिये यह सम्पूर्ण पृथ्वी ही घर है, दिशायें ही वस्त्र हैं तथा ज्ञानरूपी अमृत ही उसका भोजन है, हे मित्र! बताओ, ऐसे योगी को किसी बात का भय क्यों होगा?"