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भगवान राम के युग का निर्धारण | भगवान राम की जन्मतिथि का विवरण

DeepakDeepak

भगवान राम की जन्मतिथि

भगवान राम के युग का निर्धारण

भगवान राम के युग का निर्धारण करने से पूर्व हमें समय के वैदिक विभाजन को समझना होगा जो कल्प, महायुग तथा युग में समय को मापता है।

अभी इस गणना के लिये हम मानते हैं कि, एक कल्प अर्थात भगवान ब्रह्मा का आधा दिन, समय का सर्वोच्च वैदिक विभाजन है। एक कल्प में 1000 महायुग होते हैं। एक महायुग भिन्न-भिन्न अवधि वाले चार युगों से बना है, जिनका नाम कृतयुग अथवा सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग है। कलियुग में 432,000 सौर वर्ष हैं। द्वापर युग कलियुग से दोगुना है। त्रेता युग तिगुना तथा कृत युग कलियुग का चौगुना है।

अतः एक महायुग में कलियुग के 10 गुना वर्ष, अर्थात 4,320,000 सौर वर्ष होते हैं। हिन्दु मान्यता के अनुसार एक कल्प सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का (रात्रि को छोड़कर) आधे दिन के समान है।

यदि हम 'x' को एक कलियुग की अवधि मानें तो x = 432,000 solar सौर वर्ष। इस प्रकार,,

1 कल्प = 1000 महायुग = ब्रह्मा जी का 1 आधा दिन = 10,000x
1 महायुग = 4,320,000 सौर वर्ष = 10x

सत्य युग = 1,728,000 सौर वर्ष = 4x
त्रेता युग = 1,296,000 सौर वर्ष = 3x
द्वापर युग = 864,000 सौर वर्ष = 2x
कलि युग = 432,000 सौर वर्ष = x

विभिन्न पुराणों के अनुसार भगवान राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था तथा अप्रैल 17, 2013 को 5114 कलियुग व्यतीत हो चुके हैं। यदि हम यह मान भी लें कि भगवान राम का जन्म त्रेता युग के अन्त में हुआ था, तो कुल 869,114 (864,000+5114) सौर वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। कुछ विद्वानों की मानें तो, अप्रैल 17, 2013 के अनुसार श्री राम एवं रावण के मध्य युद्ध 880,155 सौर वर्ष पूर्व हुआ था।

श्री रामायण महाकाव्य में भगवान श्री राम के जीवन काल में घटी खगोलीय घटनाओं के सन्दर्भ में अनेक वर्णन प्राप्त होते हैं। उन खगोलीय घटनाओं के आधार पर, अनेक विद्वान भगवान राम के जन्म का समय ज्ञात करने हेतु आकाश में ग्रहों की वही स्थिति निर्मित करके देखते हैं, जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्म के समय थीं। ऐसी गणनाओं के लिये ऐसे सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता होती है जो 1,000,000 सौर वर्ष (लगभग 1 मिलियन सौर वर्ष) तक अतीत की खगोलीय गणनायें करने में सक्षम हो।

पुष्कर भटनागर जी ने भगवान राम का जन्म समय ज्ञात करने हेतु कुछ शोधकार्य किया है। उनके अनुसार, "एक शक्तिशाली खगोलीय सॉफ्टवेयर का उपयोग करके, मैंने पाया कि भगवान राम की जन्म तिथि समय जिस प्रकार की ग्रहों की स्थिति रामायण में वर्णित है, वैसी ग्रह स्थिति अन्तरिक्ष में 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व की दोपहर लगभग 12.30 बजे घटित हुयी थी।"

अपने सिद्धान्त को सिद्ध करने के लिये पुष्कर भटनागर ने एक कलियुग की अवधि 1200 सौर वर्ष मानी है।
यदि हम 'y' को एक कलियुग की अवधि मानें तो y = 1200 सौर वर्ष। अतः,

1 महायुग = 12,000 solar years = 12y

सत्य युग = 4800 सौर वर्ष = 4y
त्रेता युग = 3600 सौर वर्ष = 3y
द्वापर युग = 2400 सौर वर्ष = 2y
कलि युग = 1200 सौर वर्ष = y

उपरोक्त समय अवधि के आधार पर विभिन्न युगों के लिये समय का निर्धारण करने के उपरान्त, जो पूर्व से ही विभिन्न पुराणों के विरुद्ध है, पुष्कर भटनागर आगे मानते हैं कि भगवान राम की जन्म तिथि 5114 ईसा पूर्व तय करने के लिये 1 महायुग 12,000 सौर वर्ष के स्थान पर 10,000 सौर वर्ष दीर्घ होना चाहिये था।

पुष्कर भटनागर यह नहीं समझाते कि यदि कलियुग की अवधि केवल 1200/1000 सौर वर्ष ही है तो हम सभी को वर्तमान में सत्ययुग में होना चाहिये। वैदिक ज्ञान के अनुसार सभी युग चक्रीय हैं तथा पुष्कर ने कलियुग के आरम्भिक वर्ष के रूप में 3012 ईसा पूर्व को माना है। यह सर्वविदित है कि सभी ग्रहों की स्थिति चक्रीय होती है तथा सूर्य एवं चन्द्र ग्रहण सहित समान प्रकार से दोहराती रहती है। यह सिद्ध करना कोई कार्य नहीं है कि रामायण में वर्णित समान खगोलीय घटनायें 5114 ईसा पूर्व से पूर्व घटित नहीं हुयी थीं।

भगवान राम के जन्म का समय ज्ञात करने के लिये 10 लाख सौर वर्ष पूर्व का इतिहास खँगालना होगा। पुष्कर भटनागर के अनुसार, उनका सॉफ्टवेयर 99,999 ईसा पूर्व तक की ही अतीत को देखने में सक्षम था, जो की श्री राम जी की जन्मतिथि ज्ञात करने हेतु आवश्यक समय अवधि का केवल 10% है। ऐसे किसी भी अध्ययन में पिछले 1 मिलियन सौर वर्षों के समय घटित समान खगोलीय घटनाओं के सभी उदाहरणों पर विचार किया जाना चाहिये।

जब तक हमारे पास कोई ठोस ऐतिहासिक तथा खगोलीय प्रमाण नहीं है, तब तक यह कहना अधिक उचित एवं सटीक होगा कि भगवान राम का जन्म आज से बहुत पहले 869,114 सौर वर्ष पूर्व हुआ था तथा हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार यह चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी थी।

Kalash
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