इस ग्रहण से आपको अपमान या मान हानि जैसे अशुभ फल की प्राप्ति हो सकती है। किसी कारणवश उद्वेग एवं मानसिक चिन्ता रहेगी। निद्रा की कमी रहेगी। छोटे-मोटे आर्थिक संकट से समस्या हो सकती है। व्यवसाय में सतर्क रहें। आलस्य, थकावट एवं निर्बलता की समस्या रहेगी। परिचितों से अनावश्यक वाद-विवाद हो सकते हैं।
यह ग्रहण आपको महा कष्ट या अत्यन्त कष्टदायक परिस्थिति का अनुभव करवायेगा। स्वास्थ्यहीनता, दुर्घटना का भय, चिन्ता, अनावश्यक वाद-विवाद (झगड़े), परिचितों एवं मित्रों से छोटी-मोटी बातों में शत्रुता हो सकती है। यदि आप पहले से अस्वस्थ हैं, तो थोड़ी सावधानी रखें। खान-पान एवं आहार-विहार में नित्य क्रम बनाके रखें।
इस ग्रहण से आपको दाम्पत्यजीवन में या साझेदारी में कष्ट हो सकता है। जीवनसाथी से आशा के अनुरूप अपेक्षा फलीभूत नहीं हो पायेगी। साझेदार से मनमुटाव को दूर रखें। व्यवसाय में परिश्रम को प्राधान्यता देनी होगी। अपने विरोधी के प्रति कठोर ही बने रहें। वाद-विवाद को टालें।
यह ग्रहण आपको सुख प्रदान करने वाला रहेगा। शुभ आरोग्य की प्राप्ति होगी। शत्रुओं एवं विरोधियों पर आप अपने वांच्छित विजय प्राप्ति कर पायेंगे। किसी भी कार्य में किये गये श्रम का उचित पारिश्रमिक फल प्राप्त कर पायेंगे। यदि किसी कारणवश ऋण से ग्रस्त हैं तो शीघ्र ही मुक्ति मिलेगी।
इस ग्रहण से आप चिन्ताग्रस्त हो सकते हैं। बिना सोचे गलत निर्णयों से कार्य बिगड़ कर अपयश की प्राप्ति हो सकती है। पूर्व में प्रारम्भ किये गये कार्यों में यदि सतर्कता न रखी गयी तो विघ्न आपको पीड़ा दे सकता है। अपच तथा पेट दर्द से समस्या बनी रहेगी। प्रवास या पर्यटन का आयोजन सोच-विचार कर करें। धन के अपव्यय से बचें।
यह ग्रहण आपको कष्टदायक एवं पारिश्रमिक समय का दर्शन करवायेगा। पारिवारिक अशान्ति से मन अशान्त, व्यथित तथा भयग्रस्त रहेगा। धन-सम्पत्ति की हानि हो सकती है। वाहन को क्षति तथा दुर्घटना की आशंका तथा मानसिक भय रहेगा। माता को कष्ट रहेगा। छाती के छोटे-मोटे रोग से मन में अस्थिरता रहेगी।
यह ग्रहण आपको सामान्यतः धनलाभ एवं शुभ फल की अनुभूति देगा। इन दिनों में की गयी यात्रा सफल होगी। हाथ में लिये हुये कार्यों में सफलता एवं यश प्राप्त होंगे। निजी व्यवसाय में पुरुषार्थ के बल से अधिक धन प्राप्त होगा। स्नेहीजनों से सम्बन्धों में सुधार होगा। सभी प्रकार से वातावरण अनुकूल रहेगा।
यह ग्रहण आपको लाभ के स्थान पर हानि प्रदान करेगा। आर्थिक उपार्जनों में विघ्न-बाधायें उत्पन्न होंगी। परस्पर वाद-विवाद या तर्क के कारण साझेदारी में या सम्बन्धों में दरार आयेंगी। मानसिक अस्थिरता के कारण करने योग्य कार्य का निष्पादन योजनानुसार नहीं हो सकेगा। अनावश्यक व्यय से बचें।
इस ग्रहण में घात या चोट से बचें अथार्त घात जनक फल की प्रप्ति हो सकती है। पारिवारिक ताल-मेल में विरोधीभाव उत्पन्न होंगे। आनन्द तथा उत्साह में कमी प्रतीत होगी। पत्नी तथा सन्तान पक्ष से दुःख एवं असहयोग का भय रहेगा। स्वास्थ्य एवं आरोग्य का ध्यान न रखा तो शारीरिक समस्या अधिक रहेगी।
यह ग्रहण आपको अनेक प्रकार के अशुभ फल दे सकता है। निराशा एवं अशान्ति अधिक रहेगी। नेत्रों एवं पैरों में कष्ट की समस्या रहेगी। मित्रों से अनबन तथा सम्बन्धियों से वाद-विवाद करना एक सामान्य सी बात होगी। यत्र-तत्र आपके स्वतन्त्र अस्तित्व को ठेस लग सकती है। किसी भी कार्य में मन नहीं लगने के कारण एवं अज्ञात भय के कारण पराधीनता का अनुभव होगा।
इस ग्रहण से आपको लाभ की प्राप्ति होगी। सुमित्रों से धन-सहयोग एवं पारिश्रमिक कार्यों में सहयोग प्राप्त होगा। सामन्यतः आय में उच्च स्तरीय वृद्धि नजर आयेगी। सन्तानों से सुख प्राप्त होगा। पुराने रोगों में राहत के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होगी। वैचारिक परामर्श शक्ति से अनेक समस्याओं का हल होगा।
इस ग्रहण से आपको शीघ्र ही सुखदायक फल की प्राप्ति होगी। अच्छे व्यक्तियों से भेंट के माध्यम से आपके लिये विभिन्न प्रकार के शुभ द्वार खुलेंगे। समाज में सम्मान के साथ पद, प्रतिष्ठा एवं आर्थिक स्थान भी मिलेगा। इच्छित कार्यों में सफलता एवं यश प्राप्ति से उच्च अधिकारों की प्राप्ति होगी।
इस ग्रहण का स्वामी अग्नि है। अतः इसके फलस्वरूप वर्षा श्रेष्ठ होगी। फसल तथा धन प्राप्ति में वृद्धि होगी। भय एवं रोगों का नाश होगा तथा राजाओं का कार्य सिद्ध होगा।
ग्रहण उत्तरायण में हो रहा है। 6 माह तक ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा गायों को पीड़ा होगी तथा अन्न-धान्य महँगा होगा।
ग्रहण मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत पौष) माह में हो रहा है। कश्मीर, कौशल, पौंड्र, अपरान्तक आदि देशों में कष्ट होगा। पशुओं का नाश होगा। सोमपान करने वालों को पीड़ा होगी। जगत में सुवृष्टि, सुभिक्ष व क्षेम कल्याण होगा। विशेषतः रस-कस (इत्र आदि) में तेजी रहेगी।
अनाजों, गुड़, खाँड़, तेलवान, घी आदि में तेजी हो सकती है।
ग्रहण गुरुवार को है। गुरुवार को ग्रहण के कारण सत्य बोलने वाले, पवित्र रहने वाले, चित्र-विचित्र वस्तु बनाने वाले तथा सिन्ध देश में रहने वाले प्राणी पीड़ा भोगेंगे। पीली, लाल व सुगन्धित वस्तु तथा तेल आदि संग्रह करने से चार माह पश्चात् लाभ होगा।
तिल, तेल, एरण्ड, अलशी, सरसों, स्वारक, काले वस्त्र आदि संग्रह करने से चार माह पश्चात् लाभ होगा।
पीली वस्तुयें, तिल व तेलवान, सूखे मेवे, सुगन्धित पदार्थ आदि में वृद्धि हो सकती है।
ग्रहण मूल नक्षत्र में है। परिणामस्वरूप सर्व प्रकार के बीज, पुष्य, औषधि, वैध, सर्वफल, कन्दमूल तथा इन वस्तुओं से आजीविका करने वालों को पीड़ा होगी। अति धनवान तथा बहुत से मनुष्यों में प्रमुख अर्थात मुखिया आदि दुःख भोगेंगे।
चावल का संग्रह करने से पाँच माह में लाभ होगा।
शक्कर, गुड़, खाँड़, ज्वार, बाजरा आदि में तेजी हो सकती है तथा चावल में 5 माह पश्चात् वृद्धि हो सकती है।
पश्चिम दिशा के नक्षत्र पर कूर्मचक्र का फल - पश्चिम दिशा के राज्य व देशों में दुर्भिक्ष, युद्ध, महामारी, चोरी, अग्नि आदि उपद्रवों के कारण पीड़ा होगी।
ग्रहण के समय वारुण मण्डल का नक्षत्र होगा। अतः वर्षा अधिक होती होगी, सुभिक्ष की वृद्धि होगी। वृक्षों में फल-फूल अधिक रहेंगे तथा गायों के घी-दूध आदि की वृद्धि होगी। प्रजा में आनन्द तथा राजाओं में शान्ति रहेगी।
वारुण मण्डल का फल पाँच माह के भीतर मिलेगा।
यह ग्रहण वृद्धि योग में है। कुलवानों, राजाओं, कुटुम्बिक व्यक्तियों, उत्कट पुरुषों, तथा कम्बोज देश के निवासियों को पीड़ा हो सकती है।
ग्रहण धनु राशि में होने के कारण राजमन्त्रीयों, श्रेष्ठ अश्वों, मल्ल योद्धाओं, व्यापारीयों, उग्रजाति योद्धाओं तथा वैध आदि को पीड़ा होगी। विदेह व पंजाब आदि राज्य (देश) एवं औषधि सम्बन्धित व्यक्ति दुःख भोगेंगे।
सभी औषधियों तथा घास-फूल में तेजी हो सकती है।
प्रथम स्वांश का फल - ग्रहण का स्पर्श आकाश के प्रथम भाग में होने से गुणिजन, खेती करने वाले कृषिक, ब्राह्मण, लोहार, सुनार, हलवाई, भाड़ भूंजे, अंजनेर आदि अग्निजीवी, यज्ञ करने वाले, बुद्धिवान तथा वानप्रस्थादि आश्रमियों को कष्ट होगा।
ग्रहण का स्पर्श आकाश के आद्य भाग में हो तो यौवन अवस्था वाले, यज्ञ करने वाले, जल से उत्पन्न होने वाले तथा हाथियों के स्वामी आदि को पीड़ा होगी।
ग्रहण का स्पर्श पूर्व दिशा में है। पृथ्वी पर वर्षा अधिक होगी। राजपुत्रों को कष्ट तथा स्त्रियों को पीड़ा होगी।
ग्रहण के समय सूर्य तृतीयांश, चौथाई व आधे बिम्ब को ग्रहण हो तो उसे ग्रसन नामक मास कहते हैं। इस माह में स्फीत देश के राजा को कष्ट एवं प्रजा को पीड़ा के साथ धन की हानि होगी।
ग्रहण का वर्ण लाल, काला तथा मिला हुआ अथार्त ताम्र के समान है जिससे बिजली गिरने के कारण फसलों का नाश होगा।
ग्रहण का वर्ण लाल होना क्षत्रियों के लिये, काला होना शूद्रों के लिये तथा विवर्ण (मिश्र) होना विजतियों के लिये अशुभ रहेगा।
बुद्ध ग्रस्त फल - ग्रहण के समय बुद्ध ग्रस्त हो रहा है। ग्रहण काल में बुध ग्रह अस्त होने पर अन्तर्वेदी देश, सरयू नदी के देश, नेपाल, पूर्व दिशा का समुद्र, शोणनद आदि स्थानों में कष्ट होगा। इस ग्रहण के प्रभाव से स्त्री, राजा, बालक तथा विद्वान आदि को पीड़ा होगी।
शनि ग्रस्त फल - इस ग्रहण काल में शनि भी ग्रस्त होगा। शनि ग्रह अस्त के फलस्वरूप मारवाड़, पुष्कर, सोरठ, आबु, गोमन्त तथा पर्वत प्रदेश आदि देशों में रहने वालों को पीड़ा होगी। सभी धातुओं के मूल्य में वृद्धि होगी।
ग्रहण मोक्ष फल - इस प्रकार के मोक्ष के प्रभाव से जगत में दुर्भिक्ष का कष्ट तथा युद्ध का भय होने से लोग दुःखी होंगे।
काल फल - छः माह के अन्दर ग्रहण फल प्राप्त होगा। इस के प्रभाव से जगत में क्षेम, कल्याण, आरोग्य तथा सुभिक्ष आदि शुभ फल प्राप्त होगा।
उत्पात फल - ग्रहण मोक्ष के पश्चात् 9 दिन के भीतर उल्का गिरने का फल प्राप्त होगा।
ग्रहण उत्पात फलानुसार राजमन्त्री को अशुभ फल की प्राप्ति होगी। इस बार Quadrantids नामक उल्का गिरेगी।