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2027 आदि शङ्कराचार्य जयन्ती का दिन लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिये

DeepakDeepak

2027 शङ्कराचार्य जयन्ती

लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका
शङ्कराचार्य जयन्ती
10वाँ
मई 2027
Monday / सोमवार
आदि शङ्कराचार्य
Adiguru Shankaracharya

आदि शङ्कराचार्य जयन्ती समय

आदि शङ्कराचार्य की 1239वाँ जन्म वर्षगाँठ
शङ्कराचार्य जयन्ती सोमवार, मई 10, 2027 को
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ - मई 09, 2027 को 05:52 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त - मई 10, 2027 को 03:17 पी एम बजे

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

आदि गुरु शङ्कराचार्य जयन्ती 2027

आदि शंकराचार्य एक महान भारतीय गुरु तथा दार्शनिक थे, उनके जन्मदिवस को ही आदि शंकराचार्य की जयन्ती के रूप में मनाया जाता है। आदि शंकर का जन्म 788 ई.पू. केरल स्थित कलाड़ी नामक स्थान पर हुआ था। वर्ष 820 ई.पू. में मात्र 32 वर्ष की आयु में ही वह कहीं अन्तर्धान हो गये।

आदि शंकराचार्य जयन्ती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पञ्चमी तिथि को मनायी जाती है तथा वर्तमान में अप्रैल तथा मई माह के मध्य आती है। शंकराचार्य ने अद्वैत वेदान्त के सिद्धान्त को प्रमाणिकता से स्थापित किया तथा उस समय, हिन्दु संस्कृति को पुनर्जीवित किया, जिस समय हिन्दु संस्कृति अपने पतन की ओर अग्रसर थी।

आचार्य शङ्कर के पिता का नाम शिवगुरु भट्ट तथा उनकी माता का नाम अयम्बा था। उनके पिता शिवगुरु ने सपत्नीक दीर्घकाल तक भगवान शिव की आराधना की, जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्ररत्न की प्राप्त हुयी थी। इसीलिये उन्होंने अपने पुत्र नाम शङ्कर रखा। जिस समय शङ्कराचार्य जी तीन वर्ष के थे, उस समय उनके पिता का परलोकगमन हो गया था। शङ्कराचार्य जी अत्यन्त विद्वान एवं प्रतिभाशाली थे। अतः 6 वर्ष की आयु में ही वे प्रकाण्ड पण्डित हो गये थे तथा 8 वर्ष की अवस्था में उन्होंने सन्यास ग्रहण किया था।

आदि शंकराचार्य के साथ माधव तथा रामानुज भी हिन्दु धर्म के पुनरुत्थान में सहायक थे। इन तीनों गुरुओं ने कुछ महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त दिये, जिनका अनुसरण वर्तमान में भी उनके सम्बन्धित सम्प्रदायों द्वारा किया जाता है। यह तीनों महान गुरु, हिन्दुत्व के आधुनिक इतिहास में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व्यक्ति रहे हैं।

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