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भैरव कवचम् - संस्कृत गीतिकाव्य एवं वीडियो गीत

DeepakDeepak

भैरव कवचम्

भैरव कवचम्, भगवान भैरव को समर्पित एक प्रचलित स्तुति है। भगवान भैरव के भक्त इस कवच का पाठ शत्रुओं से रक्षा एवं सङ्कटों के निवारण हेतु करते हैं। भगवान भैरव हिन्दु धर्मग्रन्थों में वर्णित भगवान शिव के विभिन्न अवतारों में से एक हैं।

॥ अथ श्रीभैरवकवचम् ॥

ॐ सहस्त्रारे महाचक्रेकर्पूरधवले गुरुः।

पातु मां बटुको देवोभैरवः सर्वकर्मसु॥1॥

पूर्वस्यामसिताङ्गो मांदिशि रक्षतु सर्वदा।

आग्नेयां च रुरुः पातुदक्षिणे चण्ड भैरवः॥2॥

नैॠत्यां क्रोधनः पातुउन्मत्तः पातु पश्चिमे।

वायव्यां मां कपाली चनित्यं पायात् सुरेश्वरः॥3॥

भीषणो भैरवः पातुउत्तरास्यां तु सर्वदा।

संहार भैरवःपायादीशान्यां च महेश्वरः॥4॥

ऊर्ध्वं पातु विधाता चपाताले नन्दको विभुः।

सद्योजातस्तु मां पायात्सर्वतो देवसेवितः॥5॥

रामदेवो वनान्ते चवने घोरस्तथावतु।

जले तत्पुरुषः पातुस्थले ईशान एव च॥6॥

डाकिनी पुत्रकः पातुपुत्रान् में सर्वतः प्रभुः।

हाकिनी पुत्रकः पातुदारास्तु लाकिनी सुतः॥7॥

पातु शाकिनिका पुत्रःसैन्यं वै कालभैरवः।

मालिनी पुत्रकः पातुपशूनश्वान् गजास्तथा॥8॥

महाकालोऽवतु क्षेत्रंश्रियं मे सर्वतो गिरा।

वाद्यं वाद्यप्रियः पातुभैरवो नित्यसम्पदा॥9॥

॥ इति तान्त्रोक्त भैरव कवचं सम्पूर्णम् ॥
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