सूर्योदय05:16
सूर्यास्त17:58
चन्द्रास्त16:36
शक सम्वत1948 पराभव
चन्द्र महीनाज्येष्ठ (अधिक)
वारशनिवार
पक्षकृष्ण पक्ष
योगसुकर्मा - 05:58 तक
करणविष्टि - 14:45 तक
राहुकाल08:26 से 10:01
गुलिक काल05:16 से 06:51
यमगण्ड13:12 से 14:47
अभिजित मुहूर्त11:11 से 12:02
दुर्मुहूर्त05:16 से 06:06
दुर्मुहूर्त06:06 से 06:57
अमृत काल11:39 से 13:04
आनन्दादि योगकेतु/ध्वज - 13:46 तक
तमिल योगसिद्ध - 13:46 तक
आनन्दादि योगश्रीवत्स
तमिल योगसिद्ध
टिप्पणी: सभी समय २४:००+ प्रारूप में सैन फ्रांसिस्को, Costa Rica के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय २४:०० से अधिक हैं और आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।
तमिल पञ्चाङ्गम् का उपयोग तमिल नाडु, पुडुचेरी, श्रीलंका, मलेशिया तथा विश्व भर में रहने वाले तमिल लोगों द्वारा किया जाता है। तमिल संस्कृति में तमिल पञ्चाङ्गम् को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यह पञ्चाङ्ग तमिल हिन्दुओं की आस्था से भी सम्बन्धित है। तमिल पञ्चाङ्गम् में तिथि, नक्षत्रम्, योग, कर्ण, राहु कालम्, गुलिकई कालम् आदि जैसे महत्त्वपूर्ण खगोलीय तत्वों को दर्शाया जाता है।
राहु कालम्, यमगण्डम्, गुलिकई, दुर्मुहूर्तम् तथा वर्ज्यम् आदि अशुभ समय अवधि को टाल देना चाहिये। इनके अतिरिक्त शेष समय को शुभ माना जाता है।
अभिजित मुहूर्तम् एवं अमृत कालम् को अत्यन्त शुभ माना जाता है। यदि अशुभ मुहूर्त एवं शुभ मुहूर्त का सायोंग एक साथ हो जाये तो अशुभ मुहूर्त को शुभ मुहूर्त से हटा देना चाहिये।