पञ्चाङ्ग में 27:44:45+ के रूप में प्रदर्शित समय, सार्वभौमिक रूप से अपनाये जाने वाले मानक HH:MM:SS समय प्रारूप से अधिक भिन्न नहीं है। कभी-कभी एक मिनट की त्रुटि स्वीकार्य होने पर सेकेण्ड हटा दिये जाते हैं।
मुहूर्त समय के ठीक पश्चात्+ (धन का चिह्न) यह दर्शाता है कि, समय मध्य रात्रि के उपरान्त का है, अर्थात ग्रेगोरियन अथवा अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार अगले दिन का है। यह हिन्दु कैलेण्डर के लिये सूर्योदय से सूर्योदय तक के दिन की अवधि को दर्शाता है। हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार वर्तमान दिन, मध्य रात्रि में समाप्त नहीं होता है, अपितु यह अगले दिन सूर्योदय के समय समाप्त होता है। यहाँ तक कि, नवीन सप्ताह का दिन अर्थात सोमवार, मंगलवार आदि भी सूर्योदय के पश्चात् आरम्भ होता है तथा इस निरूपण के कारण पिछले दिन के सप्ताह का दिन सूर्योदय तक प्रबल रहता है।
मध्य रात्रि एवं आगामी दिन के सूर्योदय के मध्य आने वाले सभी प्रारम्भ एवं समाप्ति समय 24+ घण्टे के प्रारूप में दर्शाये जाते हैं। ऐसा मध्य रात्रि के उपरान्त दिन की निरन्तरता बनाये रखने के लिये किया जाता है। ऐसे समय को समझने के लिये, कृपया इसमें से 24 घटायें। घटाने के पश्चात् ग्रेगोरियन कैलेण्डर पर आगामी दिन के लिये मानक समय प्राप्त होता है।
उदाहरण के लिये, 24 घटाने के पश्चात् 12 जनवरी 2013 को 27:44:45+ का समय 13 जनवरी 2013 को सूर्योदय से पूर्व 03:44:45 का समय दर्शायेगा।
इस प्रकार के प्रारूप की आवश्यकता नहीं होती, किन्तु रवि पुष्य योग जैसे विभिन्न शुभ योगों के समय को ऐसे प्रस्तुतीकरण में दर्शाना और समझना सरल होता है, क्योंकि इस प्रकार के योगों की गणना हेतु सप्ताह के दिनों पर भी विचार किया जाता है। सप्ताह का दिन सूर्योदय पर ही परिवर्तित होता है।