
आर्द्रा नक्षत्र - आर्द्रा, वैदिक ज्योतिष में छठवाँ नक्षत्र है, जिसका विस्तार मिथुन में 6°40' से 20° तक है।
प्रतीक चिह्न - इस नक्षत्र का प्रतीक एक अश्रु बिन्दु, एक हीरा अथवा एक मानव शिर को माना जाता है।
खगोलीय नाम - इस नक्षत्र का खगोलीय नाम बेटेलगेस (Betelgeuse) है।
नक्षत्र के देवता - विनाश के देवता रुद्र, आर्द्रा नक्षत्र के अधिष्ठात्र देवता हैं।
शासक ग्रह - आर्द्रा नक्षत्र पर राहु शासन करता है, जो उत्तरी चन्द्रपात है।
अन्य - आर्द्रा शब्द का अर्थ नम अथवा गीला होता है, जिसके कारण इसे अश्रु की बूँद के रूप में दर्शाया जाता है। हिन्दु धर्म में आर्द्रा के विषय में तारक से सम्बन्धित एक मिथक है। तारक एक असुर था, जिसे भगवान ब्रह्मा से अजेयता का वरदान प्राप्त हुआ था। तमिल और मलयालम में आर्द्रा को क्रमशः तिरुवथिरई एवं तिरुवथिरा कहा जाता है। राहु ग्रह के शासक होने के कारण इस नक्षत्र द्वारा भौतिकवाद की तीव्र इच्छा का नकारात्मक पक्ष दूसरों के लिये समस्या का कारण बनता है।
नक्षत्र अस्त उदय - आर्द्रा प्रति वर्ष लगभग 43 दिनों की अवधि के लिये अस्त हो जाता है। आर्द्रा नक्षत्र के अस्त एवं उदय होने का समय ज्ञात करने हेतु सम्बन्धित पृष्ठ देखें - आर्द्रा अस्त उदय।
नक्षत्र गोचर - आर्द्रा को अधिकांश शुभ कार्यों हेतु सामान्य माना जाता है। वर्ष पर्यन्त, चन्द्रमा किस समय आर्द्रा नक्षत्र में गोचर कर रहा है, यह ज्ञात करने हेतु उक्त पृष्ठ का अवलोकन करें - आर्द्रा नक्षत्र के सभी दिनों की सूचि।