
कृत्तिका नक्षत्र - कृत्तिका वैदिक ज्योतिष में तीसरा नक्षत्र है, जिसका विस्तार 26°40' मेष से 10° वृषभ तक है।
प्रतीक चिह्न - इस नक्षत्र का प्रतीक चाकू अथवा भाला है।
खगोलीय नाम - इस नक्षत्र का खगोलीय नाम प्लीएड्स (Pleiades) है।
नक्षत्र के देवता - कृत्तिका नक्षत्र के अधिष्ठाता अग्नि देव हैं, जो अग्नि तत्व के देवता हैं।
शासक ग्रह - इस नक्षत्र पर भगवान कार्तिकेय का शासन है, जिन्हें भगवान मुरुगन अथवा स्कन्द के नाम से भी जाना जाता है।
अन्य - कृत्तिका छह बहनें थीं, जिन्होंने भगवान मुरुगन का पालन-पोषण किया, जिसके कारण उन्हें कार्तिकेय के नाम से जाना जाने लगा। कृत्तिका एक अत्यन्त शक्तिशाली नक्षत्र है, क्योंकि यह सूर्य के उदय को दर्शाता है। कृत्तिका को "अग्नि का तारा" भी कहा जाता है एवं यह एक योद्धा, कान्ति, शौर्य का तेज, शारीरिक एवं रचनात्मक शक्ति से सम्बन्धित है। चन्द्र का जन्म, कृत्तिका नक्षत्र में ही हुआ था।
नक्षत्र अस्त उदय - कृत्तिका नक्षत्र प्रति वर्ष लगभग 20 दिनों की अवधि के लिये अस्त हो जाता है। कृत्तिका नक्षत्र के अस्त एवं उदय होने का समय ज्ञात करने हेतु सम्बन्धित पृष्ठ देखें - कृत्तिका अस्त उदय।
नक्षत्र गोचर - कृत्तिका को अधिकांश शुभ कार्यों हेतु अशुभ माना जाता है। वर्ष पर्यन्त, चन्द्रमा किस समय कृत्तिका नक्षत्र में गोचर कर रहा है, यह ज्ञात करने हेतु उक्त पृष्ठ का अवलोकन करें - कृत्तिका नक्षत्र के सभी दिनों की सूचि।