
मूल नक्षत्र - मूल, वैदिक ज्योतिष में उन्नीसवाँ नक्षत्र है, जिसका विस्तार धनु राशि में 0° से 13°20' तक है।
प्रतीक चिह्न - इस नक्षत्र का प्रतीक जड़ों का एक गुच्छा अथवा एक हाथी का अंकुश होता है।
खगोलीय नाम - इस नक्षत्र के खगोलीय नाम ε, ζ, η, θ, ι, κ, λ, μ तथा ν सैजिटेरी (Sagittarii) हैं।
नक्षत्र के देवता - मूल नक्षत्र की देवी निरृति हैं, जिन्हें विघटन एवं विनाश की देवी के रूप में वर्णित किया गया है।
शासक ग्रह - मूल नक्षत्र पर केतु (दक्षिण चन्द्रपात) का शासन होता है।
अन्य - मूल का अनुवाद 'जड़' अथवा मूल तारा के रूप में किया जाता है, जिसे बँधे हुये जड़ों के गुच्छे के रूप में दर्शाया जाता है। मूल नक्षत्र दार्शनिक प्रकृति का होता है, जिज्ञासु होता है तथा किसी भी विषय की गूढ़ता ज्ञात करने में आनन्दित होता है।
नक्षत्र अस्त उदय - मूल प्रति वर्ष लगभग 47 दिनों की अवधि के लिये अस्त हो जाता है। मूल नक्षत्र के अस्त एवं उदय होने का समय ज्ञात करने हेतु सम्बन्धित पृष्ठ देखें - मूल अस्त उदय।
नक्षत्र गोचर - मूल को अधिकांश शुभ कार्यों हेतु सामान्य माना जाता है। वर्ष पर्यन्त, चन्द्रमा किस समय मूल नक्षत्र में गोचर कर रहा है, यह ज्ञात करने हेतु उक्त पृष्ठ का अवलोकन करें - मूल नक्षत्र के सभी दिनों की सूचि।