devotionally made & hosted in India
Search
Mic
Android Play StoreIOS App Store
Ads Subscription Disabled
हि
Setting
Clock
Ads Subscription Disabledविज्ञापन हटायें
X

-1996 श्री सत्यनारायण पूजा और कथा के दिन लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिये

DeepakDeepak

-1996 सत्यनारायण पूजा

-1996 श्री सत्यनारायण पूजा के दिन
[-1940 - -1939] विक्रम सम्वत
श्री सत्यनारायण व्रत
जनवरी 9, -1996, बुधवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 01:09 पी एम, जनवरी 09
समाप्त - 12:02 पी एम, जनवरी 10
श्री सत्यनारायण व्रत
फरवरी 8, -1996, शुक्रवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 01:20 ए एम, फरवरी 08
समाप्त - 10:57 पी एम, फरवरी 08
श्री सत्यनारायण व्रत
मार्च 8, -1996, शनिवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
वैशाख, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 10:57 ए एम, मार्च 08
समाप्त - 07:41 ए एम, मार्च 09
श्री सत्यनारायण व्रत
अप्रैल 7, -1996, सोमवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 06:46 पी एम, अप्रैल 06
समाप्त - 03:03 पी एम, अप्रैल 07
श्री सत्यनारायण व्रत
मई 6, -1996, मंगलवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
आषाढ़, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 01:36 ए एम, मई 06
समाप्त - 09:51 पी एम, मई 06
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 08:21 ए एम, जून 04
समाप्त - 05:01 ए एम, जून 05
श्री सत्यनारायण व्रत
जुलाई 4, -1996, शुक्रवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 04:03 पी एम, जुलाई 03
समाप्त - 01:38 पी एम, जुलाई 04
श्री सत्यनारायण व्रत
अगस्त 2, -1996, शनिवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 01:53 ए एम, अगस्त 02
समाप्त - 12:50 ए एम, अगस्त 03
श्री सत्यनारायण व्रत
सितम्बर 1, -1996, सोमवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 02:51 पी एम, अगस्त 31
समाप्त - 03:23 पी एम, सितम्बर 01
श्री सत्यनारायण व्रत
सितम्बर 30, -1996, मंगलवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 07:15 ए एम, सितम्बर 30
समाप्त - 09:10 ए एम, अक्टूबर 01
श्री सत्यनारायण व्रत
अक्टूबर 30, -1996, बृहस्पतिवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 02:16 ए एम, अक्टूबर 30
समाप्त - 04:51 ए एम, अक्टूबर 31
श्री सत्यनारायण व्रत
नवम्बर 29, -1996, शनिवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
पौष, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 10:03 पी एम, नवम्बर 28
समाप्त - 12:28 ए एम, नवम्बर 30
श्री सत्यनारायण व्रत
दिसम्बर 29, -1996, सोमवार
पूर्णिमा
शुक्ल पूर्णिमा
माघ, शुक्ल पूर्णिमा
प्रारम्भ - 04:45 पी एम, दिसम्बर 28
समाप्त - 06:19 पी एम, दिसम्बर 29

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

-1996 श्री सत्यनारायण पूजा और कथा के दिन

Satyanarayana Puja Dates

श्री सत्यनारायण की पूजा भगवान नारायण का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिये की जाती है। श्री नारायण भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं। भगवान विष्णु को इस रूप में सत्य का अवतार माना जाता है। सत्यनारायण की पूजा को करने का कोई एक विशेष दिन निश्चित नहीं है तथा श्रद्धालु इसे किसी भी दिन कर सकते हैं, किन्तु पूर्णिमा के दिन श्री सत्यनारायण भगवान का पूजन करना अत्यन्त शुभ माना जाता है।

श्रद्धालुओं को पूजा के दिन उपवास भी करना चाहिये। पूजा प्रातःकाल एवं सन्ध्याकाल के समय की जा सकती है। सत्यनारायण की पूजा करने का अधिक उपयुक्त समय सन्ध्याकाल है, जिससे उपवासी पूजा के उपरान्त प्रसाद से अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।

द्रिक पञ्चाङ्ग सन्ध्याकाल के लिये श्री सत्यनारायण पूजा के दिनों को सूचीबद्ध करता है। इसीलिये दिये गये सत्यनारायण पूजा के दिन चतुर्दशी अर्थात पूर्णिमा के एक दिन पहले भी आ सकते हैं। जो श्रद्धालु पूजा को प्रातःकाल में करना चाहते है, उन्हें द्रिकपञ्चाङ्ग से सुनिश्चित कर लेना चाहिये कि, पूजा पूर्णिमा तिथि के अन्दर ही की जाये। पूर्णिमा के दिन, प्रातःकाल के समय ही तिथि समाप्त हो सकती है और इसी कारण से प्रातःकाल की पूजा के लिये पूर्णिमा तिथि प्रत्येक बार उपयुक्त नहीं होती है।

इस पूजा के धार्मिक अनुष्ठानों में भगवान सत्यनारायण की पूजा करना प्रमुख कार्य होता है। भगवान सत्यनारायण, भगवान विष्णु के ही एक अत्यन्त कृपामयी स्वरूप हैं। इसके अतिरिक्त भगवान महाविष्णु के शालिग्राम स्वरूप को पञ्चामृत स्नान कराया जाता है। पञ्चामृत का निर्माण दूध, शहद, घी/मख्खन, दही एवं शक्कर के मिश्रण से होता है तथा इसका प्रयोग देवता की शुद्धि हेतु किया जाता है। पँजीरी (जो मीठी एवं गेहूँ के भुने हुये आटे से निर्मित होती है), केला एव अन्य फलों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। प्रसाद में तुलसी दल, अर्थात तुलसी की पत्तियाँ भी मिश्रित की जाती हैं, जिससे प्रसाद और अधिक पवित्र हो जाता है।

सत्यनारायण पूजा का एक अत्यन्त आवश्यक अङ्ग इस पूजा से सम्बन्धित कहानी है, जिसे श्री सत्यनारण कथा के रूप में भी जाना जाता है। यह कथा पूजा में शामिल श्रद्धालुओं और जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं, उनके द्वारा सुनी जाती है। सत्यनारायण कथा में पूजा की उत्पत्ति, पूजा को करने के लाभ तथा किसी के द्वारा पूजा करने का सङ्कल्प लेकर पूर्ण ना करने पर होने वाली सम्भावित दुर्घटनाओं के प्रकरण सम्मिलित हैं।

पूजा का समापन आरती के साथ होता है, जिसमें भगवान श्री सत्यनाराण जी की मूर्ति अथवा छवि की कर्पूर की ज्वाला से आरती उतारते हैं। आरती के पश्चात् श्रद्धालुगण पञ्चामृत एवं प्रसाद ग्रहण करते हैं। व्रत धारण करने वाले श्रद्धालु पञ्चामृत से व्रत को पूर्ण करने के उपरान्त प्रसाद को ग्रहण कर सकते हैं।

Name
Name
Email
द्रिकपञ्चाङ्ग पर टिप्पणी दर्ज करने के लिये गूगल अकाउंट से लॉग इन करें।
टिप्पणी
और लोड करें ↓
Kalash
कॉपीराइट नोटिस
PanditJi Logo
सभी छवियाँ और डेटा - कॉपीराइट
Ⓒ www.drikpanchang.com
प्राइवेसी पॉलिसी
द्रिक पञ्चाङ्ग और पण्डितजी लोगो drikpanchang.com के पञ्जीकृत ट्रेडमार्क हैं।
Android Play StoreIOS App Store
Drikpanchang Donation