



सम्मिलित ग्रहों एवं दृष्टि प्रकार सहित चन्द्र ग्रह की विविध दृष्टियाँ तालिका के रूप में सूचिबद्ध की गयी हैं। यह तालिका चन्द्रमा एवं अन्य ग्रहों के मध्य बनने वाले सूक्ष्म कोणीय सम्बन्धों को दर्शाती है। यहाँ चन्द्रमा की परिवर्तित होती स्थिति एवं उसका सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत है।

ग्रहों की परस्पर समानान्तर गतिविधियाँ सूचिबद्ध की गयी हैं। जब दो ग्रह खगोलीय भूमध्य रेखा से एक ही दिशा में, अर्थात् दोनों उत्तर अथवा दोनों दक्षिण दिशा में, तथा समान अंश पर स्थित होते हैं, तब उन्हें म्यूचुअल पैरेलल अर्थात् ग्रहों की परस्पर समानान्तर स्थिति कहा जाता है।

आकाश में सूर्य के आभासी मार्ग को क्रान्तिवृत्त कहा जाता है। क्रान्तिवृत्त पर ग्रहों के सञ्चरण को ग्रह क्रान्तिवृत्त पारगमन कहा जाता है। जब कोई ग्रह इस मार्ग पर भ्रमण करते हुये एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो वह मानवीय जीवन एवं पृथ्वी पर शुभाशुभ प्रभाव डालता है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, जब आकाशमण्डल में सूर्य एवं चन्द्र के अतिरिक्त अन्य कोई दो ग्रह एक ही राशि में एक अंश या उससे कम की दूरी पर होते हैं, तो उसे ग्रह युद्ध कहा जाता है। इसमें कम अंश वाला ग्रह सामान्यतः विजयी एवं अधिक अंश वाला पराजित माना जाता है। पराजित ग्रह अपना बल एवं शुभ प्रभाव त्यागकर पीड़ित हो जाता है।

लग्न, जो किसी व्यक्ति के कुण्डली में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है, पूर्वी क्षितिज में उदय होती हुयी राशि है। हिन्दु धर्म में विवाह, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्यों सहित विभिन्न मुहूर्तों का निर्धारण लग्न के आधार पर ही किया जाता है।

चन्द्र, मङ्गल, बुध, गुरु आदि ग्रहों के अस्त होने के दिन एवं समय को सूचिबद्ध किया गया है। वैदिक ज्योतिष में ग्रह के अस्त काल को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य के अत्यन्त निकट आ जाने के कारण ग्रह के दृष्टिगोचर न होने की स्थिति को ग्रह अस्त कहा जाता है।

मङ्गल, बुध, गुरु, शुक्र आदि ग्रहों के वक्री होने के दिन एवं समय सूचिबद्ध किये गये हैं। प्रत्येक वक्री क्षेत्र में चार बिन्दु होते हैं, जो कि छाया बिन्दु, वक्री बिन्दु, मार्गी बिन्दु और प्रक्षेपण बिन्दु के नाम से जाने जाते हैं। सूर्य एवं चन्द्र के अतिरिक्त अन्य सभी ग्रह वक्री होते हैं।

प्रस्तुत लेख में स्थान आधारित सायन ग्रह स्थिति प्रदान की गयी है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि आदि ग्रहों की सायन ग्रह स्थिति वर्णित की गयी है। पाश्चात्य ज्योतिष में सायन ग्रह स्थिति को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है।

प्रस्तुत लेख में स्थान आधारित निरयण ग्रह स्थिति प्रदान की गयी है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि आदि ग्रहों की निरयण ग्रह स्थिति वर्णित की गयी है। वैदिक ज्योतिष में निरयण ग्रह स्थिति को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है।



