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2026 सरस्वती जयन्ती का दिन और पूजा का समय लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिये

DeepakDeepak

2026 सरस्वती जयन्ती

लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका
सरस्वती जयन्ती
23वाँ
जनवरी 2026
Friday / शुक्रवार
देवी सरस्वती, विद्या एवं बुद्धि की देवी
Goddess Saraswati

सरस्वती जयन्ती समय

सरस्वती जयन्ती शुक्रवार, जनवरी 23, 2026 को
वसन्त पञ्चमी शुक्रवार, जनवरी 23, 2026 को
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ - जनवरी 22, 2026 को 12:58 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त - जनवरी 23, 2026 को 12:16 पी एम बजे

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

सरस्वती जयन्ती 2026

हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार माघ मास के शुक्लपक्ष की पञ्चमी तिथि को सरस्वती जयन्ती मनायी जाती है। यह पर्व हिन्दु धर्म में पूजी जाने वाली द्वादश सिद्धिविद्या देवियों में से एक देवी सरस्वती को समर्पित है। इस दिन शाक्त उपासना के अनुयायी श्री सरस्वती सिद्धिविद्या की भक्तिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। द्वादश सिद्धिविद्या देवियों को हिन्दु धर्म में परम शक्तिशाली एवं कृपामयी देवियों के रूप में वर्णित किया गया है।

देवी सरस्वती को वाणी, विद्या, बुद्धि, संगीत, कला तथा ज्ञान आदि की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। श्री सरस्वती सिद्धिविद्या साधना करने से साधक को वाक् चातुर्य में निपुणता तथा गूढ़ ज्ञान की प्राप्ति होती है। देवी सरस्वती साधक के चित्त को जागृत करती हैं तथा वाक्-सिद्धि, ध्यान-शक्ति एवं स्मरण-शक्ति प्रदान करती है।

ऋग्वेद, यजुर्वेद आदि धर्मग्रन्थों में देवी सरस्वती का वर्णन प्रारम्भ से ही एक दिव्य नदी एवं वाक्शक्ति के रूप में किया गया है। अतः सरस्वती सिद्धिविद्या केवल शिक्षात्मक ज्ञान की देवी नहीं, अपितु वे ज्ञान तत्त्व की स्वयं अभिव्यक्ति हैं। द्वादश सिद्धिविद्याओं में वे वह शक्ति हैं जो साधक को अज्ञान के अन्धकार से निकालकर आत्मबोध एवं मोक्ष के प्रकाश तक पहुँचाती हैं।

विभिन्न धर्मग्रन्थों में प्राप्त वर्णन के अनुसार देवी सरस्वती की विधिवत् उपासना करने से वाणी में मधुरता, बुद्धि में प्रकाश तथा हृदय में निर्मलता का उदय होता है। यही कारण है कि सरस्वती सिद्धिविद्या को विद्या शक्ति एवं ज्ञानमूल सिद्धि कहा गया है, जो सभी विद्याओं की आदि एवं अन्त दोनों हैं।

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