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कालभैरव अष्टकम | कालभैरवाष्टकम् - संस्कृत गीतिकाव्य और वीडियो गीत

DeepakDeepak

कालभैरव अष्टकम

देवराज-सेव्यमान-पावनाङ्घ्रिपङ्कजं, भगवान कालभैरव का सर्वाधिक प्रसिद्ध अष्टकम् है। इस प्रसिद्ध अष्टकम् का पाठ भगवान कालभैरव से सम्बन्धित अधिकांश अवसरों किया जाता है। भगवान कालभैरव, भगवान शिव के ही विभिन्न रुपों में से एक हैं। पूर्वकाल में भगवान विष्णु एवं ब्रह्माजी के मध्य हुये विवाद के निस्तारण हेतु भगवान शिव कालभैरव के रूप में प्रकट हुये थे। यह भगवान शिव का एक अत्यन्त रूद्र स्वरूप है।

॥ अथ श्रीकालभैरवाष्टकम् ॥

शिवरहस्यान्तर्गते महादेवाख्ये

शिवपार्वतीसंवादे

ईश्वर उवाच।

देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजंव्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।

नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगम्बरंकाशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥1॥

भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहंनितान्तभक्तवत्सलं समस्तलोकपालकम्।

निक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिंकाशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥2॥

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परंनीलकण्ठनीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।

कालकालमम्बुजाक्षकन्धराहरं शिवंकाशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥3॥

शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणंश्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।

भीमवक्रिमभ्रुवं विचित्रताण्डवप्रियंकाशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥4॥

रत्नपादुकाप्रभाविरामपादयुग्मकंनित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्।

मृत्युदर्पनाशनं करालं दंष्ट्रभीषणंकाशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥5॥

धर्मसेतुपालनमधर्ममार्गनाशनंकर्मपाशमोचनं सुकर्मदायकं प्रभुम्।

सुवर्णवर्णकेशपाशशोभिताङ्गनिर्मलंकाशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥6॥

अट्टहासभिन्नपद्द्मजाण्डकोटिसन्ततिंदृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।

अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरंकाशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥7॥

भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकंकाशिवासकोकपुण्यपापशोधनप्रभुम्।

नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्प्रभुंकाशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥8॥

॥ फलश्रुतिः ॥

कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरंज्ञानमुक्तिसाधनं पवित्रपुण्यवर्धनम्।

शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनंते प्रयान्ति कालभैरवादि सेवितं प्रभुं हरम्॥9॥

॥ इति शिवरहस्यान्तर्गते कालभैरवाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
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