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-7997 मेष संक्रान्ति पुण्य काल समय लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिये

DeepakDeepak

-7997 मेष संक्रान्ति

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-7997
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लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका
मेष संक्रान्ति
23वाँ
नवम्बर -7997
Friday / शुक्रवार
मेष संक्रान्ति
Solar New Year

मेष संक्रान्ति पुण्य काल मुहूर्त

मेष संक्रान्ति शुक्रवार, नवम्बर 23, -7997 को
मेष संक्रान्ति पुण्य काल - 11:58 से 16:57
अवधि - 04 घण्टे 59 मिनट्स
मेष संक्रान्ति महा पुण्य काल - 15:18 से 16:57
अवधि - 01 घण्टा 40 मिनट्स
मेष संक्रान्ति का क्षण - 20:02
मेष संक्रान्ति फलम्

मेष संक्रान्ति फलम्

  • छोटे (निम्न) कार्यों में शामिल लोगों के लिए यह संक्रान्ति अच्छी है।
  • वस्तुओं की लागत महँगी होगी।
  • तनाव और संघर्ष लाती है।
  • लोग खांसी और ठण्ड से पीड़ित होंगे, राष्ट्रों के बीच संघर्ष होगा और बारिश के अभाव में अकाल की सम्भावना बनेगी।
मेष संक्रान्ति मुहूर्त

मेष संक्रान्ति मुहूर्त

संक्रान्ति करण: वणिज
संक्रान्ति दिन: Saturday / शनिवार
संक्रान्ति अवलोकन दिनाँक: नवम्बर 23, -7998
संक्रान्ति गोचर दिनाँक: नवम्बर 23, -7998
संक्रान्ति का समय: नवम्बर 23 को 13:51 बजे
संक्रान्ति घटी: 21 (दिनमान)
संक्रान्ति चन्द्रराशि: मीन Meena
संक्रान्ति नक्षत्र: पूर्व भाद्रपद (उग्र संज्ञक) Purva Bhadrapada
वणिज करण संक्रान्ति के साथ वाहन महिष पर सवार
Sankranti Phalam

संक्रान्ति गुण
फलम् संकेत
नाम
राक्षसी
वार मुख
पश्चिम
दृष्टि
ईशान
गमन
उत्तर
वाहन
महिष
उपवाहन
उष्ट्र
वस्त्र
कृष्ण
आयुध
तलवार
भक्ष्य पदार्थ
दही
गन्ध द्रव्य
हरिड़ा
वर्ण
मृग
पुष्प
आक (मदार)
वय
प्रगल्भ
अवस्था
ज्वर
करण मुख
आग्नेय
स्थिति
बैठी
भोजन पात्र
खप्पर
आभूषण
मणि
कन्चुकी
नीली

टिप्पणी: सभी समय २४:००+ प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय २४:०० से अधिक हैं और आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

-7997 मेष संक्रान्ति

मेष संक्रान्ति को महा विशुव संक्रान्ति के नाम से भी जाना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। मेष संक्रान्ति के दिन अधिकांश हिन्दु सौर कैलेण्डरों में नववर्ष का आरम्भ होता है।

भारत में उड़िया कैलेण्डर, तमिल कैलेण्डर, मलयालम कैलेण्डर तथा बंगाली कैलेण्डर आदि विभिन्न सौर कैलेण्डरों का पालन किया जाता है। यह सभी कैलेण्डर मेष संक्रान्ति के आधार पर ही वर्ष के प्रथम दिवस (अथवा मलयालम कैलेण्डर में विषु कानी) का निर्धारण करते हैं। सौर कैलेण्डरों में संक्रान्ति के सटीक समय के आधार पर वर्ष के प्रथम दिवस को चिह्नित करने हेतु विभिन्न नियमों का पालन किया जाता है।

उड़ीसा (आधिकारिक तौर पर ओडिशा) में हिन्दु मध्यरात्रि से पूर्व संक्रान्ति होने पर उसे ही नववर्ष का प्रथम दिवस माना जाता है। उड़ीसा में मेष संक्रान्ति को पणा संक्रान्ति के रूप में मनाया जाता है।

तमिलनाडु में जब संक्रान्ति सूर्योदय के उपरान्त तथा सूर्यास्त से पूर्व होती है, उसी दिन नववर्ष आरम्भ होता है। यदि संक्रान्ति सूर्यास्त के पश्चात् होती है तो वर्ष अगले दिन से आरम्भ होता है। तमिलनाडु में मेष संक्रान्ति को पुथन्डु के रूप में मनाया जाता है।

मलयालम कैलेण्डर में सूर्योदय तथा सूर्यास्त के मध्य के दिन को पाँच भागों में बाँटा गया है। यदि उनमें से पहले तीन भाग के भीतर संक्रान्ति होती है तो वर्ष उसी दिन से आरम्भ होता है, अन्यथा अगले दिन को नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। दूसरे शब्दों में यदि संक्रान्ति मध्याह्न तक होती है, तो इसे उसी दिन मनाया जाता है, अन्यथा इसे अगले दिन मनाया जाता है। केरल में मेष संक्रान्ति को विषु के रूप में मनाया जाता है।

बंगाल में, जब संक्रान्ति सूर्योदय तथा मध्यरात्रि के मध्य के समय में होती है तो नववर्ष अगले दिन से आरम्भ होता है। यदि संक्रान्ति मध्य रात्रि के उपरान्त होती है तो वर्ष अगले से अगले दिन आरम्भ होता है। पश्चिम बंगाल में मेष संक्रान्ति को नबा वर्षा अथवा पोहेला बोइशाख के रूप में मनाया जाता है।

मेष संक्रान्ति को असम में बिहू तथा पंजाब में वैसाखी के रूप में मनाया जाता है।

सामान्य गणना के लिये वर्ष के प्रथम दिन निर्धारित करने हेतु उपरोक्त नियम उत्तम हैं। हालाँकि, दान-पुण्य गतिविधियों के लिये शुभ समय, उपरोक्त नियमों से स्वतन्त्र है तथा इसे संक्रान्ति के सटीक क्षण पर विचार करने के पश्चात किया जाना चाहिये, क्योंकि प्रत्येक संक्रान्ति क्षण से पूर्व अथवा पश्चात में केवल निश्चित समय अवधि को ही संक्रान्ति से सम्बन्धित गतिविधियों के लिये शुभ माना जाता है।

मेष संक्रान्ति के लिये संक्रान्ति के दस घटी पूर्व तथा दस घटी पश्चात के क्षण को शुभ माना जाता है तथा इसी समयावधि को सभी दान-पुण्य अदि गतिविधियों के लिये स्वीकार किया जाता है। यदि संक्रान्ति सूर्यास्त के पश्चात किन्तु मध्य रात्रि से पूर्व होती है तो दिन का उत्तरार्ध माना जाता है तथा यदि संक्रान्ति मध्य रात्रि के पश्चात होती है तो अगले दिन का प्रथम भाग मेष संक्रान्ति अनुष्ठान के लिये शुभ माना जाता है।

दक्षिण भारत में संक्रान्ति को सङ्क्रमणम् कहा जाता है।

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