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-8005 सिंह संक्रान्ति - सायन पुण्य काल समय लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए

DeepakDeepak

-8005 सिंह संक्रान्ति

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-8005
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लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका
सिंह संक्रान्ति
19वाँ
जुलाई -8005
Tuesday / मंगलवार
भगवान सूर्य को सिंह संक्रान्ति अर्घ्य
Simha Sankranti

सिंह संक्रान्ति पुण्य काल मुहूर्त

सिंह संक्रान्ति मंगलवार, जुलाई 19, -8005 को
सिंह संक्रान्ति पुण्य काल - 05:04 ए एम से 05:16 ए एम
अवधि - 00 घण्टे 12 मिनट्स
सिंह संक्रान्ति महा पुण्य काल - 05:04 ए एम से 05:16 ए एम
अवधि - 00 घण्टे 12 मिनट्स
सिंह संक्रान्ति का क्षण - 05:16 ए एम
सिंह संक्रान्ति फलम्

सिंह संक्रान्ति फलम्

  • छोटे (निम्न) कार्यों में शामिल लोगों के लिए यह संक्रान्ति अच्छी है।
  • वस्तुओं की लागत सामान्य होगी।
  • भय और चिन्ता लाती है।
  • लोगों को स्वास्थ्य लाभ होगा, राष्ट्रों के बीच सम्बन्ध मधुर होंगे और अनाज भण्डारण में वृद्धि होगी।
सिंह संक्रान्ति मुहूर्त

सिंह संक्रान्ति मुहूर्त

संक्रान्ति करण: बालव
संक्रान्ति दिन: Wednesday / बुधवार
संक्रान्ति अवलोकन दिनाँक: जुलाई 19, -8005
संक्रान्ति गोचर दिनाँक: जुलाई 19, -8005
संक्रान्ति का समय: 05:16 ए एम, जुलाई 19
संक्रान्ति घटी: 1 (दिनमान)
संक्रान्ति चन्द्रराशि: सिंह Simha
संक्रान्ति नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी (उग्र संज्ञक) Purva Phalguni
बालव करण संक्रान्ति के साथ वाहन व्याघ्र पर सवार
Sankranti Phalam

संक्रान्ति गुण
फलम् संकेत
नाम
मन्दाकिनी
वार मुख
दक्षिण
दृष्टि
ईशान
गमन
पश्चिम
वाहन
व्याघ्र
उपवाहन
अश्व
वस्त्र
पीला
आयुध
गदा
भक्ष्य पदार्थ
पायस
गन्ध द्रव्य
कुमकुम
वर्ण
भूत
पुष्प
जटी
वय
कुमार
अवस्था
भोग
करण मुख
दक्षिण
स्थिति
बैठी
भोजन पात्र
चाँदी
आभूषण
कङ्कण
कन्चुकी
हरि

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

-8005 सिंह संक्रान्ति

हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार जिस समय सूर्यदेव, कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे सिंह संक्रान्ति कहा जाता है। यह घटनाक्रम प्रतिवर्ष श्रावण मास के अन्त या भाद्रपद मास के प्रारम्भ में घटित होता है। संक्रान्ति का शाब्दिक अर्थ संक्रमण अथवा स्थान परिवर्तन होता है। कुछ क्षेत्रों में सिंह संक्रान्ति को सिंघुड़ी संक्रान्ति एवं सिंघड़ा पर्व के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश काल संक्रान्ति कहलाता है। सिंह संक्रान्ति, सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश का पर्व है तथा यह दिन धर्म-कर्म, दान, तप, स्नान एवं पितृ तर्पण आदि शुभ कार्यों हेतु अत्यन्त पुण्यकारी माना गया है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सिंह राशि के स्वामी सूर्यदेव हैं, अर्थात् जब सूर्यदेव सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तो वह अपने स्वगृही स्थान में स्थित होते हैं, जिससे उनका तेज, प्रभाव एवं शुभता अत्यधिक होती है। इसी कारण यह संक्रान्ति पितृ आराधना, दान, श्राद्ध तथा सूर्योपासना के लिये एक विशेष अवसर है।

गृह्यसूत्रों, धर्मशास्त्रों एवं पुराणों में संक्रान्तियों को विशेष रूप से पुण्यकाल बताया गया है। विशेषतः नारदपुराण, मत्स्यपुराण, स्कन्दपुराण तथा विष्णु धर्मसूत्र आदि में उल्लेख मिलता है कि संक्रान्ति काल में किये गये धार्मिक कृत्य, सामान्य समय की तुलना में सहस्र गुना अधिक फलदायक होते हैं। सिंह संक्रान्ति का महत्त्व विशेष रूप से पितृ कार्यों से सम्बन्धित भी माना जाता है। इस संक्रान्ति के समय जो भी श्राद्ध, तर्पण अथवा पिण्डदान किया जाता है, वह पितरों को अत्यन्त तृप्त करता है तथा वंश को समृद्धि प्रदान करता है।

इस दिन प्रातःकाल गङ्गाजल मिश्रित जल से स्नान करके भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना चाहिये। तदुपरान्त तिल एवं जल से पितृ तर्पण करके ब्राह्मण को दक्षिणा सहित भोजन कराना चाहिये। धर्मग्रन्थों में प्राप्त वर्णन के अनुसार संक्रान्ति के समय जो भी श्रद्धापूर्वक सामर्थ्यानुसार अन्न, वस्त्र, छाता, चप्पल, गौ, स्वर्ण, भूमि आदि का दान करता है, वह सप्तजन्मों तक पुण्यफल प्राप्त करता है।

सिंह संक्रान्ति का पर्व भगवान सूर्य के आत्मबल एवं तेजस्विता का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्यदेव अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करने पर आत्मिक ऊर्जा, तप, ज्ञान, तेज एवं शौर्य के संवाहक बन जाते हैं। यही कारण है कि यह काल साधकों के लिये भी विशेष लाभकारी होता है। विभिन्न उपनिषदों एवं योगशास्त्रों में संक्रान्ति काल में किये गये सूर्योपासना, गायत्री जप एवं प्राणायाम को सिद्धि प्रदान करने वाला बताया गया है।

इस प्रकार सिंह संक्रान्ति केवल एक ज्योतिषीय घटना नहीं, अपितु एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से व्रत, जप, स्नान, तर्पण तथा दान आदि सत्कर्म करता है, उसका लौकिक एवं पारलौकिक दोनों प्रकार से कल्याण हो जाता है।

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द्रिक पञ्चाङ्ग और पण्डितजी लोगो drikpanchang.com के पञ्जीकृत ट्रेडमार्क हैं।
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