
टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।
प्रतिपदा श्राद्ध परिवार के उन मृतक सदस्यों के लिये किया जाता है, जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि पर हुयी हो। इस दिन शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है।
प्रतिपदा श्राद्ध तिथि को नाना-नानी का श्राद्ध करने के लिये भी उपयुक्त माना गया है। यदि मातृ पक्ष में श्राद्ध करने के लिये कोई व्यक्ति नहीं है, तो इस तिथि पर श्राद्ध करने से नाना-नानी की आत्मायें प्रसन्न होती हैं। यदि किसी को नाना-नानी की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है, तो भी इस तिथि पर उनका श्राद्ध किया जा सकता है। माना जाता है कि, इस श्राद्ध को करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
प्रतिपदा श्राद्ध को पड़वा श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है।
पितृ पक्ष श्राद्ध पार्वण श्राद्ध होते हैं। इन श्राद्धों को सम्पन्न करने के लिये कुतुप, रौहिण आदि मुहूर्त शुभ मुहूर्त माने गये हैं। अपराह्न काल समाप्त होने तक श्राद्ध सम्बन्धी अनुष्ठान सम्पन्न कर लेने चाहिये। श्राद्ध के अन्त में तर्पण किया जाता है।
पितृपक्ष के प्रथम दिवस पर किया जाने वाला प्रतिपदा श्राद्ध अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। प्रतिपदा श्राद्ध के अवसर पर प्रतिपदा तिथि के दिन दिवंगत हुये पितरों के निमित्त तर्पण, पिण्डदान एवं श्राद्ध कर्म किया जाता है। इस दिन सभी कुटुम्बीजन अपने पितरों की आत्मा की शान्ति हेतु प्रार्थना करते हैं तथा उन्हें भावपूर्ण श्रद्धाञ्जलि अर्पित करते हैं। मार्कण्डेयपुराण में कहा गया है कि -
आयुः प्रजां धनं विद्यां स्वर्गं मोक्षं सुखानि च।
प्रयच्छन्ति तथा राज्यं पितरः श्राध्दतर्पितः॥
आयुः पुत्रान् यशः स्वर्गं कीर्तिं पुष्टिं बलं श्रियम्।
पशून् सौख्यं धनं धान्यं प्राप्नुयात् पितृपूजनात्॥
अर्थात्, पितर अत्यन्त दयालु होते हैं। वे अपने पुत्र-पौत्रादिकों से पिण्डदान एवं तर्पण की आकांक्षा करते हैं। श्राद्धादि क्रियाओं द्वारा पितर परम प्रसन्न एवं सन्तुष्ट होते हैं। प्रसन्न होकर पितृगण श्राद्धकर्ता को दीर्घायु, सन्तति, धन-धान्य, विद्या, राज्य, सुख, यश, कीर्ति, पुष्टि, बल, पशु, श्री, स्वर्ग तथा मोक्ष प्रदान करते हैं। अतः प्रतिपदा पर श्राद्ध करने से न केवल दिवंगत आत्माओं को शान्ति प्राप्त होती है, अपितु भक्तों का आध्यात्मिक एवं भौतिक कल्याण भी होता है।