


मूल मन्त्र से युक्त भैरवी यन्त्र को भैरवी साधना सम्पन्न करने हेतु अत्यन्त प्रभावशाली माध्यम माना जाता है।


ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा॥

1.ॐ भैरव्यै नमः। 2.ॐ भैरवाराध्यायै नमः। 3.ॐ भूतिदायै नमः। ... 107.ॐ सौम्यायै नमः। 108.ॐ शम्भुविलासिन्यै नमः। उपरोक्त मन्त्रों से युक्त देवी भैरवी की अष्टोत्तर शतनामावली वीडिओ सहित प्रदान की गयी है। भक्तगण इन मन्त्रों का जाप देवी माँ को प्रसन्न करने हेतु करते हैं।

भैरवी मूल मन्त्र, श्मशान भैरवी मन्त्र, भैरवी गायत्री मन्त्र आदि विभिन्न दुर्लभ मन्त्रों से युक्त देवी भैरवी के मन्त्रों की सूचि प्रदान की गयी है। भैरवी साधना में इन मन्त्रों का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। यह मन्त्र अत्यन्त दिव्य एवं प्रभावशाली माने जाते हैं।

देवी भैरवी के विषय में विस्तृत वर्णन किया गया है। देवी भैरवी दस महाविद्या देवियों में से पाँचवीं देवी हैं। आसुरी शक्तियों एवं शारीरिक दुर्बलताओं से मुक्ति तथा सुयोग्य जीवनसाथी, सफल प्रेम विवाह एवं शीघ्र विवाह हेतु देवी भैरवी की पूजा-अर्चना की जाती है।

देवी शक्ति के १० मुख्य स्वरूपों को दश महाविद्या के रूप में पूजा जाता है। दश महाविद्या विभिन्न दिशाओं की अधिष्ठातृ शक्तियाँ हैं। दश महाविद्या की पूजा एवं साधना के माध्यम से साधकों को विभिन्न प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।


