यह पृष्ठ कृष्ण जन्माष्टमी के समय की जाने वाली श्री कृष्ण पूजा के सभी चरणों का वर्णन करता है। इस पृष्ठ पर दी गयी पूजा में षोडशोपचार पूजा के सभी १६ चरणों का समावेश किया गया है और सभी चरणों का वर्णन वैदिक मन्त्रों के साथ दिया गया है। जन्माष्टमी के दौरान की जाने वाली श्री कृष्ण पूजा में यदि षोडशोपचार पूजा के सोलह (१६) चरणों का समावेश हो तो उसे षोडशोपचार जन्माष्टमी पूजा विधि के रूप में जाना जाता है।
भगवान श्री कृष्ण का ध्यान पहले से अपने सम्मुख प्रतिष्ठित श्रीकृष्ण की नवीन प्रतिमा में करें।

ॐ तमद्भुतं बालकमम्बुजेक्षणं चतुर्भुजं शंखगदार्युदायुधम्।
श्रीवत्सलक्ष्मं गलशोभिकौस्तुभं पीताम्बरं सान्द्रपयोदसौभगम्॥
महार्हवैदूर्यकिरीटकुण्डलत्विषा परिष्वक्तसहस्रकुन्तलम्।
उद्दामकाञ्च्यङ्गदकङ्कणादिभिर्विरोचमानं वसुदेव ऐक्षत॥
ध्यायेत् चतुर्भुजं कृष्णं शंखचक्रगदाधरम्।
पीतम्बरधरं देवं मालाकौस्तुभभूषितम्॥
ॐ श्रीकृष्णाय नमः। ध्यानात् ध्यानं समर्पयामि॥
भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करने के बाद, निम्न मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सम्मुख आवाहन-मुद्रा दिखाकर, उनका आवाहन करें।
ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्।
स भूमिं विश्वतो वृत्वा अत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्॥
आगच्छ देवदेवेश तेजोराशे जगत्पते।
क्रियमाणां मया पूजां गृहाण सुरसत्तम॥
आवाहयामि देव त्वां वसुदेवकुलोद्भवम्।
प्रतिमायां सुवर्णादिनिर्मितायां यथाविधि॥
कृष्णं च बलभद्रं च वसुदेवं च देवकीम्।
नन्दगोपं यशोदां च सुभद्रां तत्र पूजयेत्॥
आत्मा देवानां भुवनस्य गर्भो यथावशं चरति देवेषः।
घोषा इदस्य शर्ण्विरे न रूपं तस्मै वाताय हविषा विधेम॥
ॐ श्रीक्लींकृष्णाय नमः। सपरिवारं श्रीबालकृष्णम् आवाहयामि॥
भगवान श्री कृष्ण का आवाहन करने के बाद, निम्न मन्त्र पढ़ कर उन्हें आसन के लिये पाँच पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने छोड़े।
पुरुष एवेदगं सर्वम् यद्भूतं यच्छ भव्यम्।
उतामृतत्वस्येशानः यदन्नेनातिरोहति॥
राजाधिराज राजेन्द्र बालकृष्ण महीपते।
रत्नसिंहासनं तुभ्यं दास्यामि स्वीकुरु प्रभो॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। आसनं समर्पयामि॥
भगवान श्री कृष्ण को आसन प्रदान करने के बाद, निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए पाद्य (चरण धोने हेतु जल) समर्पित करें।
एतावानस्य महिमा अतो ज्यायागश्च पूरुषः।
पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि॥
अच्युतानन्द गोविन्द प्रणतार्तिविनाशन।
पाहि मां पुण्डरीकाक्ष प्रसीद पुरुषोत्तम॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। पादयोः पाद्यं समर्पयामि॥
पाद्य समर्पण के बाद, भगवान श्री कृष्ण को अर्घ्य (शिर के अभिषेक हेतु जल) समर्पित करें।
त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुषः पादोऽस्येहाभवात्पुनः।
ततो विश्वङ्व्यक्रामत् साशनानशने अभि॥
परिपूर्ण परानन्द नमो कृष्णाय वेधसे।
गृहाणार्घ्यं मया दत्तं कृष्ण विष्णो जनार्दन॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। अर्घ्यं समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए आचमन के लिए श्रीकृष्ण को जल समर्पित करें।
तस्माद्विराडजायत विराजो अधि पूरुषः।
स जातो अत्यरिच्यत पश्चाद्भूमिमथो पुरः॥
नमः सत्याय शुद्धाय नित्याय ज्ञानरूपिणे।
गृहाणाचमनं कृष्ण सर्वलोकैकनायक॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। आचमनीयं समर्पयामि॥
आचमन समर्पण के बाद, निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को जल से स्नान कराएँ।
यत्पुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतन्वत।
वसन्तो अस्यासीदाज्यम् ग्रीष्म इध्मश्शरद्धविः॥
ब्रह्माण्डोदरमध्यस्थैर्स्तिथैश्च यदुनन्दन।
स्नापयिष्याम्यहं भक्त्या त्वं गृहाण जनार्दन॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। मलापकर्षस्नानं समर्पयामि॥
स्नान कराने के बाद, निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को मोली के रूप में वस्त्र समर्पित करें।
ॐ तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन् पुरुषं जातमग्रतः।
तेन देवा अयजन्त साध्या ऋषयश्च ये॥
ॐ उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेस्मिन्कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥
तप्तकाञ्चनसंकाशं पीताम्बरम् इदं हरे।
संगृहाण जगन्नाथ बालकृष्ण नमोऽस्तुते॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। वस्त्रयुग्मं समर्पयामि॥
वस्त्र समर्पण के बाद, निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत समर्पित करें।
तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः संभृतं पृषदाज्यम्।
पशूगँस्तागंश्चक्रे वायव्यान् आरण्यान् ग्राम्याश्च ये॥
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥
श्रीबालकृष्ण देवेश श्रीधरानन्त राघव।
ब्रह्मसूत्रं चोत्तरीयं गृहाण यदुनन्दन॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। यज्ञोपवीतं समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें।
तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः ऋचः सामानि जज्ञिरे।
छन्दागंसि जज्ञिरे तस्मात् यजुस्तस्मादजायत॥
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीगं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
कुंकुमागुरु कस्तूरी कर्पूरं चन्दनं तथा।
तुभ्यं दास्यामि राजेन्द्र श्रीकृष्ण स्वीकुरु प्रभो॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। गन्धं समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण के श्रृंगार के लिये आभूषण समर्पित करें।
वज्रमाणिक्यवैदूर्यमुक्ताविद्रूममण्डितम्।
पुष्परागसमायुक्तं भूषणं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। आभरणानि समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को विविध प्रकार के सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें।
ॐ अहिरिव भोगैः पर्येति बाहुं जयाया हेतिं परिबाधमानः।
हस्तघ्नो विश्वा वयुनानि विद्वान्पुमान्पुमांसं परिपातु विश्वतः॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। नाना परिमलद्रव्यं समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को पुष्प समर्पित करें।
माल्यादीनि सुगन्धीनि माल्यत्यादीनि वै प्रभो।
मया हृतानि पूजार्थं पुष्पाणि प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। पुष्पाणि समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए भगवन कृष्ण के अङ्ग-देवताओं का पूजन करना चाहिये। बाएँ हाथ में चावल, पुष्प व चन्दन लेकर प्रत्येक मन्त्र का उच्चारण करते हुए दाहिने हाथ से श्री कृष्ण की मूर्ति के पास छोड़ें।
ॐ गोविन्दाय नमः। पादौ पूजयामि॥
ॐ माधवाय नमः। जंघे पूजयामि॥
ॐ मधुसूदनाय नमः। कटी पूजयामि॥
ॐ पद्मनाभाय नमः। नाभिं पूजयामि॥
ॐ हृषीकेशाय नमः। हृदयं पूजयामि॥
ॐ संकर्षणाय नमः। स्तनौ पूजयामि॥
ॐ वामनाय नमः। बाहू पूजयामि॥
ॐ दैत्यसूदनाय नमः। हस्तौ पूजयामि॥
ॐ हरिकेशाय नमः। कण्ठं पूजयामि॥
ॐ चारुमुखाय नमः। मुखं पूजयामि॥
ॐ त्रिविक्रमाय नमः। नासिकां पूजयामि॥
ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः। नेत्रे पूजयामि॥
ॐ नृसिंहाय नमः। श्रोत्रे पूजयामि॥
ॐ उपेन्द्राय नमः। ललाटं पूजयामि॥
ॐ हरये नमः। शिरः पूजयामि॥
ॐ श्रीकृष्णाय नमः। सर्वाङ्गं पूजयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को धूप समर्पित करें।
वनस्पत्युद्भवो दिव्यो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः।
बालकृष्ण महीपाल धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
यत्पुरुषं व्यदधुः कतिधा व्यकल्पयन्।
मुखं किमस्य कौ बाहू कावूरू पादावुच्येते॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। धूपम् आघ्रापयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को दीप समर्पित करें।
साज्यं त्रिवर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।
गृहाण मङ्गलं दीपं त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥
भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने।
त्राहि मां नरकात् घोरात् दीपो ज्योतिर्नमोस्तुते॥
ब्राह्मणोस्य मुखमासीत् बाहू राजन्यः कृतः।
उरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्यागं शूद्रो अजायत॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। दीपं दर्शयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को नैवेद्य समर्पित करें।
ॐ कृष्णाय विद्महे। बलभद्राय धीमहि।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात्॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः।
निर्विषीकरणार्थे तार्क्षमुद्रा।
अमृतीकरणार्थे धेनुमुद्रा।
पवित्रीकरणार्थे शङ्खमुद्रा।
संरक्षणार्थे चक्रमुद्रा।
विपुलमयकरणार्थे मेरुमुद्रा।
ॐ सत्यं त्वर्तेन परिषिञ्चामि।
भोः! स्वामिन् भोजनार्थम् आगच्छ।
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः।
अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा।
ॐ प्राणात्मने नारायणाय स्वाहा।
ॐ अपानात्मने वासुदेवाय स्वाहा।
ॐ व्यानात्मने सङ्कर्षणाय स्वाहा।
ॐ उदानात्मने प्रद्युम्नाय स्वाहा।
ॐ समानात्मने अनिरुद्धाय स्वाहा।
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः।
नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे अचलां कुरु।
ईप्सितं मे वरं देहि इहात्र च परां गतिम्॥
श्रीकृष्ण नमस्तुभ्यं महानैवेद्यमुत्तमम्।
संगृहाण सुरश्रेष्ठिन् भक्तिमुक्तिप्रदायकम्॥
ॐ चन्द्रमा मनसो जातः चक्षोः सूर्यो अजायत।
मुखादिन्द्रश्चाग्निश्च प्राणाद्वायुरजायत॥
ॐ आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। नैवेद्यं समर्पयामि॥
सर्वत्र अमृतापिधानमसि स्वाहा॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। उत्तरापोषणं समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को ताम्बूल (पान, सुपारी के साथ) समर्पित करें।
पूगीफलं सताम्बूलं नागवल्लिदलैर्युतम्।
ताम्बूलं गृह्यतां कृष्ण एलालवङ्गसंयुतम्॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। सपूगीफलं ताम्बूलं समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को दक्षिणा समर्पित करें।
हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसोः।
अनन्तपुण्यफलदमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। दक्षिणां समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को निराजन (आरती) समर्पित करें।
ॐ श्रिये जात श्रिय आनिर्याय श्रियं वयो जनितृभ्यो दधातु।
श्रियं वसाना अमृतत्वमायन् भजंति सद्यः सविता विदध्यून्।
श्रिय एवैनं तच्छ्रियामादधाति। सन्ततमृचा वषट्कृत्यं
सन्धत्तं सन्धीयते प्रजया पशुभिः। य एवं वेद॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। महानीराजनं दीपं समर्पयामि॥
अब श्रीकृष्ण की प्रदक्षिणा (बाएँ से दाएँ ओर की परिक्रमा) के साथ निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को फूल समर्पित करें।
ॐ नाभ्या आसीदन्तरिक्षम् शीर्ष्णो द्यौः समवर्तत।
पद्भ्यां भूमिर्दिशः श्रोत्रात् तथा लोकाँ अकल्पयन्॥
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।
तानि तानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणे पदे पदे॥
अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम।
तस्मात् कारुण्यभावेन रक्ष मां यदुनन्दन॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। प्रदक्षिणां समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को नमस्कार करें।
नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च।
जगदीशाय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः॥
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥
नमस्तुभ्यं जगन्नाथदेवकीतनय प्रभो।
वसुदेवात्मजानन्द यशोदानन्दवर्धन॥
गोविन्द गोकुलाधार गोपीकान्त नमोस्तुते।
सप्तास्यासन् परिधयः त्रिस्सप्त समिधः कृताः।
देवा यद्यज्ञं तन्वानाः अबध्नन्पुरुषं पशुम्॥
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम्॥
नमः सर्वहितार्थाय जगदाधारहेतवे।
साष्टाङ्गोयं प्रणामस्ते प्रयत्नेन मया कृतः।
उरसा शिरसा दृष्ट्या मनसा वचसा तथा।
पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्यां प्रणामोऽष्टाङ्ग उच्यते॥
शात्येनापि नमस्कारान् कुर्वतः शार्ङ्गपाणये।
शतजन्मार्चितं पापं तत्क्षणादेव नश्यति॥
ॐ श्रीबालकृष्णाय नमः। नमस्कारान् समर्पयामि॥
निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए पूजा के दौरान हुई किसी ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए श्रीकृष्ण से क्षमा-प्रार्थना करें।
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व पुरुषोत्तम॥
यान्तु देव गणाः सर्वे पूजाम् आदाय पार्थिवीम्।
इष्टकाम्यार्थसिद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च॥
॥ॐ श्रीकृष्णार्पणमस्तु॥