
टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में नई दिल्ली, भारत के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।
चित्रा पौर्णमि एक तमिल हिन्दु त्यौहार है। यह त्यौहार, चिथिराई माह की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। चित्रा पौर्णमि पर्व, भगवान चित्रगुप्त को समर्पित है। भगवान चित्रगुप्त, यम देवता के सहायक हैं, जो प्रत्येक जीव के कर्मों का विवरण अपनी धर्म पुस्तक में लिखते रहते हैं। दक्षिण भारत में तमिल हिन्दुओं द्वारा यह पर्व अत्यन्त हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस दिन धूप, कर्पूर, तथा पुष्पों द्वारा भगवान चित्रगुप्त एवं भगवान शिव का पूजन किया जाता है।
दक्षिण भारत में यह दिन भगवान चित्रगुप्त के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है। हालाँकि, उत्तर भारतीय क्षेत्रों में कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि के दिन चित्रगुप्त पूजा नामक त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन कायस्थ समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त सहित अपने बही-खाताओं एवं कलम-दवात की पूजा करते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय देवराज इन्द्र एवं देवगुरु बृहस्पति के मध्य किसी विषय पर विवाद हो गया, जिसे इन्द्र ने बृहस्पति से कहा था। बृहस्पति ने उन्हें अपने बुरे कर्मों का प्रायश्चित्त करने के लिये पृथ्वी की तीर्थयात्रा करने का निर्देश दिया। स्वीकार करने के पश्चात् इन्द्र ने अपने गुरु की इच्छा पूर्ण की। यात्रा के दौरान इन्द्र को कदम्ब-वृक्ष के नीचे एक शिवलिङ्ग प्राप्त हुआ। तदुपरान्त उन्हें समझ आया कि शिव ही उनके बुरे कर्मों को कम करने में उनकी सहायता कर रहे थे। उन्होंने शीघ्र ही शिव को कमल के पुष्प भेंट करना आरम्भ कर दिया। मान्यताओं के अनुसार यह कथा मदुरै में घटित हुयी थी। भक्तगण मदुरै के मीनाक्षी मन्दिर में भगवान शिव का विशेष पूजन करते हैं।
इस पर्व के दिन अनेक श्रद्धालु नदियों के तट अथवा ऐसे स्थानों पर एकत्रित होते हैं, जहाँ चन्द्रमा के दर्शन सम्भव हों तथा कुटुम्बीजनों एवं मित्रों सहित भोजन करते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस प्रकार करने से उन्हें चन्द्रदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा अपने प्रियजनों से आनन्द एवं आत्मीयता का अनुभव होता है।
यह भी विश्वास है कि चन्द्रदेव के समक्ष दीप प्रज्वलित करने से मन के नकारात्मक भाव दूर होते हैं। यह परम्परा विशेष रूप से भारत के तमिल नाडु राज्य के तिरुनेलवेली जनपद में स्थित चित्रा नदी के तट पर अत्यन्त लोकप्रिय है।
तमिल नाडु एवं केरल में इस पर्व को चित्रा पौर्णमि कहा जाता है, विशेषकर कौमारम् तथा शैव सिद्धान्त के अनुयायियों द्वारा। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान मुरुगन की पूजा करते हैं तथा अगले दिन प्रातःकाल व्रत का पारण करते हैं। भगवान मुरुगन की पूजा तथा उनसे सम्बन्धित उत्सवों का आरम्भ भी प्रत्येक वर्ष इसी दिन से होता है।