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2027 कुब्जिका जयन्ती का दिन और पूजा का समय लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिये

DeepakDeepak

2027 कुब्जिका जयन्ती

लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका
कुब्जिका जयन्ती
4वाँ
मई 2027
Tuesday / मंगलवार
देवी कुब्जिका
Goddess Kubjika

कुब्जिका जयन्ती मुहूर्त

कुब्जिका जयन्ती मंगलवार, मई 4, 2027 को
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ - मई 03, 2027 को 07:33 ए एम बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त - मई 04, 2027 को 07:00 ए एम बजे

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

कुब्जिका जयन्ती 2027

पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को कुब्जिका जयन्ती मनायी जाती है। अमान्त पञ्चाङ्ग में यह तिथि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है। कुब्जिका जयन्ती देवी कुब्जिका को समर्पित पर्व है। हिन्दु धर्म में देवी कुब्जिका को द्वादश सिद्धिविद्या देवियों में से एक के रूप में पूजा जाता है।

शाक्त सम्प्रदाय, कुब्जिकामत तथा कौल तन्त्र के अन्तर्गत मुख्य रूप से देवी कुब्जिका की आराधना की जाती है। देवी कुब्जिका को वक्रेश्वरी, वक्रिका तथा छिञिनी आदि नामों से भी जाना जाता है। कुब्जिका शब्द संस्कृत भाषा से उद्धृत है जिसका अर्थ "टेढ़ा होना" अथवा "मुड़ा हुआ होना" होता है।

एक समय नवात्मा भगवान शिव ने अपनी धर्मपत्नी वक्रिका को आलिङ्गन में लिया जिसके कारण लज्जा से देवी ने अपने शरीर को एक ओर झुका लिया। इस लीला के कारण ही वे कुब्जिका अथवा वक्रिका के नाम से लोकप्रिय हो गयीं। शतसाहस्रसंहिता के भाष्य में प्राप्त वर्णन के अनुसार कुब्ज होकर जो सर्वत्र संकुचित रूप से व्याप्त हो जाती हैं, उन्हें कुब्जिका कहते हैं।

गुप्तकाल में 5वीं शताब्दी से 9वीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक संकलित अग्निपुराण, मत्स्यपुराण तथा गरुड़पुराण में देवी कुब्जिका का उल्लेख प्राप्त होता हैं। 10वीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी के मध्य उत्तर भारत में देवी कुब्जिका की उपासना अपनी चरम सीमा पर थी, किन्तु 15वीं से 16वीं शताब्दी के अन्त तक यह गुप्त हो गयी।

नेपाल में 900 से 1600 ई तक के मध्य देवी कुब्जिका की उपासना के साक्ष्य प्राप्त होते हैं। नेपाल में मन्थानभैरवतन्त्र, शतसाहस्रसंहिता, कुब्जिकामततन्त्र, अम्बासंहिता तथा श्रीमततन्त्र आदि ग्रन्थों के हस्तलेख प्राप्त होते हैं तथा वहाँ वर्तमान में भी पश्चिमाम्नाय कुब्जिकाक्रम परम्परा प्रचलित है।

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