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श्री दुर्गा अष्टकम् - संस्कृत गीतिकाव्य एवं वीडियो गीत

DeepakDeepak

श्री दुर्गाष्टकम्

श्री दुर्गाष्टकम्, देवी दुर्गा को समर्पित एक अत्यन्त प्रचलित स्तुति है। आठ श्लोकों से युक्त होने के कारण इसे अष्टकम् कहा जाता है। देवी दुर्गा को प्रसन्न करने एवं उनकी कृपा प्राप्त करने हेतु श्री दुर्गाष्टकम् का पाठ किया जाता है।

॥ श्री दुर्गाष्टकम् ॥

कात्यायनि महामायेखड्गबाणधनुर्धरे।

खड्गधारिणि चण्डिदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥1॥

वसुदेवसुते कालिवासुदेवसहोदरि।

वसुन्धराश्रिये नन्देदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥2॥

योगनिद्रे महानिद्रेयोगमाये महेश्वरि।

योगसिद्धिकरी शुद्धेदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥3॥

शङ्खचक्रगदापाणेशार्ङ्गज्यायतबाहवे।

पीताम्बरधरे धन्येदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥4॥

ऋग्यजुस्सामाथर्वाणश्चतुस्सामन्तलोकिनि।

ब्रह्मस्वरूपिणि ब्राह्मिदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥5॥

वृष्णीनां कुलसम्भूतेविष्णुनाथसहोदरि।

वृष्णिरूपधरे धन्येदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥6॥

सर्वज्ञे सर्वगे शर्वेसर्वेशे सर्वसाक्षिणि।

सर्वामृतजटाभारेदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥7॥

अष्टबाहु महासत्त्वेअष्टमी नवमि प्रिये।

अट्टहासप्रिये भद्रेदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥8॥

दुर्गाष्टकमिदं पुण्यंभक्तितो यः पठेन्नरः।

सर्वकाममवाप्नोतिदुर्गालोकं स गच्छति॥9॥

॥ इति श्रीदुर्गाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
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