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परशुराम अष्टकम् | परशुरामाष्टकम् - संस्कृत गीतिकाव्य और वीडियो गीत

DeepakDeepak

परशुराम अष्टकम्

शुभ्रदेहं सदा क्रोधरक्तेक्षणम् भगवान परशुराम को समर्पित सर्वाधिक लोकप्रिय अष्टकमों में से एक है। इस प्रसिद्ध अष्टकम् का पाठ भगवान परशुराम से सम्बन्धित अधिकांश अवसरों पर किया जाता है।

॥ अथ श्री परशुरामाष्टकम् ॥

शुभ्रदेहं सदा क्रोधरक्तेक्षणम्

भक्तपालं कृपालुं कृपावारिधिम्

विप्रवंशावतंसं धनुर्धारिणम्

भव्ययज्ञोपवीतं कलाकारिणम्

यस्य हस्ते कुठारं महातीक्ष्णकम्

रेणुकानन्दनं जामदग्न्यं भजे॥1॥

सौम्यरुपं मनोज्ञं सुरैर्वन्दितम्

जन्मतः ब्रह्मचारिव्रते सुस्थिरम्

पूर्णतेजस्विनं योगयोगीश्वरम्

पापसन्तापरोगादिसंहारिणम्

दिव्यभव्यात्मकं शत्रुसंहारकम्

रेणुकानन्दनं जामदग्न्यं भजे॥2॥

ऋद्धिसिद्धिप्रदाता विधाता भुवो

ज्ञानविज्ञानदाता प्रदाता सुखम्

विश्वधाता सुत्राताऽखिलं विष्टपम्

तत्त्वज्ञाता सदा पातु माम् निर्बलम्

पूज्यमानं निशानाथभासं विभुम्

रेणुकानन्दनं जामदग्न्यं भजे॥3॥

दुःख दारिद्र्यदावाग्नये तोयदम्

बुद्धिजाड्यं विनाशाय चैतन्यदम्

वित्तमैश्वर्यदानाय वित्तेश्वरम्

सर्वशक्तिप्रदानाय लक्ष्मीपतिम्

मङ्गलं ज्ञानगम्यं जगत्पालकम्

रेणुकानन्दनं जामदग्न्यं भजे॥4॥

यश्च हन्ता सहस्रार्जुनं हैहयम्

त्रैगुणं सप्तकृत्वा महाक्रोधनैः

दुष्टशून्या धरा येन सत्यं कृता

दिव्यदेहं दयादानदेवं भजे

घोररूपं महातेजसं वीरकम्

रेणुकानन्दनं जामदग्न्यं भजे॥5॥

मारयित्वा महादुष्ट भूपालकान्

येन शोणेन कुण्डेकृतं तर्पणम्

येन शोणीकृता शोणनाम्नी नदी

स्वस्य देशस्य मूढा हताः द्रोहिणः

स्वस्य राष्ट्रस्य शुद्धिःकृता शोभना

रेणुकानन्दनं जामदग्न्यं भजे॥6॥

दीनत्राता प्रभो पाहि माम् पालक!

रक्ष संसाररक्षाविधौ दक्षक!

देहि संमोहनी भाविनी पावनी

स्वीय पादारविन्दस्य सेवा परा

पूर्णमारुण्यरूपं परं मञ्जुलम्

रेणुकानन्दनं जामदग्न्यं भजे॥7॥

ये जयोद्घोषकाः पादसम्पूजकाः

सत्वरं वाञ्छितं ते लभन्ते नराः

देहगेहादिसौख्यं परं प्राप्य वै

दिव्यलोकं तथान्ते प्रियं यान्ति ते

भक्तसंरक्षकं विश्वसम्पालकम्

रेणुकानन्दनं जामदग्न्यं भजे॥8॥

॥ इति श्रीपरशुरामाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
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