



ॐ शं शनैश्चराय नमः।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
ॐ सूर्यात्मजाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि
तन्नः सौरिः प्रचोदयात्॥
ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
ॐ शन्नोदेवीर भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।
शं॥

भगवान शनि हिन्दु धर्म में पूजे जाने वाले सर्वाधिक लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं। धर्मग्रन्थों में शनिदेव को कर्म फलदाता के रूप में वर्णित किया गया है। सप्तवारों में से शनिवार पर शनिदेव का आधिपत्य है। इसीलिये शनिवार के दिन शनि देव की विशेष पूजा की जाती है।

भगवान शनि के जन्मदिवस को शनि जयन्ती के रूप में मनाया जाता है। शनि जयन्ती को शनैश्चर जयन्ती एवं शनि अमावस्या भी कहा जाता है। भगवान शनि हिन्दु धर्म में पूजे जाने नवग्रहों में से एक हैं। शनिदेव प्राणियों को कर्मानुसार फल प्रदान करते हैं।

कोणोऽन्तको रौद्रयमोऽथ बभ्रुः कृष्णः शनिः पिङ्गलमन्दसौरिः। नित्यं स्मृतो यो हरते च पीडां तस्मै नमः श्रीरविनन्दनाय॥1॥ शनि देव को समर्पित अत्यन्त दिव्य एवं प्रभावशाली शनि स्तोत्र संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित प्रदान किया गया है। यह स्तोत्र ब्रह्माण्डपुराण से लिया गया है।

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥ चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥ शनिदेव को समर्पित अत्यन्त प्रभावशाली शनि चालीसा हिन्दी बोल एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है। शनिवार को इस चालीसा का पाठ करने से विशेष लाभ होता है।

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय जय श्री शनिदेव...॥ शनिदेव को समर्पित सर्वाधिक प्रचलित आरती हिन्दी बोल एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है। इस आरती का गायन शनिदेव के दैनिक पूजन में भी किया जाता है।

1. ॐ श्री शनैश्चराय नमः। 2. ॐ शान्ताय नमः। 3. ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः। ... 107. ॐ परभीतिहराय नमः। 108. ॐ भक्तसंघमनोऽभीष्टफलदाय नमः। भगवान शनि के 108 पवित्र नामों एवं मन्त्रों से युक्त श्री शनि अष्टोत्तर शतनामावली अर्थ एवं वीडियो सहित प्रदान की गयी है। इन मन्त्रों का जाप करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

प्रस्तुत लेख में सभी नौ ग्रहों से सम्बन्धित नवग्रह रंगोली डिज़ाइन बीज मन्त्रों सहित प्रदान की गयी हैं। दिये गये चित्रों में चरणबद्ध रूप से रंगोली बनाने की प्रक्रिया को दर्शाया गया है जिसके माध्यम से आप सरलता से रंगोली बना सकते हैं।

सूर्य के 108 नाम, चन्द्र के 108 नाम, मङ्गल के 108 नाम, बुध के 108 नाम सहित सभी नौ ग्रहों के 108 नामों का संग्रह प्रदान किया गया है। अपनी राशि अनुसार सम्बन्धित ग्रह को प्रसन्न करने हेतु उक्त नामों का जाप किया जा सकता है।

हिन्दु धर्म में वैदिक ज्योतिष के अन्तर्गत नवग्रहों को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य, चन्द्र, मङ्गल, बुध, गुरु, शुक्र आदि नवग्रह व्यापक रूप से समस्त प्राणियों के जीवन को प्रभावित करते हैं। इन ग्रहों के विषय में विस्तारपूर्वक पढ़ें।

जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥1॥ नवग्रह स्तोत्रम् संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित प्रदान किया गया है। इस स्तोत्र का पाठ नौ ग्रहों को प्रसन्न करने हेतु किया जाता है।


