



हिन्दु धर्म में वैदिक ज्योतिष के अन्तर्गत नवग्रहों को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य, चन्द्र, मङ्गल, बुध, गुरु, शुक्र आदि नवग्रह व्यापक रूप से समस्त प्राणियों के जीवन को प्रभावित करते हैं। इन ग्रहों के विषय में विस्तारपूर्वक पढ़ें।

जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्। तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥1॥ नवग्रह स्तोत्रम् संस्कृत बोल एवं वीडियो सहित प्रदान किया गया है। इस स्तोत्र का पाठ नौ ग्रहों को प्रसन्न करने हेतु किया जाता है।

प्रथमहि रवि कहँ नावौं माथा। करहुं कृपा जनि जानि अनाथा॥ हे आदित्य दिवाकर भानू। मैं मति मन्द महा अज्ञानू॥ नौ ग्रहों को समर्पित यह 40 चौपाइयों की स्तुति, जिसे श्री नवग्रह चालीसा के रूप में जाना जाता है, वीडियो एवं हिन्दी बोल सहित प्रदान की गयी है।

प्रार्थना, आवाहनम् तथा दशोपचार-पूजनम् के मन्त्रों सहित सङ्क्षिप्त नवग्रह पूजा विधि प्रदान की गयी है। दीवाली पूजा तथा अन्य विशेष अवसरों पर की जाने वाली पूजा के दौरान नवग्रह पूजा के लिये उक्त सङ्क्षिप्त नवग्रह पूजा विधि का प्रयोग किया जा सकता है।

प्रस्तुत लेख में सभी नौ ग्रहों से सम्बन्धित नवग्रह रंगोली डिज़ाइन बीज मन्त्रों सहित प्रदान की गयी हैं। दिये गये चित्रों में चरणबद्ध रूप से रंगोली बनाने की प्रक्रिया को दर्शाया गया है जिसके माध्यम से आप सरलता से रंगोली बना सकते हैं।

सूर्य के 108 नाम, चन्द्र के 108 नाम, मङ्गल के 108 नाम, बुध के 108 नाम सहित सभी नौ ग्रहों के 108 नामों का संग्रह प्रदान किया गया है। अपनी राशि अनुसार सम्बन्धित ग्रह को प्रसन्न करने हेतु उक्त नामों का जाप किया जा सकता है।











