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संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा संग्रह | सभी संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का संग्रह

DeepakDeepak

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा संग्रह

  1. भालचन्द्र संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, चैत्र माह (अमान्त फाल्गुन माह) की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को भालचन्द्र संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। हिन्दु धर्म ग्रन्थों के अनुसार, जीवन में आने वाले घोर संकटों के निवारण हेतु भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत एक अमोघ उपाय है।
  2. विकट संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, वैशाख माह (अमान्त चैत्र माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के विकट रूप का पूजन किया जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत एवं पूजन करने से समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
  3. एकदन्त संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, ज्येष्ठ माह (अमान्त वैशाख माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को एकदन्त संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। एकदन्त संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के एकदन्त रूप का पूजन किया जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत एवं पूजन करने से समस्त कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
  4. कृष्णपिङ्गल संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, आषाढ़ माह (अमान्त ज्येष्ठ माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को कृष्णपिङ्गल संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के कृष्णपिङ्गल रूप की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन गणपति भगवान का पूजन करने से व्यक्ति जीवन की प्रत्येक दिशा में सफलता अर्जित करता है।
  5. गजानन संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, श्रावण माह (अमान्त आषाढ़ माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गजानन संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन किया जाता है। भगवान गणेश की कृपा से इस व्रत को करने वाले प्राणियों के समस्त पापों का शमन हो जाता है।
  6. हेरम्ब संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, भाद्रपद माह (अमान्त श्रावण माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को हेरम्ब संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के निमित्त व्रत एवं उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस व्रत के फलस्वरूप सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है।
  7. विघ्नराज संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, आश्विन माह (अमान्त भाद्रपद माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विघ्नराज संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का विधि-विधान पूर्वक पूजन करने से तथा हल्दी एवं दूब का हवन करने से सम्पूर्ण धरा का साम्राज्य प्राप्त होता है।
  8. वक्रतुण्ड संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, कार्तिक माह (अमान्त आश्विन माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को वक्रतुण्ड संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के वक्रतुण्ड रूप की आराधना की जाती है। इस व्रत के प्रभाव से समस्त मनोरथों की सिद्धि होती है।
  9. गणाधिप संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह (अमान्त कार्तिक माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणाधिप संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के गणाधिप रूप की आराधना की जाती है। यह व्रत समस्त प्रकार के संकटों का नाश करने वाला है।
  10. अखुरथ संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, पौष माह (अमान्त मार्गशीर्ष माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को अखुरथ संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। अखुरथ संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के अखुरथा रूप की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से शत्रु जनित पीड़ा से मुक्ति प्राप्त होती है।
  11. लम्बोदर संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, माघ माह (अमान्त पौष माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को लम्बोदर संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के लम्बोदर रूप की आराधना की जाती है। इस दिन भगवान गणेश की उपासना एवं व्रत करने से सन्तान की प्राप्ति एवं वृद्धि होती है।
  12. द्विजप्रिय संकष्टी व्रत कथा - पूर्णिमान्त हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, फाल्गुन माह (अमान्त माघ माह) की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय रूप की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन श्री गणेश जी का व्रत एवं पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
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द्रिक पञ्चाङ्ग और पण्डितजी लोगो drikpanchang.com के पञ्जीकृत ट्रेडमार्क हैं।
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