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2027 दही हाण्डी | गोपालकाला का दिन लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए

DeepakDeepak

2027 गोपालकाला

लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका
गोपालकाला
25वाँ
अगस्त 2027
Wednesday / बुधवार
दही हाण्डी
Dahi Handi

दही हाण्डी मुहूर्त

दही हाण्डी बुधवार, अगस्त 25, 2027 को
कृष्ण जन्माष्टमी मंगलवार, अगस्त 24, 2027 को
इस्कॉन जन्माष्टमी बुधवार, अगस्त 25, 2027 को
अष्टमी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 24, 2027 को 07:54 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त - अगस्त 25, 2027 को 06:49 बजे

टिप्पणी: सभी समय २४:००+ प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय २४:०० से अधिक हैं और आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

दही हाण्डी 2027

दही-हाण्डी एक प्रसिद्ध खेल प्रतियोगिता है जिसका आयोजन मुख्य रूप से महाराष्ट्र और गोवा में किया जाता है। दही-हाण्डी का आयोजन कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन किया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी गोकुलाष्टमी के नाम से भी प्रसिद्ध है। हाण्डी मिट्टी से बने एक गोल पात्र को कहते हैं। प्राचीन भारत में हाण्डी का उपयोग दूध को रखने व दूध के विभिन्न उत्पादों के निर्माण कार्य में किया जाता था। महाराष्ट्र में दही-हाण्डी उत्सव को गोपालकाला के नाम से भी जाना जाता है।

दही-हाण्डी का उत्सव भगवान कृष्ण की जीवन लीलाओं को प्रतिबिम्बित करता है। भगवान कृष्ण को अपने बालकाल में दही और मक्खन अत्यन्त प्रिय थे। भगवान कृष्ण की आयु के साथ-साथ दही और मक्खन के प्रति उनका प्रेम भी बढ़ता गया। फलस्वरूप वे अपनी तृप्ति के लिये दही और मक्खन को चुराने लगे और माखन-चोर के नाम से प्रसिद्ध हुये।

भगवान कृष्ण व उनके बालसखा अपनी तृप्ति के लिये आस-पड़ोस के घरों में जाकर दही-माखन चोरी करने लगे थे। अतः चोरी के डर से गोपियों ने दही-माखन से भरे पात्र अपने घरों की छत से झूमर की भाँति लटकाना प्रारम्भ कर दिया। गोपियों के इस कृत्य का उद्देश्य भगवान कृष्ण व उनके सखाओं की कम लम्बाई का लाभ उठाने और दही-हाण्डी को बालकों के नन्हें हाथों की पँहुच से दूर रखने का था।

गोपियों के प्रयासों को विफल करने हेतु भगवान कृष्ण ने अपने सखाओं के साथ मानव पर्वत बनाने की योजना बनायी। मानव पर्वत का उपयोग दही से भरी हाण्डी तक पहुँचने के लिये किया गया। भगवान कृष्ण की दही चुराने की यह बाल लीला अब भारतीय लोक कथा का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। प्रति वर्ष जन्माष्टमी के दौरान भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी इस घटना का चित्रण युवाओं द्वारा पूर्ण उत्साह के साथ किया जाता है।

दही-हाण्डी की प्रतियोगिता को अधिक चुनौतीपूर्ण बनाने के लिये हाण्डी को भूमि से कई फीट ऊपर किसी खुले स्थान अथवा चौराहे पर बाँधा जाता है। युवाओं के दही-हाण्डी तक पहुँचने के प्रयासों को, गोपियों के रूप में महिलायें व लड़कियाँ, पानी अथवा कोई चिकना पदार्थ डाल कर विफल करने की कोशिश करती हैं।

मुम्बई में दही-हाण्डी का उत्सव एक प्रतिस्पर्धात्मक खेल के रूप में उभर रहा है। प्रति वर्ष युवाओं की सैकड़ों टोलियाँ दही-हाण्डी प्रतिस्पर्धा में भाग लेती हैं। उत्सव का प्रचार करने के लिये लोकप्रिय हस्तियों को आमन्त्रित किया जाता है। हाल के वर्षों में दही-हाण्डी प्रतियोगिता की पुरुस्कार राशि 1 करोड़ भारतीय रुपयों तक पहुँच चुकी है।

गोविन्दा आला रे! - यह जय-घोष समय के साथ दही-हाण्डी उत्सव की पहचान बन चुका है।

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