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2027 युगादी का दिन लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए

DeepakDeepak

2027 युगादी - कन्नड़ नव वर्ष

लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका
युगादी - कन्नड़ नव वर्ष
7वाँ
अप्रैल 2027
Wednesday / बुधवार
युगादि उत्सव मनाने के लिये एकत्रित परिवारजन
Yugadi Celebration

युगादी का दिन और समय

कन्नड़ शक सम्वत 1949 प्रारम्भ
युगादी बुधवार, अप्रैल 7, 2027 को
पाड्य तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 06, 2027 को 16:50 बजे
पाड्य तिथि समाप्त - अप्रैल 07, 2027 को 15:58 बजे

नव सम्वत मन्त्री मण्डल
👑राजा - बुध
बुधस्य राज्ये धनधान्यसंकुलं महीतलं वृष्टिरनुत्तमा च।
जना विवाहोत्सवयज्ञकाङ्क्षिणः सुभिक्षमस्मिन्बहुवातवृष्टिः॥
बुधदेव के राजा होने पर पृथ्वी धन-धान्य से परिपूर्ण होती है तथा उत्कृष्ट वर्षा होती है। लोग विवाह, उत्सव एवं यज्ञ आदि करने के लिये तत्पर रहते हैं। चारों ओर सुभिक्ष, अर्थात् सुख-समृद्धि रहती है तथा पर्याप्त मात्रा में वायु का प्रवाह एवं वर्षा होती है।
⚜️मन्त्री - मंगल
भौमे प्रधाने क्वचिदेव वृष्टिर्धान्यं महर्घं ज्वलनप्रकोपः।
स्यात्तस्कराणामनयोऽतिघोरः प्रजेश्वरा युद्धविधायिनः स्युः॥
जब भूमिपुत्र मङ्गल मन्त्री होते हैं, तब कहीं-कहीं ही वर्षा होती है, अन्न के मूल्यों में वृद्धि हो जाती है तथा अग्नि का प्रकोप अधिक होता है। चोरों का अत्यन्त भयानक उपद्रव होता है तथा राजा युद्ध करने वाले होते हैं।
⚔️सेनाधिपति - चन्द्र
अथ च दुर्गपतिमृगलांछनो नरवराः सुखिनः शुभशासनात्।
बहुधनेक्षुज गोरसभोगिनो नृपतयो नरगीतपराक्रमाः॥
जब सेनाधिपति चन्द्रदेव होते हैं, तब गणमान्यजनों के मान-सम्मान में वृद्धि होती है। राजनेता उत्तम शासन करते हैं। प्रजा के जीवन स्तर में उन्नति होती है। प्रजा अपने राजा अथवा प्रमुख राजनेता की व्यवस्था से प्रसन्न रहती है। दुग्ध का उत्पादन अधिक मात्रा में होता है।
🌾सस्याधिपति - शुक्र
रोगैर्मुक्ता निर्भयाः सर्वलोकाः पच्यन्ते वा सर्वधान्यानि नूनम्।
वृक्षाः शश्वत्पुष्पिता भूरिवृष्टिः सस्याधीशो यत्र दैत्येन्द्रमन्त्री॥
जब दैत्यगुरु शुक्राचार्य सस्याधिपति होते हैं, तब सभी लोग रोगों से मुक्त एवं निर्भय रहते हैं। निश्चय ही सभी धान्य भली-भाँति परिपक्व होते हैं। वृक्ष सदा पुष्पित रहते हैं तथा वर्षा प्रचुर मात्रा में होती है।
🌻धान्याधिपति - बुध
गोधूमशालीक्षुयवादिकानां विद्वज्जनानामपि वृद्धिरस्ति।
वेद‌श्रुताभ्यासरता द्विजेन्द्रा धान्याधिपो यत्र हिमांशुपुत्रः॥
जब चन्द्रपुत्र बुध धान्याधिपति होते हैं, तब गेहूँ, धान, गन्ना, जौ आदि की वृद्धि होती है। विद्वानों की भी उन्नति होती है तथा श्रेष्ठ द्विज वेद-श्रुति के अभ्यास में लीन रहते हैं।
💰धनाधिपति - गुरु
सुमनसां च गुरुर्द्रविणाधिपोवणिजवृत्तिपराः सुखभाजनाः।
फलित पुष्पित भूमिरुहाः सदा विविधद्रव्ययुता भुवि मानवाः॥
जब देवगुरु बृहस्पति धनाधिपति होते हैं, तब मनुष्य निष्पाप प्रकृति के होते हैं। व्यापारी उत्तम धन-लाभ के कारण आनन्दित रहते हैं। वृक्षों में फल-पुष्प आदि प्रचुर मात्रा में होते हैं। मानवों को धन-सम्पत्ति आदि सहित नाना प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं।
🌧मेघाधिपति - मंगल
वातः प्रचण्डोऽग्निभयं जनानामवृष्टिभीत्याकुलितं च धान्यम्।
व्याधिप्रकोपोपहताश्च सर्वे मेघाधिपो यत्र धरातनूजः॥
जब भूमिपुत्र मङ्गल मेघाधिपति होते हैं, तब प्रचण्ड वेग से वायु चलती है, प्राणियों को अग्नि का भय रहता है, अनावृष्टि के भय से अन्न अल्प मात्रा में होता है। समस्त प्रजा रोग के प्रकोप से पीड़ित होती है।
🍯रसाधिपति - सूर्य
कार्पासतैलेक्षुगुडादिकानां महर्घता शीतभयं जनानाम्।
वापीतडागादिषु तुच्छमम्बु रसाधिनाथो दिनकृद्यदा स्यात्॥
जब सूर्यदेव रसाधिपति होते हैं, तब कपास, तेल, गन्ना, गुड़ आदि वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि होती है। प्रजा को शीत का भय रहता है। तालाबों, सरोवरों एवं बावड़ियों आदि जल स्रोतों में जल बहुत अल्प मात्रा में रह जाता है।
🪙नीरसाधिपति - शुक्र
कपूर्रागरु गन्धानां हेम मौक्तिक वाससाम्।
अर्घवृद्धिः प्रजायेत नीरसेशो भृगुर्यदा॥
जब भृगुपुत्र शुक्र नीरसाधिपति के पद पर प्रतिष्ठित होते हैं, तब कपूर, अगर, तगर आदि अन्य सुगन्धित द्रव्यों एवं वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त स्वर्ण, रजत, मोती एवं वस्त्र आदि के मूल्य भी बढ़ जाते हैं।
🍎फलाधिपति - चन्द्र
यदिविधुः फलपो द्रुमराशयः फलयुता व्रतिभिः कुसुमैर्युताः।
द्विजमुखा वरभोगसमन्विता नृपतयो नयपालनतत्पराः॥
जब चन्द्रदेव फलाधिपति होते हैं, तब वृक्षों एवं बेलों में फल, पुष्प आदि प्रचुर मात्रा में होते हैं। विद्वान, ब्राह्मण एवं शिक्षक वर्ग को भोग एवं धन आदि की प्राप्ति होती है। राजनेता न्यायप्रिय होते हैं तथा जनता का पालन-पोषण करते हैं।

टिप्पणी: सभी समय २४-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

युगादी 2027

कर्णाटक में उगादी पर्व को युगादी के रूप में मनाया जाता है। कर्णाटक के हिन्दु धर्मानुयायियों के लिये यह एक अत्यधिक महत्त्वपूर्ण दिवस है। इस दिन कन्नड़ कैलेण्डर में नवीन संवत्सर आरम्भ होता है, जो साठ वर्षों का एक चक्र होता है। सभी साठ संवत्सर अपने एक विशेष नाम से जाने जाते हैं। कन्नड़ कृषि परम्परा के अनुसार भी युगादी विशेष पर्व माना जाता है। आन्ध्र प्रदेश तथा तेलंगाना आदि अन्य दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में युगादी को उगादी के नाम से मनाया जाता है।

कर्णाटक में युगादी का पर्व अत्यन्त हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस अवसर पर मुख्य द्वारा पर रंगोली बनायी जाती है, जिसे मुग्गुलु कहा जाता है। द्वारों एवं मन्दिर में आम के पत्तों के तोरण लटकाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त पचड़ी नामक एक विशेष व्यञ्जन तैयार किया जाता है, जिसमें मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, कसैला तथा तीखा सभी स्वादों का मिश्रण होता है।

महाराष्ट्र के लोगों द्वारा युगादी उत्सव को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। युगादी तथा गुड़ी पड़वा दोनों पर्व एक ही दिन मनाये जाते हैं।

चन्द्र-सौर कैलेण्डर के अनुसार, युगादी को नववर्ष माना जाता है। चन्द्र-सौर कैलेण्डर, चन्द्रमा की स्थिति तथा सूर्य की स्थिति को आधार मान कर वर्ष को माह एवं दिवस में विभाजित करता है। चन्द्र-सौर कैलेण्डर के समकक्ष एक अन्य कैलेण्डर है, जिसे सौर कैलेण्डर के नाम से जाना जाता है। सौर कैलेण्डर, वर्ष को माह एवं दिवस में विभाजित करने हेतु मात्र सूर्य की स्थिति को ही आधार मानता है। यही कारण है कि, हिन्दु नववर्ष को दो भिन्न-भिन्न नामों से तथा वर्ष के दो भिन्न-भिन्न समय पर मनाया जाता है। सौर कैलेण्डर पर आधारित हिन्दु नववर्ष को तमिलनाडु में पुथन्डु, असम में बिहू, पंजाब में वैसाखी, उड़ीसा में पणा संक्रान्ति तथा पश्चिम बंगाल में नब बरस के नाम से जाना जाता है।

युगादी उत्सव के दिन का आरम्भ अनुष्ठानिक तेल-स्नान से होता है, जिसके पश्चात प्रार्थना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, तेल-स्नान तथा नीम के पत्तों का सेवन करना एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अनुष्ठान है। उत्तर भारतीय भक्तगण, युगादी उत्सव नहीं मनाते हैं, किन्तु वह इस दिन से नौ दिवसीय चैत्र नवरात्रि पूजन आरम्भ करते हैं, जिसके प्रथम दिवस पर मिश्री के साथ नीम का सेवन किया जाता है।

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