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-2026 वरदा चतुर्थी उपवास का दिन लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिये

DeepakDeepak

-2026 वरदा चतुर्थी

Location
लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका
वरदा चतुर्थी
25वाँ
जून -2026
Monday / सोमवार
वरदा विनायक चतुर्थी
Vinayaka Chaturthi

वरदा चतुर्थी का समय

वरदा चतुर्थी सोमवार, जून 25, -2026 को
चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त - 10:26 ए एम से 01:20 पी एम
अवधि - 02 घण्टे 55 मिनट्स
एक दिन पूर्व, वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 07:36 पी एम से 09:00 पी एम, जून 24
अवधि - 01 घण्टा 24 मिनट्स
वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 08:22 ए एम से 09:40 पी एम
अवधि - 13 घण्टे 18 मिनट्स
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - जून 24, -2026 को 07:36 पी एम बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - जून 25, -2026 को 05:12 पी एम बजे

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

-2026 वरदा चतुर्थी

हिन्दु धर्मशास्त्रों में समय की गणना बारह मासों पर आधारित मानी गयी है, किन्तु जब सौर वर्ष एवं चन्द्र वर्ष में अन्तर होता है तो उस अन्तर को समायोजित करने के लिये एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है जिसे अधिक मास, मलमास अथवा पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह मास हिन्दु कैलेण्डर में लगभग प्रत्येक तीन वर्ष में आता है। अधिक मास में प्रत्येक तिथि का अपना विशेष महत्त्व है तथा शास्त्रों में इस मास की प्रत्येक तिथि का पालन पुण्यदायी माना गया है। इस मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भी विशेष महत्त्व प्राप्त है। मुद्गलपुराण में अधिक मास की शुक्ल चतुर्थी को वरदा चतुर्थी के रूप में वर्णित किया गया है।

भविष्यपुराण तथा गणेशपुराण आदि धर्मग्रन्थों के आधार पर वर्णित किया गया है कि जिस प्रकार सामान्य मासों में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विघ्नविनाशक भगवान गणेश का पूजन होता है, उसी प्रकार अधिक मास की चतुर्थी को भी गणेश पूजन का विधान है। अधिक मास में किये गये विधिवत् गणेश पूजन का फल सामान्य दिनों में किये गये पूजन की तुलना में अनन्त गुणा होता है। गणेशपुराण में कहा गया है कि मलमास में किये गये व्रत, दान तथा जप विशेष फलदायी होते हैं, क्योंकि इस मास को भगवान विष्णु ने अपना स्वरूप माना है। इसीलिये इस मास की चतुर्थी पर जब गणपति पूजन होता है तो वह विष्णु जी के पुरुषोत्तम स्वरूप के साथ संयुक्त होकर फल प्रदान करता है।

भविष्यपुराण में उल्लेख है कि अधिक मास में की गयी वरदा विनायक चतुर्थी व्रत की पूजा से सामान्य बारह मासों की चतुर्थी से भी अधिक पुण्य प्राप्त होता है। इस व्रत का श्रद्धापूर्वक पालन करने वाला मनुष्य समस्त विघ्नों से मुक्त होकर धन, सन्तति, यश तथा दीर्घायु को प्राप्त करता है। इसके अतिरिक्त वरदा चतुर्थी व्रत करने से पितृगणों एवं देवताओं की तृप्ति भी होती है।

धर्मशास्त्रों ने यह भी कहा है कि मलमास की चतुर्थी व्रत का पालन करने से व्यक्ति के पूर्वजन्म के दोष एवं वर्तमान जीवन के विघ्न दूर होते हैं। इस मास को "अतिशय पुण्यप्रद मास" कहा गया है, इसीलिये इसमें किया गया गणपति व्रत सहस्र गुणा पुण्यदायी होता है। अतः अधिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का गणपति व्रत न केवल विघ्ननाशक है, अपितु पुरुषोत्तम विष्णु के संयोग से मोक्ष-प्रदायी भी है। यह व्रत साधक के लौकिक एवं पारलौकिक, दोनों प्रकार के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

वरदा विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि

अधिक मास की शुक्ल चतुर्थी के दिन व्रत करने की सरल विधि वर्णित की गयी है। हालाँकि क्षेत्रीय एवं कुल परम्परा के आधार पर पूजन विधि में कुछ भेद हो सकता है।

  • सर्वप्रथम प्रातःकाल स्नानादि कर स्वच्छ एवं शुद्ध वस्त्र धारण करें तथा व्रत का सङ्कल्प ग्रहण करें।
  • घर के देवस्थान में अथवा गणेश मन्दिर में एक लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणपति की मूर्ति अथवा चित्र की स्थापना करें।
  • तदुपरान्त आवाहन, आसन, अर्घ्य, पाद्य, स्नान, वस्त्र, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा तथा आरती आदि सहित षोडशोपचार गणेश पूजन करें।
  • गणेश जी को लाल पुष्प तथा सिन्दूर अवश्य अर्पित करें।
  • गणपति जी को विशेष रूप से दूर्वा, शुद्ध घी, मोदक तथा लड्डू का नैवेद्य अर्पित करें।
  • पूर्ण दिवस उपवास करने के उपरान्त सायंकाल अधिक मास शुक्ल चतुर्थी व्रत कथा का श्रवण अथवा पाठ करें।
  • मुद्गलपुराण के अनुसार पञ्चमी तिथि को ब्राह्मण के समक्ष विधिवत् व्रत का पारण करें।

इस प्रकार अधिक मास में शुक्ल चतुर्थी व्रत की पूजा विधि सम्पन्न होती है। यह व्रत साधक को आत्मबल, मनोबल तथा आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करता है। इस प्रकार यह व्रत शास्त्रीय दृष्टि से प्रमाणित एवं आध्यात्मिक रूप से अत्यन्त प्रभावशाली है, जो भक्तों को समस्त प्रकार की समस्याओं से मुक्त कर उन्हें सुख, शान्ति एवं समृद्धि प्रदान करता है।

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द्रिक पञ्चाङ्ग और पण्डितजी लोगो drikpanchang.com के पञ्जीकृत ट्रेडमार्क हैं।
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