




दीवाली के त्यौहार से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण एवं रोचक विवरण प्रदान किया गया है। दीवाली अन्धकार पर प्रकाश एवं अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह हिन्दु धर्मावलम्बियों द्वारा मनाया जाने वाला सर्वाधिक लोकप्रिय उत्सव है जो पाँच दिवस तक चलता है।

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के भक्तों के लिये सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण उत्सवों में इसे एक है। हिन्दु मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव एवं देवी पार्वती का अलौकिक विवाह सम्पन्न हुआ था। इस दिन भगवान शिव एवं देवी पार्वती के निमित्त व्रत एवं पूजन किया जाता है।

होलिका दहन को होलिका पूजा एवं छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। होली के रंगोत्सव की पूर्वरात्रि को, अर्थात् होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन की रात्रि को तन्त्र प्रयोग एवं मन्त्र सिद्धि आदि अनुष्ठान सम्पन्न करने हेतु भी विशेष फलदायक माना जाता है।

वसन्त पञ्चमी, अर्थात् देवी सरस्वती की जयन्ती के पावन पर्व का सङ्क्षिप्त एवं बिन्दुवार वर्णन किया गया है। यह पर्व देवी सरस्वती को समर्पित है, जो हिन्दु धर्म में विद्या, ज्ञान, कला तथा बुद्धि की देवी के रूप में पूजी जाती हैं। वसन्त पञ्चमी के दिन देवी सरस्वती की आराधना करने से विद्या एवं ज्ञान आदि की प्राप्ति होती है।

रक्षा बन्धन के त्यौहार से सम्बन्धित सङ्क्षिप्त वर्णन प्रदान किया गया है। इस लेख के माध्यम से आप रक्षा बन्धन के विषय में महत्त्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक तथ्य ज्ञात कर सकते हैं। रक्षा बन्धन भाई-बहन के पवित्र सम्बन्ध पर आधारित एक अत्यन्त प्रचलित हिन्दु त्यौहार है।

हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष दशमी को दशहरा उत्सव मनाया जाता है। दशहरा उत्सव को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व नवरात्रि के 9 दिवसीय एवं दुर्गा पूजा के तीन दिवसीय उत्सव के समापन को भी दर्शाता है।
हिन्दु धर्म में भगवान कृष्ण के जन्म की वर्षगाँठ को कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव के रूप में मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी को गोकुलाष्टमी, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव अथवा जन्माष्टमी आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण हिन्दु धर्म में पूजे जाने वाले सर्वाधिक लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं।

हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी के नाम से मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का यह पावन पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। प्रस्तुत लेख में गणेश चतुर्थी से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण विवरण प्रदान किया गया है।

मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रान्ति के दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। संक्रान्ति के दिन सूर्यदेव की पूजा-अर्चना सहित विभिन्न प्रकार के दान, यज्ञ तथा व्रत आदि सत्कर्म किये जाते हैं। वर्ष में बारह संक्रान्तियाँ होती हैं, किन्तु मकर संक्रान्ति इनमें से सर्वाधिक प्रचलित एवं महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।

दुर्गा पूजा उत्सव से सम्बन्धित बिन्दुवार विवरण प्रदान किया गया है। आश्विन शुक्ल षष्ठी से लेकर आश्विन शुक्ल दशमी तिथि तक मनाया जाने वाला यह उत्सव देवी दुर्गा की आराधना को समर्पित है। पश्चिम बंगाल, असम एवं त्रिपुरा आदि क्षेत्रों में दुर्गा पूजा उत्सव अत्यन्त हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में मनाये जाने वाले नवरात्रि उत्सव का बिन्दुवार वर्णन किया गया है। इस नवरात्रि उत्सव को शारदीय नवरात्रि अथवा महा नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि उत्सव के दौरान देवी दुर्गा के नौ भिन्न-भिन्न रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।

करवा चौथ हिन्दु धर्म में मनाये जाने वाले सर्वाधिक लोकप्रिय त्यौहारों में से एक है। यह पर्व मुख्यतः उत्तर भारत में अधिक प्रचलित है। करवा चौथ के दिन सौभाग्यवती स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु की कमाना से निर्जला उपवास करती हैं। इस त्यौहार के विषय में अधिक ज्ञात करने हेतु विस्तृत लेख पढ़ें।
राम नवमी के पावन उत्सव से सम्बन्धित विशेष विवरण प्रदान किया गया है। हिन्दु धर्मग्रन्थों के अनुसार चैत्र शुक्ल नवमी के दिन भगवान श्रीराम प्रकट हुये थे। इसीलिये भगवान राम के प्राकट्योत्सव को राम नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन राम जी के निमित्त विशेष पूजन एवं व्रत किया जाता है।

गुड़ी पड़वा के विषय में बिन्दुवार विवरण प्रदान किया गया है। गुड़ी पड़वा को मराठी नव वर्ष के रूप में जाना जाता है। यह पर्व चैत्र माह के प्रथम दिवस पर मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा को संवत्सर पाडवो भी कहा जाता है। कर्णाटक एवं आन्ध्र प्रदेश में यह पर्व क्रमशः उगादी एवं युगादी के रूप में मनाया जाता है।

उगादी से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण विवरण प्रदान किया गया है। तेलुगु कैलेण्डर में उगादी का त्यौहार नव वर्ष के आगमन का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व चैत्र माह के प्रथम दिवस पर मनाया जाता है। महाराष्ट्र एवं कर्णाटक में यही त्यौहार क्रमशः गुड़ी पड़वा एवं युगादी के रूप में मनाया जाता है।

हनुमान जयन्ती से सम्बन्धित विशेष तथ्यों का वर्णन किया गया है। हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हनुमान जयन्ती के नाम से प्रचलित है। इस दिन हनुमान जी के भक्त पूजन, हवन एवं व्रत आदि अनुष्ठान करते हैं।

अक्षय तृतीया के विषय में बिन्दुवार वर्णन किया गया है। यह पर्व वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन मनाया जाता है। हिन्दु धर्मग्रन्थों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सत्ययुग का समापन एवं त्रेतायुग का आरम्भ हुआ था। अतः अक्षय तृतीया एक युगादी तिथि है, जिसे हिन्दु धर्म में अत्यन्त पुण्यदायक माना जाता है।


