devotionally made & hosted in India
Search
Mic
Android Play StoreIOS App Store
Ads Subscription Disabled
हि
Setting
Clock
Ads Subscription Disabledविज्ञापन हटायें
X

निर्वाण षट्कम् | आत्मषट्कम् - संस्कृत गीतिकाव्य एवं वीडियो गीत

DeepakDeepak

निर्वाण षट्कम्

निर्वाणषट्कम् को आत्मषट्कम् के नाम से भी जाना जाता है। निर्वाणषट्कम् आदि शङ्कराचार्य द्वारा रचित 6 श्लोकों से युक्त एक रचना है। यह षट्कम् अद्वैत वेदान्त के मूलभूत सिद्धान्तों पर आधारित है। निर्वाणषट्कम् की रचना लगभग 788-820 ई. में की गयी थी। मान्यताओं के अनुसार गुरु आदि शङ्कराचार्य अपनी आठ वर्ष की बाल्यावस्था में नर्मदा नदी के तट पर अपने गुरु को खोज रहे थे। उसी समय तट पर उनकि भेंट द्रष्टा गोविन्द भगवत्पाद से हुयी।

द्रष्टा गोविन्द भगवत्पाद ने आदि शङ्कराचार्य से पूछा, "आप कौन हैं?" बाल्यरूप में आदि शङ्कराचार्य जी ने छः श्लोकों के द्वारा उन्हें उत्तर दिया। इन्हीं छः श्लोकों को "निर्वाणषट्कम्" अथवा "आत्मषट्कम्" के रूप में जाना जाता है। स्वामी गोविन्दपाद ने बालक आदि गुरु शङ्कराचार्य के मुख से उन दिव्य श्लोकों का श्रवण करते ही उन्हें अपने शिष्य के रूप में स्वीकार कर लिया था।

॥ निर्वाणषट्कम् ॥

मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहंन च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे।

न च व्योमभूमिर्न तेजो नवायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥1॥

न च प्राणसंज्ञो न वै पञ्चवायुर्नवा सप्तधातुर्न वा पञ्चकोषाः।

न वाक्पाणिपादं न चोपस्थपायूचिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥2॥

न मे द्वेषरागौ न मे लोभमोहौमदो नैव मे नैव मात्सर्यभावः।

न धर्मो न चार्थो न कामो नमोक्षश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥3॥

न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखंन मन्त्रो न तीर्थं न वेदा न यज्ञाः।

अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ताचिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥4॥

न मृत्युर्न शङ्का न मे जातिभेदःपिता नैव मे नैव माता न जन्म।

न बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैवशिष्यश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥5॥

अहं निर्विकल्पो निराकाररूपोविभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम्।

न चासङ्गतं नैव मुक्तिर्नमेयश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥6॥

॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं आत्मषट्कं सम्पूर्णम् ॥
Name
Name
Email
द्रिकपञ्चाङ्ग पर टिप्पणी दर्ज करने के लिये गूगल अकाउंट से लॉग इन करें।
टिप्पणी
और लोड करें ↓
Kalash
कॉपीराइट नोटिस
PanditJi Logo
सभी छवियाँ और डेटा - कॉपीराइट
Ⓒ www.drikpanchang.com
प्राइवेसी पॉलिसी
द्रिक पञ्चाङ्ग और पण्डितजी लोगो drikpanchang.com के पञ्जीकृत ट्रेडमार्क हैं।
Android Play StoreIOS App Store
Drikpanchang Donation