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शिव रक्षा स्तोत्रम् - वीडियो गीत और संस्कृत गीतिकाव्य

DeepakDeepak

शिव रक्षा स्तोत्रम्

श्री शिव रक्षा स्तोत्रम् भगवान शिव का अत्यन्त शक्तिशाली स्तोत्र है जिसका पाठ शिव जी को प्रसन्न करने हेतु किया जाता है। इस स्तोत्र में भगवान शिव के सुन्दर स्वरूप का वर्णन करते हुये, उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। भगवान शिव सदैव अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। श्री शिव रक्षा स्तोत्रम् के याज्ञवल्क्य ऋषि, अनुष्टुप छन्द तथा भगवान श्री सदाशिव देवता हैं। इस स्तोत्र का नियम पूर्वक पाठ करने से भगवान शिव का विशेष अनुग्रह प्राप्त होता है। घोर सङ्कटों से रक्षा हेतु श्री शिव रक्षा स्तोत्रम् का पाठ करने का सुझाव दिया जाता है।

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॥ श्रीशिवरक्षास्तोत्रम् ॥

॥ विनियोग ॥

श्री गणेशाय नमः॥

अस्य श्रीशिवरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य याज्ञवल्क्य ऋषिः॥

श्री सदाशिवो देवता॥ अनुष्टुप् छन्दः॥

श्रीसदाशिवप्रीत्यर्थं शिवरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः॥

॥ स्तोत्र पाठ ॥

चरितं देवदेवस्य महादेवस्य पावनम्।

अपारं परमोदारं चतुर्वर्गस्य साधनम्॥1॥

गौरीविनायकोपेतं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रकम्।

शिवं ध्यात्वा दशभुजं शिवरक्षां पठेन्नरः॥2॥

गंगाधरः शिरः पातु भालं अर्धेन्दुशेखरः।

नयने मदनध्वंसी कर्णो सर्पविभूषण॥3॥

घ्राणं पातु पुरारातिः मुखं पातु जगत्पतिः।

जिह्वां वागीश्वरः पातु कंधरां शितिकंधरः॥4॥

श्रीकण्ठः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ विश्वधुरन्धरः।

भुजौ भूभारसंहर्ता करौ पातु पिनाकधृक्॥5॥

हृदयं शंकरः पातु जठरं गिरिजापतिः।

नाभिं मृत्युञ्जयः पातु कटी व्याघ्राजिनाम्बरः॥6॥

सक्थिनी पातु दीनार्तशरणागतवत्सलः।

उरू महेश्वरः पातु जानुनी जगदीश्वरः॥7॥

जङ्घे पातु जगत्कर्ता गुल्फौ पातु गणाधिपः।

चरणौ करुणासिन्धुः सर्वाङ्गानि सदाशिवः॥8॥

एतां शिवबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्।

स भुक्त्वा सकलान्कामान् शिवसायुज्यमाप्नुयात्॥9॥

ग्रहभूतपिशाचाद्यास्त्रैलोक्ये विचरन्ति ये।

दूरादाशु पलायन्ते शिवनामाभिरक्षणात्॥10॥

अभयङ्करनामेदं कवचं पार्वतीपतेः।

भक्त्या बिभर्ति यः कण्ठे तस्य वश्यं जगत्त्रयम्॥11॥

इमां नारायणः स्वप्ने शिवरक्षां यथाऽऽदिशत्।

प्रातरुत्थाय योगीन्द्रो याज्ञवल्क्यः तथाऽलिखत॥12॥

॥ इति श्रीयाज्ञवल्क्यप्रोक्तं शिवरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
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