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-7997 कर्क संक्रान्ति पुण्य काल समय लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिये

DeepakDeepak

-7997 कर्क संक्रान्ति

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-7997
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लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका
कर्क संक्रान्ति
25वाँ
फरवरी -7997
Sunday / रविवार
दक्षिण दिशा की यात्रा आरम्भ करते भगवान सूर्य
Karka Sankranti

कर्क संक्रान्ति पुण्य काल मुहूर्त

कर्क संक्रान्ति रविवार, फरवरी 25, -7997 को
कर्क संक्रान्ति पुण्य काल - 12:01 से 17:39
अवधि - 05 घण्टे 38 मिनट्स
कर्क संक्रान्ति महा पुण्य काल - 15:46 से 17:39
अवधि - 01 घण्टा 53 मिनट्स
कर्क संक्रान्ति का क्षण - 26:50+
कर्क संक्रान्ति फलम्

कर्क संक्रान्ति फलम्

  • छोटे (निम्न) कार्यों में शामिल लोगों के लिए यह संक्रान्ति अच्छी है।
  • वस्तुओं की लागत सामान्य होगी।
  • भय और चिन्ता लाती है।
  • लोग खांसी और ठण्ड से पीड़ित होंगे, राष्ट्रों के बीच संघर्ष होगा और बारिश के अभाव में अकाल की सम्भावना बनेगी।
कर्क संक्रान्ति मुहूर्त

कर्क संक्रान्ति मुहूर्त

संक्रान्ति करण: बव
संक्रान्ति दिन: Tuesday / मंगलवार
संक्रान्ति अवलोकन दिनाँक: फरवरी 25, -7997
संक्रान्ति गोचर दिनाँक: फरवरी 26, -7997
संक्रान्ति का समय: फरवरी 26 को 02:50 बजे
संक्रान्ति घटी: 51 (रात्रिमान)
संक्रान्ति चन्द्रराशि: सिंह Simha
संक्रान्ति नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी (उग्र संज्ञक) Purva Phalguni
बव करण संक्रान्ति के साथ वाहन सिंह पर सवार
Sankranti Phalam

संक्रान्ति गुण
फलम् संकेत
नाम
महोदर
वार मुख
दक्षिण
दृष्टि
वायव्य
गमन
पश्चिम
वाहन
सिंह
उपवाहन
गज
वस्त्र
श्वेत
आयुध
भुशुण्डी
भक्ष्य पदार्थ
अन्न
गन्ध द्रव्य
कस्तूरी
वर्ण
देवता
पुष्प
नाग्केश्वर
वय
शिशु
अवस्था
पन्थ्
करण मुख
पूर्व
स्थिति
बैठी
भोजन पात्र
सुवर्ण
आभूषण
नुपुर
कन्चुकी
विचित्र

टिप्पणी: सभी समय २४:००+ प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय २४:०० से अधिक हैं और आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

-7997 कर्क संक्रान्ति

कर्क संक्रान्ति, भगवान सूर्य की दक्षिण दिशा की यात्रा के आरम्भ को दर्शाती है। कर्क संक्रान्ति से ही छह माह की अवधि वाला दक्षिणायन प्रारम्भ होता है। कर्क संक्रान्ति, मकर संक्रान्ति की भाँति ही एक महत्त्वपूर्ण पर्व है तथा इस दिन को दान-पुण्य आदि धार्मिक कार्यों हेतु विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण माना जाता है। कर्क संक्रान्ति को श्रावण संक्रान्ति के नाम से भी जाना जाता है। धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि संक्रान्ति के दिन किया गया दान, जप एवं स्नान अक्षय फल प्रदान करता है। कर्क संक्रान्ति से सूर्य जलतत्त्व प्रधान राशि में प्रवेश करते हैं, अतः वर्षा ऋतु का भी शुभारम्भ माना जाता है।

कर्क संक्रान्ति एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण खगोलीय घटना है तथा इस दिन सूर्य नारायण उत्तरायण से दक्षिणायण की ओर गमन करते हैं। अतः सूर्य के कर्क रेखा को पार करने के साथ दक्षिण दिशा की ओर उनका गमन प्रारम्भ हो जाता है। यह दिन दक्षिणायन के आरम्भ का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण इसे दक्षिणायन संक्रान्ति भी कहा जाता है। दक्षिणायन को पितृकार्य के लिये विशेष अनुकूल माना गया है। कर्क संक्रान्ति को वर्षा ऋतु के आगमन का सूचक भी माना जाता है। इस दिन से देवताओं की रात्रि प्रारम्भ हो जाती है तथा चातुर्मास अथवा चौमासा कर्क संक्रान्ति से आरम्भ हो जाता है।

कर्क संक्रान्ति में संक्रान्ति क्षण से पूर्व की 30 घटी तक का समय कर्क संक्रान्ति से सम्बन्धित धार्मिक गतिविधियों एवं अनुष्ठानों हेतु सर्वोत्तम माना जाता है। यदि 1 घटी की अवधि 24 मिनट मानी जाये, तो 30 घटी की अवधि, भारतीय भौगोलिक स्थिति के लिये लगभग 12 घण्टे की समयावधि होती है। 30 घटी की यह समयावधि पुण्यकाल के नाम से जानी जाती है।

संक्रान्ति के अवसर पर की जाने वाली विभिन्न क्रियायें, जैसे पवित्र स्नान करना, भगवान सूर्य को नैवेद्य अर्पण करना, दान-दक्षिणा देना, श्राद्ध कर्म करना तथा व्रत का पारण करना, पुण्यकाल के समय ही की जानी चाहिये। कर्क संक्रान्ति में तिल, गुड़, वस्त्र, अन्न, छाता तथा दक्षिणा सहित ब्राह्मण भोज करवाना उत्तम माना जाता है।

दक्षिणायन के दौरान चातुर्मास में भक्तगण भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने हेतु उनकी आराधना करते हैं। अपने पूर्वजों के निमित्त पितृ तर्पण करने के इच्छुक व्यक्ति कर्क संक्रान्ति के अवसर पर तर्पण आदि कर सकते हैं। कर्क संक्रान्ति पर पूजा एवं उपवास का मुख्य कारण जीवन की सभी नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति पाना है। कर्क संक्रान्ति पर भगवान विष्णु के वराहस्वामी रूप की पूजा की जाती है। श्रावण से कार्तिक मास तक चलने वाला चातुर्मास दक्षिणायन के दौरान पड़ता है। चातुर्मास अनेक उत्सवों का समय होता है। इस समयावधि में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है।

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