
टिप्पणी: सभी समय २४-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।
हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार अधिक मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली द्वादशी तिथि को अधिक शुक्ल द्वादशी कहा है। अधिक मास को हिन्दु कैलेण्डर में एक अतिरिक्त चन्द्र मास के रूप में जाना जाता है। अधिक मास को मल मास, पुरुषोत्तम मास तथा लोंद मास आदि भी कहा जाता है। हिन्दु कैलेण्डर में अधिक मास लगभग प्रत्येक तीन वर्ष में आता है। यह मास भगवान विष्णु को अत्यन्त प्रिय है।
भगवान विष्णु के विभिन्न नामों में से एक नाम पुरुषोत्तम भी है। अतः भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। पुरुषोत्तम मास में किये गये द्वादशी व्रत को अन्य व्रतों की तुलना में श्रेष्ठ एवं उत्तम फल प्रदान करने वाला माना जाता है।
हिन्दु मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश तथा नवीन वस्तुयें क्रय करना आदि सहित अन्य सभी शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं। किन्तु अधिक मास को धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यों जैसे जप-तप, दान आदि के लिये अत्यन्त पुण्यदायी माना जाता है।
द्वादशी तिथि एवं पुरुषोत्तम मास दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित हैं जिसके कारण इस तिथि में किया गया व्रत अप्रत्याशित पुण्यफल प्रदान करता है। इस व्रत को निष्ठापूर्वक करने से भगवान विष्णु की कृपा से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।