

















टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

हिन्दु कैलेण्डर में श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिये पूरे महीने को शुभ माना जाता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु भक्तगण श्रावण मास के दौरान भिन्न-भिन्न व्रत रखते हैं।
श्रावण मास को उत्तर भारतीय राज्यों में सावन माह के रूप में भी जाना जाता है। श्रावण मास के दौरान पड़ने वाले सभी सोमवार, व्रत के लिये अत्यन्त शुभ माने जाते हैं और श्रावण सोमवार या सावन सोमवार व्रत के रूप में जाने जाते हैं। अनेक भक्त सावन महीने के प्रथम सोमवार से सोलह सोमवार या सोलह सोमवारी उपवास भी करते हैं।
श्रावण मास में सभी मंगलवार, भगवान शिव की अर्धांगिनी, देवी पार्वती को समर्पित हैं। श्रावण मास के दौरान मंगलवार का उपवास, मंगला गौरी व्रत के रूप में जाना जाता है। सावन शिवरात्रि और हरियाली अमावस्या श्रावण मास के दौरान अन्य शुभ दिन हैं।
क्षेत्रों के आधार पर, श्रावण मास के प्रारम्भिक समय में पन्द्रह दिनों का अन्तर हो सकता है। पूर्णिमान्त कैलेण्डर में, जो कि सामान्यतः उत्तर भारतीय राज्यों में प्रचलित है, श्रावण माह अमान्त कैलेण्डर से पन्द्रह दिन पूर्व प्रारम्भ होता है।
आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्णाटक और तमिल नाडु में, अमान्त चन्द्र कैलेण्डर का पालन किया जाता है, जबकि उत्तर भारतीय राज्यों जैसे, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखण्ड में पूर्णिमान्त चन्द्र कैलेण्डर का पालन किया जाता है। इसीलिये सावन सोमवार की आधी तिथियाँ दोनों कैलेण्डर में भिन्न-भिन्न होती हैं।
नेपाल, उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों में, सावन सोमवार को सौर कैलेण्डर के अनुसार मनाया जाता है। इसीलिये, इन क्षेत्रों में सावन सोमवार के दिन अमान्त और पूर्णिमान्त दोनों कैलेण्डर से भिन्न हो सकते हैं।