

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में नई दिल्ली, भारत के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।
हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को चण्डिका जयन्ती मनायी जाती है। चण्डिका जयन्ती का पर्व देवी चण्डिका के प्राकट्य की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाता है। देवी माँ के भक्तों के मध्य चण्डिका जयन्ती को एक अत्यन्त दिव्य एवं विशेष तिथि माना जाता है। चण्डिका जयन्ती के दिन किया गया जप, हवन तथा ध्यान सहस्र गुणा फलदायी होता है। इस दिन देवी माँ का स्मरण करते हुये देवी माहात्म्य का पाठ करने से विशेष पुण्य लाभ प्राप्त होता है तथा देवी माँ प्रसन्न होती हैं।
देवी चण्डिका हिन्दु धर्मग्रन्थों में वर्णित द्वादश सिद्धिविद्या देवियों में से एक हैं। शाक्त एवं कौल सम्प्रदाय में देवी चण्डिका की उपासना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। देवी चण्डिका को ब्रह्माण्ड की रक्षा, सन्तुलन तथा धर्मस्थापना का प्रतीक माना जाता है।
विद्वानों के अनुसार भगवान ब्रह्मा की सृजन शक्ति, भगवान विष्णु की पालन शक्ति तथा भगवान शिव की संहार शक्ति के रूप में साक्षात् देवी चण्डिका ही विद्यमान हैं। धर्म का ह्रास तथा अधर्म का प्रसार होने पर देवी चण्डिका धर्म की स्थापना हेतु प्रकट होती हैं।
द्वादशासु विद्यासु चण्डिका सिद्धिदायिनी।
भयार्तानां भयानाशा सर्वसिद्धिप्रदायिनी॥
अर्थात् द्वादश सिद्धिविद्याओं में देवी चण्डिका भय को नष्ट करने वाली देवी हैं तथा वे साधक को समस्त प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करती हैं। अतः उत्तम फलों की प्राप्ति हेतु मनुष्य को श्रद्धापूर्वक देवी चण्डिका की आराधना करनी चाहिये।