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मलयालम दैनिक पञ्चाङ्गम् | दैनिक कैलेण्डर नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, भारत के लिये

DeepakDeepak

अक्टूबर 22, 2026

Tithi Icon
05, थुलम
शुक्ल पक्ष, एकादशी
1202 कोल्लवर्षम् / कोल्लम युग
नई दिल्ली, भारत
22
अक्टूबर 2026
बृहस्पतिवार

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय

06:26 ए एम
Sunrise
05:45 पी एम
Sunset
03:25 पी एमMoonrise
03:17 ए एम, अक्टूबर 23Moonset

पञ्चाङ्गम्

तिथि
एकादशी - 02:47 पी एम तक
Shukla Ekadashi
शतभिषा - 08:49 पी एम तक
Shatabhisha
योग
वृद्धि - 11:40 पी एम तक
ⓘ
करण
विष्टि - 02:47 पी एम तक
ⓘ
बव - 02:47 ए एम, अक्टूबर 23 तक
ⓘ
वार
गुरुवार
ⓘ
बालव
ⓘ
पक्ष
शुक्ल पक्षShukla Paksha
 
 

चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर

विक्रम सम्वत
2083 सिद्धार्थी
ⓘ
बृहस्पति संवत्सर
सिद्धार्थी - 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
ⓘ
शक सम्वत
1948 पराभव
ⓘ
रौद्र
ⓘ
गुजराती सम्वत
2082 पिङ्गल
ⓘ
चन्द्रमास
आश्विन - पूर्णिमान्त
ⓘ
प्रविष्टे/गते
6
ⓘ
आश्विन - अमान्त
ⓘ

विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल

राजा
गुरु
👑
- शासन व्यवस्था के स्वामी
सेनाधिपति
चन्द्र
⚔️
- रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्री
मंगल
⚜️
- नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी
धान्याधिपति
बुध
🌻
- रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपति
गुरु
🌾
- खरीफ की फसलों के स्वामी
मेघाधिपति
चन्द्र
🌧
- वर्षा एवं मेघ के स्वामी
धनाधिपति
गुरु
💰
- धन एवं कोष के स्वामी
नीरसाधिपति
गुरु
🪙
- धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपति
शनि
🍯
- रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी
फलाधिपति
चन्द्र
🍎
- फल-पुष्पादि के स्वामी

राशि एवं नक्षत्रम्

कुम्भ
Kumbha
नक्षत्रम पद
शतभिषा - 08:24 ए एम तकSecond Nakshatra Pada
तुला
Tula
शतभिषा - 02:38 पी एम तकThird Nakshatra Pada
सूर्य नक्षत्रम
चित्राChitra
शतभिषा - 08:49 पी एम तकFourth Nakshatra Pada
सूर्य नक्षत्रम पद
चित्राFourth Nakshatra Pada
पूर्व भाद्रपद - 02:56 ए एम, अक्टूबर 23 तकFirst Nakshatra Pada
 
 
पूर्व भाद्रपदSecond Nakshatra Pada

ऋतु तथा अयन

द्रिक ऋतु
शरदSharad
दिनमान
11 घण्टे 18 मिनट्स 37 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतु
शरदSharad
रात्रिमान
12 घण्टे 42 मिनट्स 01 सेकण्ड
द्रिक अयन
दक्षिणायण
मध्याह्न
12:05 पी एम
वैदिक अयन
दक्षिणायण
 
 

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 ए एम से 05:35 ए एम
प्रातः सन्ध्या
05:10 ए एम से 06:26 ए एम
11:43 ए एम से 12:28 पी एम
विजय मुहूर्त
01:58 पी एम से 02:44 पी एम
गोधूलि मुहूर्त
05:45 पी एम से 06:10 पी एम
सायाह्न सन्ध्या
05:45 पी एम से 07:01 पी एम
अमृत काल
01:18 पी एम से 02:58 पी एम
निशिता मुहूर्त
11:40 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 23

अशुभ समय

01:30 पी एम से 02:55 पी एमRahu Kalam
यमगण्ड
06:26 ए एम से 07:51 ए एम
गुलिक काल
09:16 ए एम से 10:41 ए एम
विडाल योग
08:49 पी एम से 06:27 ए एम, अक्टूबर 23
03:16 ए एम, अक्टूबर 23 से 04:53 ए एम, अक्टूबर 23
दुर्मुहूर्त
10:12 ए एम से 10:57 ए एम
बाण
रज - 08:44 पी एम तकBaana
02:44 पी एम से 03:29 पी एम
 
 
भद्रा
06:26 ए एम से 02:47 पी एम
 
 
पञ्चक
पूरे दिन

आनन्दादि एवं तमिल योग

आनन्दादि योग
वज्र - 08:49 पी एम तकInauspicious
तमिल योग
मरण - 08:49 पी एम तक
मुद्गरInauspicious
मरण
जीवनम
पूर्ण जीवन𝟣
नेत्रम
दो नेत्र𝟤

निवास और शूल

शनि
♄
दिशा शूल
दक्षिणSouth
आकाश - 02:47 पी एम तक
Heaven Cloud
नक्षत्रम शूल
दक्षिण - 08:49 पी एम से पूर्ण रात्रि तकSouth
पाताल
ⓘ
चन्द्र वास
पश्चिमWest
मृत्यु - 02:47 पी एम तक
Earth
राहु वास
दक्षिणSouth
क्रीड़ा में - 02:47 पी एम तक
Shiva Linga
कुम्भ चक्र
पश्चिम
Auspicious
कैलाश पर
Shiva Linga
 
 

अन्य कैलेण्डर एवं युग

कलियुग
5127 वर्ष
लाहिरी अयनांश
24.238279Ayanamsha
कलि अहर्गण
1872870 दिन
राटा डाई
739911
जूलियन दिनाङ्क
अक्टूबर 9, 2026 सीई
जूलियन दिन
2461335.5 दिन
राष्ट्रीय नागरिक दिनाङ्क
आश्विन 30, 1948 शकIndian Flag
संशोधित जूलियन दिन
61335 दिन
राष्ट्रीय निरयण दिनाङ्क
कार्तिक 07, 1948 शकIndian Flag
 
 

चन्द्रबलम & ताराबलम

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक
MeshaमेषVrishabhaवृषभSimhaसिंहKanyaकन्याDhanuधनुKumbhaकुम्भ
*कर्क राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र
*पुनर्वसु के अन्तिम पद, पुष्य, अश्लेशा में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र
निम्न नक्षत्र के लिए उत्तम ताराबलम 08:49 पी एम तक
Ashwiniअश्विनीKrittikaकृत्तिकाMrigashiraमृगशिराPunarvasuपुनर्वसुPushyaपुष्यMaghaमघाUttara Phalguniउत्तराफाल्गुनीChitraचित्राVishakhaविशाखाAnuradhaअनुराधाMulaमूलUttara Ashadhaउत्तराषाढाDhanishthaधनिष्ठाPurva Bhadrapadaपूर्व भाद्रपदUttara Bhadrapadaउत्तर भाद्रपद
निम्न नक्षत्र के लिए उत्तम ताराबलम अगले दिन सूर्योदय तक
BharaniभरणीRohiniरोहिणीArdraआर्द्राPushyaपुष्यAshleshaअश्लेशाPurva Phalguniपूर्वाफाल्गुनीHastaहस्तSwatiस्वातीAnuradhaअनुराधाJyeshthaज्येष्ठाPurva Ashadhaपूर्वाषाढाShravanaश्रवणShatabhishaशतभिषाUttara Bhadrapadaउत्तर भाद्रपदRevatiरेवती

पञ्चक रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न

आज के दिन के लिए पञ्चक रहित मुहूर्त
अग्नि पञ्चक - 06:26 ए एम से 08:28 ए एम
शुभ मुहूर्त - 08:28 ए एम से 10:47 ए एम
रज पञ्चक - 10:47 ए एम से 12:51 पी एम
शुभ मुहूर्त - 12:51 पी एम से 02:33 पी एम
चोर पञ्चक - 02:33 पी एम से 02:47 पी एम
शुभ मुहूर्त - 02:47 पी एम से 04:01 पी एम
रोग पञ्चक - 04:01 पी एम से 05:26 पी एम
चोर पञ्चक - 05:26 पी एम से 07:01 पी एम
शुभ मुहूर्त - 07:01 पी एम से 08:49 पी एम
रोग पञ्चक - 08:49 पी एम से 08:56 पी एम
शुभ मुहूर्त - 08:56 पी एम से 11:11 पी एम
मृत्यु पञ्चक - 11:11 पी एम से 01:31 ए एम, अक्टूबर 23
अग्नि पञ्चक - 01:31 ए एम, अक्टूबर 23 से 03:49 ए एम, अक्टूबर 23
शुभ मुहूर्त - 03:49 ए एम, अक्टूबर 23 से 06:05 ए एम, अक्टूबर 23
रज पञ्चक - 06:05 ए एम, अक्टूबर 23 से 06:27 ए एम, अक्टूबर 23
आज के दिन के लिए उदय-लग्न मुहूर्त
Tula
तुला - 06:09 ए एम से 08:28 ए एम
Vrishchika
वृश्चिक - 08:28 ए एम से 10:47 ए एम
Dhanu
धनु - 10:47 ए एम से 12:51 पी एम
Makara
मकर - 12:51 पी एम से 02:33 पी एम
Kumbha
कुम्भ - 02:33 पी एम से 04:01 पी एम
Meena
मीन - 04:01 पी एम से 05:26 पी एम
Mesha
मेष - 05:26 पी एम से 07:01 पी एम
Vrishabha
वृषभ - 07:01 पी एम से 08:56 पी एम
Mithuna
मिथुन - 08:56 पी एम से 11:11 पी एम
Karka
कर्क - 11:11 पी एम से 01:31 ए एम, अक्टूबर 23
Simha
सिंह - 01:31 ए एम, अक्टूबर 23 से 03:49 ए एम, अक्टूबर 23
Kanya
कन्या - 03:49 ए एम, अक्टूबर 23 से 06:05 ए एम, अक्टूबर 23

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में नई दिल्ली, भारत के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

वैदिक ज्योतिष में पञ्चाङ्ग समय की भाँति होता है। आधुनिक युग में लोग समय देखने के लिये कैलेण्डर एवं घड़ी का उपयोग करते हैं, किन्तु हिन्दु धर्म के अनुयायी समय देखने हेतु पञ्चाङ्ग का उपयोग करते हैं। पञ्चाङ्ग से न केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चन्द्रोदय तथा चन्द्रास्त के विषय में ज्ञात होता है, अपितु इसमें दिन के सभी शुभ एवं अशुभ मुहूर्त भी वर्णित होते हैं।

अन्य शब्दों में कहें तो पञ्चाङ्ग एक वैदिक समय सूचक अर्थात् घड़ी है, जो केवल उस भौगोलिक स्थान के लिये मान्य होती है, जिसके लिये इसे बनाया जाता है। इसीलिये, विश्व के प्रत्येक नगर के लिये भिन्न-भिन्न पञ्चाङ्ग निर्मित किये जाते हैं।

तिथि, नक्षत्र, योग, करण तथा वार, यह पञ्चाङ्ग के पाँच मूलभूत तत्व होते हैं। पञ्चाङ्गकर्ताओं द्वारा इन पाँच अङ्गों तथा इनके अतिरिक्त लग्न, सूर्योदय, सूर्यास्त, चन्द्रोदय, दिवस तथा रात्रि की अवधि, चन्द्र एवं सूर्य की राशि स्थितियों आदि के संयोग से अनेक शुभ एवं अशुभ योगों का विश्लेषण किया जाता है।

पञ्चाङ्ग में कुछ ऐसे योगों को भी सम्मिलित किया गया है जिनका संयोग प्रतिदिन नहीं अपितु यदा-कदा होता है। द्रिक पञ्चाङ्ग के अन्तर्गत भद्रा, पंचक, गण्ड मूल, विंछुड़ो, द्विपुष्कर योग, त्रिपुष्कर योग, रवि पुष्य योग, गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग, ज्वालामुखी योग, आडल योग तथा विडाल योग आदि योगों को भी सम्मिलित किया गया है। ये सभी दैनिक पञ्चाङ्ग के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण शुभ एवं अशुभ योग हैं, जिनका संयोग किसी भी दिन यादृच्छिक रूप से निर्मित होता रहता है।

पञ्चाङ्ग एक वैदिक घड़ी के समान है जिसका अवलोकन मुहूर्त गणना हेतु पूरे दिन किया जा सकता है। निम्नोक्त महत्त्वपूर्ण क्रियाकलापों के लिये निरन्तर रूप से पञ्चाङ्ग की आवश्यकता होती है -

  1. ब्रह्म मुहूर्त - इस मुहूर्त में जागना एवं प्रथम पूजन करना महत्त्वपूर्ण होता है। सभी मनुष्यों को धार्मिक एवं शैक्षणिक गतिविधियाँ आरम्भ करने के लिये इस शुभ मुहूर्त में उठने का सुझाव दिया जाता है।
  2. प्रातः सन्ध्या - यह हिन्दु धर्म के अनुयायियों के लिये एक अति महत्त्वपूर्ण अनुष्ठान एवं दैनिक रूप से की जाने वाली तीन सन्ध्याओं में से एक है।
  3. मध्याह्न सन्ध्या - यह तीन दैनिक सन्ध्याओं में से एक है जो मध्याह्न काल में की जाती है। मध्याह्न सन्ध्या, अभिजित मुहूर्त के समय की जाती है, जो एक शुभ मुहूर्त है।
  4. सायाह्न सन्ध्या - यह हिन्दुओं के लिये एक आवश्यक अनुष्ठान है, जो दैनिक रूप से की जाने वाली तीन सन्ध्याओं में से एक है।
  5. राहु काल - यह एक अशुभ समयावधि है। राहु काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य आरम्भ नहीं करना चाहिये। राहु काल भारत के दक्षिणी राज्यों में अधिक प्रचलित है।
  6. अभिजित मुहूर्त - यह दिन के मध्य में एक शुभ समयावधि है। यदि कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है तो उस स्थिति में अभिजित मुहूर्त में सभी प्रकार के शुभ कार्य किये जा सकते हैं।
  7. विजय मुहूर्त - यह एक शुभ मुहूर्त है। विजय मुहूर्त यात्रा आरम्भ करने हेतु शुभ माना जाता है। इस मुहूर्त में यात्रा आरम्भ करने से यात्रा सफल होती है तथा यात्रा का उद्देश्य पूर्ण होता है।
  8. सङ्कल्प - यह पूजन अनुष्ठान का एक अभिन्न अङ्ग है। सङ्कल्प के द्वारा कालचक्र के एक निश्चित क्षण में पूर्ण इच्छाशक्ति द्वारा देश, काल, समय आदि के उच्चारण सहित अनुष्ठान सम्बन्धित प्रतिज्ञा को दृढ़ एवं पुष्ट किया जाता है। सङ्कल्प हेतु पञ्चाङ्ग के सभी पाँच तत्वों की आवश्यकता होती है। इन पाँच तत्वों के अतिरिक्त सङ्कल्प में राशिमण्डल के नव ग्रहों, मुख्यतः चन्द्र, सूर्य एवं बृहस्पति की स्थिति भी सम्मिलित होती है।
  9. सूर्योदय - सूर्य नमस्कार करने एवं उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पण करने हेतु सूर्योदय का उचित समय ज्ञात होना आवश्यक है। अतः पञ्चाङ्ग की आवश्यकता प्रतिदिन होती है, क्योंकि सूर्योदय का समय वर्ष पर्यन्त परिवर्तित होता रहता है।
  10. चन्द्रोदय - चन्द्र देव से सम्बन्धित भी अनेक अनुष्ठान होते हैं। संकष्टी चतुर्थी तथा कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भी उदीयमान चन्द्र की पूजा-अर्चना की जाती है।

उपरोक्त उदाहरण विशाल सागर में एक तुच्छ जलबिन्दु के समान हैं। इसके अतिरिक्त भी हिन्दु धर्मावलम्बी अनेक प्रकार से पञ्चाङ्ग का उपयोग करते हैं। आगामी त्यौहार एवं व्रत के दिवस, विभिन्न महत्त्वपूर्ण शुभ एवं अशुभ योगों की गणना के लिये भी दैनिक पञ्चाङ्ग का उपयोग किया जाता है।

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