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देवी दुर्गा का आगमन पालकी पर - अशुभ समय का सूचक

DeepakDeepak

पालकी पर देवी दुर्गा

देवी दुर्गा का आगमन पालकी पर

शशिसूर्ये गजारूढा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकी‌र्त्तिता॥
गजे च जलदा देवी छत्रभंगस्तुरंगमे।
नौकायां सर्वसिद्धिः स्यात् दोलायां मरणं ध्रुवम्॥

रविवार और सोमवार को भगवती हाथी पर आती हैं, शनि और मंगल वार को घोड़े पर,
बृहस्पति और शुक्रवार को डोली पर, बुधवार को नाव पर आती हैं।
दुर्गा हाथी पर आगमन से अच्छी वर्षा होती है, घोड़े पर आगमन से राजाओं में युद्ध होता है।
नाव पर आगमन से सभी कार्यों में सिद्धि मिलती है।
यदि डोली या पालकी पर आगमन होता है तो
उस वर्ष में विभिन्न कारणों से अनेक लोगों की मृत्यु होती है।

सप्ताह का वह दिन, जिस दिन नवरात्रि या देवी पक्ष आरम्भ होता है, उस दिन को देवी दुर्गा के आगमन का दिन माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार यदि देवी दुर्गा बृहस्पतिवार या शुक्रवार को आती हैं तो वे पालकी पर आरूढ़ होकर आती हैं। देवी दुर्गा का पालकी या डोली पर आगमन बहुत शुभ नहीं माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार देवी दुर्गा का आगमन पालकी पर होने से विभिन्न कारणों से विशाल जनहानि होने की सम्भावना होती है।

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