

मन्त्र अर्थ - समुद्र मन्थन के समय क्षीर सागर से उत्पन्न सुर तथा असुरों द्वारा नमस्कार की गयी देवस्वरुपिणी माता, आपको बार-बार नमस्कार है। मेरे द्वारा अर्पित इस अर्घ्य को आप स्वीकार करें।

मन्त्र अर्थ - हे जगदम्बे! हे स्वर्गवासिनी देवी! हे सर्वदेवमयी! आप मेरे द्वारा अर्पित इस अन्न को ग्रहण करें।

मन्त्र अर्थ - हे समस्त देवताओं द्वारा अलङ्कृत माता! नन्दिनी! मेरा मनोरथ पूर्ण करो।

मन्त्र अर्थ - त्रयोदशी पर यह दीप मैं सूर्यपुत्र को अर्थात् यमदेवता को अर्पित करता हूँ। मृत्यु के पाश से वे मुझे मुक्त करें एवं मेरा कल्याण करें।

मन्त्र अर्थ - जोती हुयी भूमि की मिट्टी, काँटे तथा पत्तों से युक्त, हे अपामार्ग, आप मेरे पाप दूर कीजिये।

मन्त्र अर्थ - आज चतुर्दशी के दिन नरक के देवता की प्रसन्नता के लिये तथा समस्त पापों के विनाश के लिये मैं चार बत्तियों वाला चौमुखा दीप अर्पित करता हूँ।


मन्त्र अर्थ - हे धन और सम्पत्ति की देवी लक्ष्मी, आपको मेरा नमस्कार है।

मन्त्र अर्थ - दैत्य तथा दानवों से पूजित हे बलिराज, आपको नमस्कार है। हे इन्द्रशत्रो, हे अमराराते, विष्णु के सानिध्य को देने वाला हो।
हे कुरुनन्दन, बलि को उद्देश्य कर जो दान दिये जाते हैं वे अक्षय को प्राप्त होते हैं। मैंने इस प्रकार प्रदर्शित किया है।

मन्त्र अर्थ - पृथ्वी को धारण करने वाले गोवर्धन! आप गोकुल के रक्षक हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने आपको भुजाओं में उठाया था। आप मुझे करोडों गौएँ प्रदान करें।

मन्त्र अर्थ - धेनुरूप में विद्यमान जो लोकपालों की साक्षात लक्ष्मी हैं तथा जो यज्ञ के लिये घी प्रदान करती हैं, वह गौ माता मेरे पापों का नाश करें।

मन्त्र अर्थ - हे मार्तण्डज - सूर्य से उत्पन्न हुये, हे पाशहस्त - हाथ में पाश धारण करने वाले, हे यम, हे अन्तक, हे लोकधर, हे अमरेश, भातृद्वितीया में की हुयी देवपूजा एवं अर्घ्य को ग्रहण करो। हे भगवन् आपको नमस्कार है।

मन्त्र अर्थ - हे सर्व प्राणिमात्र को सुख प्रदान करने वाली मार्गपाली, आपको मेरा नमस्कार है। पुत्र, पत्नी इत्यादि द्वारा आपको पिरोया है। मेरे कार्य के लिये पुनः एक बार आपका आगमन हो।