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विष्णु बृहस्पतिवार व्रत | विष्णु गुरुवार व्रत

DeepakDeepak

विष्णु बृहस्पतिवार व्रत

भगवान विष्णु का बृहस्पतिवार व्रत

सप्तवारों में बृहस्पतिवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। नवग्रह मण्डल में बृहस्पति देव को बृहस्पतिवार का शासक ग्रह माना जाता है। भगवान श्रीहरि विष्णु हिन्दु धर्म के प्रमुख तीन देवताओं अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश में से एक हैं जिन्हें संयुक्त रूप से त्रिमूर्ति के नाम से जाना जाता है। श्री विष्णु बृहस्पतिवार व्रत विशेषतः गृहस्थ सुख, सन्तान सुख तथा धार्मिक एवं आर्थिक उन्नति की प्राप्ति हेतु किया जाता है। ज्योतिष के विद्वान विवाह में आ रही बाधाओं के निवारण हेतु भी बृहस्पतिवार व्रत का सुझाव देते हैं।

Lord Vishnu with Goddess Lakshmi
देवी लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु

बृहस्पतिवार व्रत को गुरुवार व्रत भी कहा जाता है। बृहस्पति ग्रह की शान्ति एवं अनुकूलता के लिये भी यह व्रत अत्यन्त प्रभावकारी माना गया है। भगवान विष्णु की उपासना से देवी लक्ष्मी की कृपा भी स्वतः ही प्राप्त हो जाती है। अतः श्री विष्णु बृहस्पतिवार व्रत करने से भौतिक व आध्यात्मिक दोनों प्रकार की उन्नति होती है। लोक मान्यताओं के अनुसार, जो स्त्रियाँ एवं पुरुष श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में सुख, सौभाग्य, शान्ति तथा वैवाहिक स्थिरता में वृद्धि होती है।

विष्णु बृहस्पतिवार व्रत आहार विचार

जो अन्नाहारी हैं उन्हें एक समय सात्त्विक भोजन ग्रहण करना चाहिये। भोजन में किसी भी प्रकार के नमक का प्रयोग वर्जित है। व्रत के दिन केले, चना की दाल, पीले चावल, केसर, हल्दी आदि का दान करना चाहिये किन्तु स्वयं सेवन नहीं करना चाहिये। दूध, मेवा तथा अन्य फलों से फलाहार कर सकते हैं। व्रती को व्रत के दिन से पूर्व सन्ध्या को ही प्याज, लहसुन, मांस, मद्य, अन्न आदि त्याग देना चाहिये।

ध्यान रहे कि इस दिन केले के वृक्ष का पूजन किया जाता है। अतः किसी भी रूप में स्वयं उसका सेवन न करें। गुरु एवं वृद्धजनों का आशीर्वाद लेने से बृहस्पतिवार व्रत के पुण्य में अत्यधिक वृद्धि होती है।

विष्णु बृहस्पतिवार व्रत सङ्क्षिप्त विधि

विष्णु बृहस्पतिवार व्रत अत्यधिक प्रचलित व्रत है। क्षेत्रीय विविधताओं के कारण इसकी विधि में भिन्नता हो सकती है। यहाँ सामान्य एवं सरल विधि प्रदान की गयी है। इसके अतिरिक्त आप अपनी परम्परा के अनुसार भी पूजन कर सकते हैं। सर्वप्रथम प्रातः किसी पवित्र नदी में अथवा जल में गङ्गाजल मिलाकर स्नान करें एवं पीत वस्त्र धारण करें। तदुपरान्त पूर्ण भक्ति भाव से सम्वत्सर, माह, पक्ष, तिथि, वार, स्थान, नाम, गोत्र आदि का उच्चारण करते हुये 11, 21 अथवा 51 बृहस्पतिवार व्रत करने का सङ्कल्प ग्रहण करें - "मैं अपने समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु तथा सुख-समृद्धि, धन-धान्य, विद्या एवं ज्ञान आदि की प्राप्ति हेतु विष्णु बृहस्पतिवार व्रत करूँगा। इस व्रत के अङ्ग स्वरूप विष्णु जी का षोडशोपचार पूजन भी करूँगा।"

  • तदुपरान्त पूजन स्थल को सम्भव हो तो गाय के गोबर से लीपकर चौक पूरें एवं उस पर एक लकड़ी की चौकी रखकर उस पर पीत वस्त्र बिछायें।
  • एक ताम्र का पात्र रखकर उस पर द्वादश कमल की रचना कर भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा श्री विष्णु यन्त्र को विराजमान करें।
  • धूप, दीप, गन्ध, पुष्प, अक्षत् आदि उपचारों सहित भगवान विष्णु की षोडशोपचार पूजा करें।
  • विष्णु जी को विशेषतः पीत वस्त्र, पीत पुष्प, पीत मिष्टान्न, तुलसी पत्र तथा केले का फल अवश्य अर्पित करें।
  • केले के वृक्ष का पूजन करें तथा जल अर्पित करें।
  • भगवान विष्णु के द्वादशाक्षर मन्त्र का यथाशक्ति जाप करें।
  • श्रद्धानुसार विष्णु सहस्रनाम, विष्णु दशावतार स्तोत्र, नारायण कवच आदि का भी पाठ करें।
  • व्रत के सम्पूर्ण पुण्यफल की प्राप्ति हेतु श्री विष्णु बृहस्पतिवार व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करें।

इस प्रकार श्री विष्णु बृहस्पतिवार व्रत की सङ्क्षिप्त एवं सरल विधि सम्पूर्ण होती है। विस्तृत विधि हेतु व्रतराज आदि ग्रन्थों का अवलोकन करें।

विष्णु बृहस्पतिवार व्रत उद्यापन

व्रत के सङ्कल्प के अनुसार 11, 21, 51 आदि नियत सङ्ख्या में व्रत सम्पन्न करने के उपरान्त व्रत का उद्यापन करना आवश्यक माना जाता है। सर्वप्रथम व्रत के उद्यापन हेतु आचार्य एवं विप्रजनों को निमन्त्रित करें। तदुपरान्त आचार्य के मार्गदर्शन में भगवान विष्णु का पूजन एवं हवन करें। पूजनोपरान्त शेष पूजन सामग्री आचार्य को ही भेंट कर दें।

ब्राह्मणों एवं दम्पतियों को भोजन करायें तथा यथाशक्ति दक्षिणा, वस्त्र, फल, मिष्टान्न आदि प्रदान करें। यदि सम्भव हो तो केले अथवा पीपल के वृक्ष की पूजा-अर्चना कर जल अर्पित करें। अन्त में सभी से व्रत की पूर्णता हेतु प्रार्थना कर व्रत को सम्पन्न करें। आचार्य एवं विप्रजनों से व्रत की सफलता हेतु आशीर्वाद लेकर उन्हें विदा करें। तदुपरान्त स्वयं भी प्रियजनों सहित भोजन ग्रहण करें।

व्रत के दिन मिथ्या भाषण, क्रोध, तथा वाणी से भी किसी का अपमान करना वर्जित होता है। यह व्रत विशेष रूप से गृहस्थों, विद्यार्थियों तथा विवाहित स्त्रियों के लिये अत्यन्त फलदायी माना गया है। श्रद्धा, नियम एवं विधिपूर्वक यह व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा तो प्राप्त होती ही है, साथ ही माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।

इस प्रकार श्री विष्णु बृहस्पतिवार व्रत के उद्यापन की सरल विधि सम्पन्न होती है। विस्तृत विधि हेतु व्रतराज आदि ग्रन्थों का अवलोकन करें।


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द्रिक पञ्चाङ्ग और पण्डितजी लोगो drikpanchang.com के पञ्जीकृत ट्रेडमार्क हैं।
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