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नवरात्रि के दौरान डाँडिया एवं गरबा

DeepakDeepak

डाँडिया एवं गरबा

नवरात्रि में डाँडिया एवं गरबा का महत्त्व

Navratri Navdurga

नवरात्रि भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय पर्वों में से के है। नवरात्रि विशेषतः गुजरात एवं महाराष्ट्र में अधिक लोकप्रिय है। नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ होता है नौ रात्रि अर्थात नौ रातें एवं यह नौ रात्रियाँ देवी दुर्गा की पूजा को समर्पित होती हैं। डाँडिया रास तथा गरबा रास दो प्रकार के नृत्य हैं, जिनके माध्यम से भक्तगण नवरात्रि में देवी दुर्गा को प्रसन्न करते हैं तथा उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। इन नृत्यों के उद्भव का सम्बन्ध भगवान कृष्ण के साथ माना जाता है।

डाँडिया एवं गरबा नृत्य देवी दुर्गा के सम्मान में किया जाता है तथा यह नृत्य देवी दुर्गा एवं महिषासुर के मध्य हुये युद्ध का प्रतीकात्मक रूप है जिसे तलवारों के नृत्य के नाम से भी जाना जाता है।

आधुनिक भारत में, डाँडिया एवं गरबा को धार्मिक आयोजनों से अधिक साँस्कृतिक आयोजनों के रूप में मनाया जाता है। किन्तु, इन नृत्य कलाओं का धार्मिक महत्त्व है एवं ये देवी दुर्गा को समर्पित हैं। डाँडिया तथा गरबा समारोहों का व्यावसायीकरण हो जाने के कारण इनका धार्मिक महत्त्व प्रभावित होता जा रहा है। यह स्मरण रहना चाहिये कि डाँडिया एवं गरबा नृत्य मात्र मनोरञ्जन एवं आत्म-प्रसन्नता हेतु नहीं हैं अपितु यह शक्ति तथा साहस की देवी को समर्पित भक्तिपूर्ण आध्यात्मिक कर्म हैं।

डाँडिया एवं गरबा के मध्य अन्तर

डाँडिया एवं गरबा आध्यात्मिक नृत्य के दो भिन्न-भिन्न प्रकार हैं। डाँडिया नृत्य में लकड़ी की दो रँगबिरँगी छड़ियों का प्रयोग किया जाता है, जो कि देवी दुर्गा की तलवारों को प्रदर्शित करती हैं तथा गरबा नृत्य बिना किसी वस्तु की सहायता लिये हाथों तथा पैरों से विभिन्न मुद्राओं द्वारा किया जाता है।

अधिकांश डाँडिया नृत्य मुद्राओं हेतु सम सँख्या में व्यक्तियों की आवश्यकता होती है किन्तु गरबा नृत्य के लिये व्यक्तियों की सँख्या से सम्बन्धित कोई विशेष नियम नहीं है।

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