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हनुमान मङ्गलवार व्रत | हनुमान व्रत

DeepakDeepak

हनुमान मङ्गलवार व्रत

भगवान हनुमान का मङ्गलवार व्रत

हिन्दु धर्म में मङ्गलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। नवग्रहों के आधार पर यह दिन मङ्गल देव द्वारा शासित होता है। मङ्गलवार के दिन श्री हनुमान जी को प्रसन्न करने हेतु व्रत एवं पूजन किया जाता है। हनुमान मङ्गलवार व्रत भगवान श्री हनुमान को समर्पित एक अत्यन्त प्रभावशाली व्रत है, जो विशेष रूप से भक्ति, शक्ति एवं आत्मबल की प्राप्ति तथा सङ्कटों के निवारण हेतु किया जाता है। हनुमान जी सप्त-चिरञ्जीवियों में से एक हैं जो सभी युगों में अमर रहते हैं। स्वयं माता सीता ने उन्हें समस्त युगों में अजर-अमर रहने का वरदान दिया था। इसीलिये हनुमान जी को कलियुग का जाग्रत देवता भी माना जाता है।

Lord Hanuman
भगवान हनुमान

मङ्गलवार व्रत के फलस्वरूप हनुमान जी की कृपा से समस्त प्रकार की बाधायें, रोग, शत्रु भय, ग्रह दोष तथा मानसिक तनाव दूर होते हैं। हनुमान जी अपने भक्तों को बल, बुद्धि, विद्या, ऊर्जा, साहस एवं पराक्रम प्रदान करते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यदि कुण्डली में मङ्गल दोष विद्यमान हो, तो हनुमान मङ्गल व्रत उसे सन्तुलित करने में सहायक सिद्ध होता है। पूर्ण भक्तिभाव से इस व्रत का पालन करने पर, शारीरिक एवं मानसिक शक्ति की प्राप्ति, रोगों से मुक्ति, शत्रु बाधाओं का नाश, ग्रह दोषों का शमन, आध्यात्मिक बल तथा भक्ति की वृद्धि होती है।

हनुमान मङ्गलवार व्रत आहार विचार

हनुमान व्रत में आहार का विशेष महत्त्व होता है, क्योंकि यह व्रत संयम, शुद्धता तथा ब्रह्मचर्य का प्रतीक माना गया है। व्रत का फल तभी प्राप्त होता है जब उपवास सहित आहार नियमों का भी पालन किया जाये। मांसाहार, मद्यपान, लहसुन, प्याज, बासी भोजन एवं अधिक मिर्च-मसाले वाले खाद्य आदि तामसिक भोजन को व्रत में पूर्णतः त्याज्य माना गया है।

इस व्रत में फल, दूध, जल, नारियल पानी, साबूदाना, मखाना, मूँगफली आदि फलाहार का सेवन किया जाता है। विभिन्न मान्यताओं के अनुसार हनुमान मङ्गलवार व्रत में एक समय सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। कुछ क्षेत्रों में हनुमान जी को मीठा पुआ एवं बूँदी का भोग लगाया जाता है तथा सायाह्नकाल उसे ही प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाता है। मङ्गलवार व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य माना गया है।

हनुमान मङ्गलवार व्रत सङ्क्षिप्त विधि

हनुमान जी के पूजन हेतु प्रातःकाल अथवा सायाह्नकाल दोनों ही उपयुक्त माने जाते हैं। पूजन करने से पूर्व किसी पवित्र नदी में अथवा गङ्गाजल युक्त जल से घर पर ही स्नान करें। स्नान, तर्पण आदि कर लाल रंग के शुद्ध एवं स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तदुपरान्त श्रद्धानुसार 21, 31 अथवा 51 मङ्गलवार व्रत करने का सङ्कल्प ग्रहण करें - "मैं कष्टों के निवारण, दीर्घायु, समस्त मनोरथों की सिद्धि तथा हनुमान जी की प्रसन्नता हेतु व्रत एवं पूजन करूँगा।"

  • सर्वप्रथम, यदि सम्भव हो तो पूजन-स्थल को गोबर से लीपकर उसपर गोल मण्डल की रचना करें तथा एक लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछायें।
  • तदुपरान्त चौकी पर ताम्र के एक पात्र में श्री हनुमान जी की मूर्ति अथवा यन्त्र की स्थापना करें।
  • तत्पश्चात् लाल पुष्प, लाल वस्त्र, सिन्दूर (चोला), चमेली का तेल, तुलसी पत्र, गुड़, चना, नारियल, लड्डू आदि अर्पित करके गन्ध, धूप, दीप, नैवेद्य आदि 16 उपचारों सहित षोडशोपचार हनुमत् पूजन करें।
  • यथाशक्ति ॐ हं हनुमते नमः। मन्त्र का जाप करें।
  • तदुपरान्त हनुमान मङ्गलवार व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण करें।
  • पूजनोपरान्त गाय को रोटी, गुड़ एवं चना अर्पित करें।

इस प्रकार हनुमान मङ्गलवार व्रत की सङ्क्षिप्त एवं सरल विधि सम्पन्न होती है।

हनुमान मङ्गलवार व्रत उद्यापन

भिन्न-भिन्न मान्यताओं के अनुसार 11, 21, 31 अथवा 51 मङ्गलवार तक निरन्तर व्रत करने के उपरान्त हनुमान मङ्गलवार व्रत का विधिपूर्वक उद्यापन किया जाता है। व्रत के उद्यापन में विशेष पूजन तथा दान का अत्यन्त महत्त्व होता है।

सर्वप्रथम उद्यापन हेतु आचार्य एवं ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक निमन्त्रित करें। हनुमान जी को सिन्दूर में चमेली का तेल मिश्रित कर चोला अर्पित करें तथा लड्डुओं का भोग लगायें। तदुपरान्त पूर्ण विधि-विधान से हनुमान जी की षोडशोपचार पूजा करें। आचार्य के निर्देशानुसार ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्। मन्त्र से 108 आहुतियों सहित हवन करें। हवन में आम की लकड़ी की समिध तथा गुड़, चना, बताशा, घृत आदि से युक्त हवन सामग्री से आहुतियाँ प्रदान करें। पूर्णाहुति के पश्चात् सुन्दरकाण्ड एवं हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ आयोजित करें। तदुपरान्त ब्राह्मणों को भोजन करायें। भोजन में गुड़ का पुआ एवं बूँदी के लड्डू अवश्य सम्मिलित करें। उद्यापन सम्पन्न होने पर व्रत की सम्पूर्ण सामग्री आचार्य को दान कर दें। तदुपरान्त आचार्य एवं ब्राह्मणों को लाल वस्त्र, ताम्र पात्र, मिष्टान्न एवं दक्षिणा आदि सहित विदा करें।

इस प्रकार भक्ति भाव से हनुमान मङ्गलवार व्रत सम्पन्न करने वाले व्रती को दीर्घायु, शान्ति, मानसिक दृढ़ता तथा हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त होती है। हनुमान मङ्गलवार व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, अपितु यह व्रत सङ्कल्प, भक्ति तथा अनुशासन का समन्वय है, जिससे न केवल सांसारिक समस्याओं का समाधान होता है, अपितु आत्मिक उन्नति भी होती है।


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द्रिक पञ्चाङ्ग और पण्डितजी लोगो drikpanchang.com के पञ्जीकृत ट्रेडमार्क हैं।
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