नरक चतुर्दशी का पर्व दीपावली उत्सव के अन्तर्गत आने वाला एक महत्त्वपूर्ण दिन है। अधिकांश वर्षों में यह लक्ष्मी पूजा से एक दिन पहले मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी, दीवाली के समय लक्ष्मी पूजा के पश्चात दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण दिन है। इसीलिये, विशेषतः उत्तर भारतीय राज्यों में, नरक चतुर्दशी के दिन को छोटी दीपावली के रूप में भी जाना जाता है।

तमिल नाडु सहित अधिकांश दक्षिण भारतीय राज्यों में छोटी दीपावली को दीपावली के रूप में मनाया जाता है तथा यह दीपावली के उत्सव का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण दिन होता है।
नरक चतुर्दशी का पर्व इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध के उपलक्ष में मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी की किंवदन्तियों के अनुसार, भगवान कृष्ण ने ब्रह्म मुहूर्त में राक्षस नरकासुर का वध करने के पश्चात स्वयं तेल से स्नान किया था। इसीलिये, इस दिन सूर्योदय से पूर्व तेल से स्नान करना महत्त्वपूर्ण माना जाता है, जिसे अभ्यङ्ग स्नान कहा जाता है।
नरक चतुर्दशी का दिन चन्द्र कैलेण्डर के आधार पर निर्धारित किया जाता है। जिस दिन ब्रह्म मुहूर्त के समय चतुर्दशी तिथि प्रचलित होती है, उस दिन को नरक चतुर्दशी माना जाता है। सूर्योदय से ठीक पहले के लगभग एक घण्टा साठ मिनट का समय ब्रह्म मुहूर्त के नाम से जाना जाता है।
पूर्णिमान्त हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार -
कार्तिक (8वें माह) की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी (14वाँ दिन)
अमान्त हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार -
आश्विन (7वें माह) की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी (14वाँ दिन)