

टिप्पणी: सभी समय २४:००+ प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय २४:०० से अधिक हैं और आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।
हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को मनायी जाने वाली कल्कि द्वादशी के लगभग पन्द्रह दिवस पश्चात् आने वाली कृष्ण पक्ष द्वादशी को कृष्ण कल्कि द्वादशी के नाम से जाना जाता है। इस द्वादशी का नाम भगवान विष्णु के कल्कि अवतार पर आधारित है। हिन्दु धर्मग्रन्थों में प्राप्त वर्णन के अनुसार कलियुग के अन्तिम चरण में पापियों का संहार करने हेतु भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतरित होंगे।
अतः अनेक भक्तगण इस अवसर पर भगवान विष्णु अथवा भगवान कल्कि की पूजा-अर्चना करते हैं। द्वादशी तिथि पर भगवान विष्णु की आराधना करने से मनुष्य के सङ्कटों का निवारण होता है तथा उसे आत्मिक शान्ति की प्राप्ति होती है। अतः भगवान विष्णु की प्रियता हेतु द्वादशी व्रत का पालन अवश्य करना चाहिये।
इस व्रत की विधि ज्ञात करने हेतु भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को मनायी जाने वाली कल्कि द्वादशी की विधि का अवलोकन करें।